प्रियंका गांधी की जेठानी ने 90 साल की बुजुर्ग मुस्लिम महिला की ज़मीन हड़प ली? किच्छा ‘खान फार्म’ विवाद

Summary
प्रियंका गांधी वाड्रा के परिवार से जुड़ी सायरा वाड्रा और 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला नसरीन सांगा के बीच करोड़ों रुपये की संपत्ति का मालिकाना हक पाने को लेकर गंभीर टकराव सामने आया है।


उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के किच्छा में स्थित ‘खान फार्म’ को लेकर उपजा विवाद इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस मामले में प्रियंका गांधी वाड्रा के परिवार से जुड़ी सायरा वाड्रा और 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला नसरीन सांगा के बीच करोड़ों रुपये की संपत्ति का मालिकाना हक पाने को लेकर गंभीर टकराव सामने आया है।

विवाद का मुख्य आधार

  • सायरा वाड्रा का पक्ष: सायरा वाड्रा (जो प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी हैं) का दावा है कि यह फार्म उनकी दिवंगत अविवाहित बुआ का था। उनके अनुसार, बुआ ने दिसंबर 2025 में अपने निधन से पूर्व एक पंजीकृत वसीयत (Registered Will) उनके और उनके चचेरे भाई सिकंदर आलम के नाम कर दी थी। उनका आरोप है कि बुआ की मृत्यु के बाद नसरीन सांगा ने स्थानीय माफिया के साथ मिलकर फार्म के ताले तोड़े, सीसीटीवी कैमरे नष्ट किए और अवैध रूप से कब्जा कर लिया।
  • नसरीन सांगा का पक्ष: दूसरी ओर, 90 वर्षीय बुजुर्ग नसरीन सांगा का दावा है कि वह इस संपत्ति की मूल हकदार कुलसुम खान की बहन हैं और लंबे समय से वहां रह रही हैं। भाजपा का दावा है कि जमीन के मूल कागजात कुलसुम खान के नाम पर हैं।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

इस मामले ने राजनीतिक रंग तब ले लिया जब भारतीय जनता पार्टी ने इसे कांग्रेस के खिलाफ एक बड़े नैरेटिव के रूप में इस्तेमाल किया।

  • भाजपा का हमला: भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस नेतृत्व पर तीखे सवाल उठाए। भाजपा ने कांग्रेस पर एक लाचार बुजुर्ग मुस्लिम महिला की संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया और इसे कांग्रेस के कथित ‘अल्पसंख्यक और महिला प्रेम’ का पर्दाफाश बताया। भाजपा इसे रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े पुराने भूमि विवादों और नेशनल हेराल्ड केस जैसी पुरानी घटनाओं से जोड़कर कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
  • कांग्रेस विधायक की भूमिका: विवाद तब और गहरा गया जब कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ अपने समर्थकों के साथ रात के समय फार्म के गेट पर धरने पर बैठ गए। आरोप है कि विधायक ने वहां पहुंचकर बुजुर्ग महिला को डराया और उन पर प्रॉपर्टी छोड़ने का दबाव बनाया।

प्रशासनिक हस्तक्षेप

रात भर चले इस हंगामे के बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले में दखल दिया है। किच्छा के एसडीएम गौरव पांडे ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर अपने-अपने मूल दस्तावेज और वसीयत पेश करने के लिए कार्यालय बुलाया है। अब प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि संपत्ति का कानूनी मालिक कौन है और इस विवाद के पीछे सच्चाई क्या है।

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