आपने चाइना, साउथ कोरिया और जापान की कई सारी स्टोरीज सुनी होंगी कि कैसे वो दुनिया की फैक्ट्री बन गए। लेकिन साइलेंटली इंडिया उनकी जगह ले रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि हमने कुछ साल पहले एक राइट स्टेप लिया था।
और ये राइट स्टेप था सेंट्रल गवर्नमेंट की PLI स्कीम। PLI यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव! मोदी सरकार ने बेसिकली कहा यानी कोई भी कंपनी अगर इंडिया में इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो या फार्मा जैसे सेक्टर्स में प्रोडक्शन चालू करती है तो उन्हें हम भी अपनी तरफ़ से कुछ इंसेंटिव्स देंगे
और इस स्कीम ने इंडिया में खेल बदल दिया है। इकोनॉमिक सर्वे के एक डेटा ने बताया है कि अब तक PLI के अंडर हमारे देश में अब तक 2 लाख करोड़ से ज्यादा का इन्वेस्टमेंट हो चुका है और इससे 12 लाख से ज़्यादा जॉब्स क्रिएट हुई हैं।
और सबसे ज्यादा रेवलॉयूशन हुआ है इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफ़ैचरिंग सेक्टर में। 2014 में हमारे देश में ऑल टोटल लगभग 1 लाख करोड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रोडक्शन होता था जो अब बढ़ कर 11 लाख करोड़ से ऊपर पहुँच चुका है.
2014 में हम जहाँ सिर्फ़ 38000 करोड़ के इलेक्ट्रॉनिक्स दुनिया को एक्सपोर्ट करते थे ये 2024-25 में लगभग 800% बढ़ कर 3.27 लाख करोड़ हो चुके हैं।
लेकिन कहानी सिर्फ़ इन नंबर्स तक सीमित नहीं हैं। बल्कि मैं आपको एक बहुत सिंपल सा एग्जाम्पल देता हूँ। आपके हाथ अगर इस समय ऐपल का कोई फ़ोन है तो इस बात के 99% चांसेज हैं कि वो इंडिया में इसी स्कीम के तहत बनाया गया होगा।
इन फैक्ट दुनिया के लगभग 20% आइफ़ोन अब इंडिया में ही बनते हैं और यहीं से सप्लाई होते हैं।
और अभी ये सेक्टर एक्सपैंड ही हो रहा है। सरकार फ़ॉक्सकॉन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, डिक्सन और गोदरेज जैसी कंपनियों को हजारों करोड़ रुपए एलोकेट कर चुकी है।
इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा ऑटो सेक्टर में भी इस PLI ने 35 हजार करोड़ का इन्वेस्टमेंट खींचा है और उससे लगभग 50,000 जॉब्स क्रिएट हुई हैं। इसी तरह फार्मा और केमिकल सेक्टर में भी PLI स्कीम लाई गई है।
यानी मोदी सरकार का कहना है कि तुम हमें मैन्युफैक्चरिंग पॉवर बनाओ, हम तुम्हें इंसेंटिव देंगे!



