केरल बूढ़ा हो रहा है! और ये एक प्रॉब्लम है। जी हाँ, रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट ने बताया है कि इंडिया के अलग अलग स्टेट्स में ओल्ड एज डिपेंडेंसी रेशियो बढ़ रहा है और केरल इस मामले में देश में टॉप पर है।
ओल्ड एज डिपेंडेंसी रेशियो मतलब कितने ज्यादा बुजुर्ग लोग उस जगह की कामकाजी जनसंख्या पर डिपेंडेंट हैं। और ज्यादा टेक्निकल टर्म्स में समझाऊँ तो कितने 65 साल से ज्यादा के लोग 15-64 साल के लोगों के काम पर डिपेंडेंट हैं।
तो RBI की रिपोर्ट ने कहा है कि इस समय केरल का डिपेंडेंसी रेशियो 30 है और 2036 तक ये बढ़ कर 38 हो जाएगा। यानी 2036 में केरल के हर 100 युवाओं को 38 बुजुर्गों को सपोर्ट करना होगा।

लेकिन बुजुर्गों का बढ़ता नंबर आख़िर प्रॉब्लम क्यों है? एक्सप्लेन करता हूँ! जब आपके पास ज्यादा बूढ़े लोग होते हैं तो काम करने वाले कम हो जाते हैं। इसके अलावा उनकी पेंशन, हेल्थ और बाक़ी जरूरतों पर खर्च भी बढ़ता है।
यानी एक तरफ़ जहाँ कमाने वाले लोग कम हो गए तो दूसरी तरफ़ खर्च बढ़ गया। इसके साथ ही कैपिटल भी कम हो जाती है। लोगों ने जो जीवन भर बचाया होता है, वो खर्च करने की बारी आ जाती है।
अगर आपको अब भी इस फ़ेनोमेना को समझने में दिक्कत हो रही है तो जापान का एग्जाम्पल ले लीजिए! जो डिपेंडेंसी रेशियो केरल में 2036 में 38 पहुँचेगा, जापान में ये रेशियो ऑलरेडी लगभग 50 से ऊपर है।
और जापान को पता है क्या-क्या समस्याएँ हों रही हैं? उन्हें काम करने वाले लोग नहीं मिल रहे, इसलिए बाहर से लोग बुलाए जा रहे हैं। इकॉनमी बढ़ने की रफ़्तार एकदम स्लो हो गई है। हेल्थ पर खर्च बढ़ गया है।
और जापान तो तब भी डेवलप हो चुका था जब उसके साथ ये समस्या हुई, केरल तो फाइनेंशियली अब भी समस्या में है। हर बार उसका काम कर्ज लेकर चल रहा है।
वैसे केरल ही नहीं आने वाले समय में तमिलनाडु जैसे स्टेट्स भी यही समस्या देखने वाले हैं।




