असम विधानसभा चुनाव मुहाने पर है, 9 अप्रैल को असम में वोटिंग होने वाली है। उससे पहले भाजपा और कांग्रेस ने अपना एजेंडा क्लियर कर दिया है। कांग्रेस ने स्ट्रेटेजिक तौर पर घुसपैठ वाले मुद्दे को लेकर अपने मुंह में दही जमा ली है। ऐसा मैं क्यों कह रहा हूँ बताता हूँ।
29 मार्च को कांग्रेस ने अपना मैनिफेस्टो लांच किया और उस मैनिफेस्टो में फ्रीबीज के अलावा कुछ भी नहीं है। एक पल के लिए मुझे ऐसा लगा कि मैं किसी इन्शुरन्स पॉलिसी का ब्रोशर पढ़ रहा हूँ। इसमें असम के सबसे बड़े मुद्दे यानी बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर कांग्रेस ने कोई भी एक्शन प्लान नहीं बताया।
वो घुसपैठियों पर क्या एक्शन लेंगे, उनकी हथियाई जमीनों को लेकर क्या कार्रवाई करेंगे, संस्कृति बचाने को क्या काम होगा, सब पर एकदम मौन साधा गया। ये सब तब हुआ है जब बीते लगभग एक साल में असम की हिमंता बिस्वा सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के ख़िलाफ़ ऑपरेशन पुशबैक चलाया हुआ है।
दूसरी तरफ़ कांग्रेस के बाद भाजपा ने भी अपना मेनिफेस्टो जारी कर दिया। भाजपा ने असम में 31 वादे किए हैं और उसका सबसे पहला वादा ही घुसपैठियों को बाहर भगाने को लेकर है। बीजेपी ने कहा है कि इस अवैध घुसपैठ से असम की अस्मिता को खतरा है; यहाँ रह रहे लोगों की जमीन पर कब्जा कर लिया जाता है।
उन सभी घुसपैठियों से एक-एक इंच जमीन वापस ली जाएगी। अभी तक ‘मिशन बसुंधरा’ के तहत 2.3 लाख से ज्यादा परिवारों को उनकी जमीन का हक वापस दिया गया है और इस मिशन को आगे भी जारी रखा जाएगा। और यह कोई केवल चुनावी वादा नहीं है, क्योंकि सीएम हिमंता बिस्वा सरमा लगातार अवैध घुसपैठियो पर एक्शन ले रहे हैं, जिसका एक नजारा हमने ‘ऑपरेशन पुशबैक’ में देख ही लिया है।
बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में साफ शब्दों में अवैध घुसपैठ के समूल नाश की बात कही है। मैनिफेस्टो में ‘Immigrants (Expulsion from Assam) Act, 1950’ और ‘असम एकॉर्ड’ को पूरी तरह से लागू करने की बात भी कही गई है।
लेकिन घुसपैठ के मुद्दे पर कांग्रेस ने इसलिए चुप्पी साध ली है क्योंकि जब 1960 और 1970 के बीच तबके ईस्ट पाकिस्तान और बांग्लादेश से घुसपैठ आ रहे थे तो इन्होंने कोई कदम नहीं उठाया। इसी पार्टी के नेता और देश के पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद तब विरोध करने लगे थे, जब 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बीच नई दिल्ली से यह फरमान जारी किया गया था कि पाकिस्तानी घुसपैठियों को बाहर करो। तब इसी फखरुद्दीन अली अहमद ने कहा था कि ऐसा हुआ तो उनके साथ-साथ 11 MLA सरकार से इस्तीफ़ा दे देंगे।
और जब इस घुसपैठ को लेकर असम में आंदोलन किया गया तो इन्होंने असम एकोड को बनाया लेकिन उसे पूरी तरफ़ से लागू नहीं किया गया। और अब भी कांग्रेस की प्रियोरोटी बदली नहीं हैं।





