भारत में एक पैटर्न सा बन गया है अगर किसी आपराधिक मामले में कोई मुस्लिम पकड़ा जाता है तो सोशल मीडिया पर तुरंत एक जमात खड़ी हो जाती है और फिर व्हाइटवॉश का खेल शुरू कर दिया जाता है। फिर चाहे मुसलमान दंगा करें या तरुण की मॉब लिंचिंग, हर बार दूसरा पक्ष बताने के लिए कुछ लोग आ जाते हैं।
इस जमात में इस्लामी कट्टरपंथी और हमेशा की तरह वामपंथी होते हैं। नासिक की TCS BPO ब्रांच में हिंदू महिलाओं का यौन शोषण हुआ, उन्हें अपमानित किया गया, उनके धर्मांतरण का प्रयास हुआ और ये सब करने वाले मुस्लिम टीम लीडर्स थे। लेकिन फिर से इन्हीं मुसलमान अपराधियों को ही विक्टिम बताया जाने लगा है।
पहले मैं आपको ब्रीफ में मामला समझाता हूँ, फिर बताता हूँ की व्हाइटवॉश कैसे चल रहा है। नासिक में TCS के BPO विभाग में काम करने वाली हिंदू महिलाओं ने आरोप लगाया कि कंपनी के 6 मुस्लिम टीम लीडर्स ने उनका यौन शोषण किया, फिर ब्लैकमेलिंग, डराना धमकाना और जबरन मुसलमान बनाने का दबाव बनाया।
ये सब करने का आरोप है TCS में काम करने वाले टीम लीडर्स आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख़ कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तार, और दानिश शेख पर। पुलिस ने अब इन्हें गिरफ्तार कर लिया है और पूरे देश में इस मामले की चर्चा हो रही है। तीन दिन से लगातार TCS और इन इस्लामी कट्टरपंथियों की आलोचना हो रही है।
सबसे पहले नसरीन ख़ान नाम की इस जिहादन ट्विटर आईडी का ट्वीट देखिए। नसरीन को किन्हीं आसमानी सोर्सेज ने बता दिया है कि इन टैलेंटेड मुस्लिमों को टारगेट किया जा रहा है। और टारगेट इसलिए बनाया जा रहा है क्योंकि वह लोग कम समय में ही एक ऊंचे पोस्ट तक पहुंच गए।
Another angle Of TCS.⚡
— Nasreen Khan (@MuslimHuman77) April 12, 2026
There are rumors Among Tcs Employers.
And the story here According to Tcs Employers.
In Nashik, some Muslim boys working at TCS had achieved great success through their hard work. These handsome Muslim boys who were growing in the company had friendly… pic.twitter.com/DHMJIw9XiO
नसरीन का कहना है कि हिंदू महिलाओं में जिहाद का सॉफ्टवेर इनस्टॉल कर रहे इन मुसलमानों से हिंदू लड़कों को जलन थी और इसीलिए इनके ख़िलाफ़ साजिश रची जा रही है। सोचिए! इन मुसलमानों ने 4 साल से पूरा धर्मांतरण ऑपरेशन चला रखा था, हर हिंदू लड़की इनके निशाने पर थी।
लेकिन नसरीन के हिसाब से ये सब साजिश है, नसरीन के हिसाब से ये सब उनकी तरक्की रोकने के लिए हो रहा है। फेक आईडी हो तो भी शर्म कर लो यार लिखने से पहले। अच्छा ये तो हुई कहानी नसरीन की। एक और पढ़ा लिखा इस्लामी कट्टरपंथी लंबे पैराग्राफ लिख कर इस जिहाद को जस्टिफाई करने में जुटा है।
फ़हीम ख़ान लिखते हैं कि मुस्लिम से ज़्यादा हार्डवर्किंग और discipline कोई है ही नहीं। बात भी सही है। डिस्कप्लिन तो है, लेकिन धर्मांतरण करवाने का डिस्प्लिन। फ़हीम ख़ान ये भी लिखता है कि मुसलमान तो सिर्फ़ नमाज के लिए जगह माँगता है। बिल्कुल सही बात है।
Been in IT for 5 years, and I’ll say this clearly:
— Faheem Khan (@faheem_khan_dev) April 13, 2026
Muslim men in IT are among the most disciplined, hardworking, and resilient professionals. They stay calm under pressure and consistently deliver at a high level.
Their only consistent ask? Time and space for Namaz. And if…
मुसलमान सिर्फ़ नमाज के लिए टाइम माँगता है, मुसलमान बिचारा अपने मजहब का नंबर बढ़ाने का तो ही जुगाड़ लगता है। बताओ तब भी लोग इन मुस्लिमों से जलते हैं। अपने जिहादी भाईजानों को बचाने के लिए कोई कैसे कुतर्क दे सकता है, इसका प्राइम एग्जाम्पल ये ट्वीट है।
अच्छा और एक और कैफ़ ख़ान लिखते हैं कि इन जिहादियों की करतूतों के बारे में बोलना संघी होना है। बेशर्मी का टॉप सब्सक्रिप्शन इस जमात ने ले रखा है। अच्छा और ये काम सिर्फ़ ये इंडिविजुअल मुसलमान ही नहीं कर रहे बल्कि कई मीडिया संस्थान भी या तो व्हाइटवाशिंग में लगे हुए हैं या फिर स्ट्रेटेजिक साइलेंस अपनाया हुआ है।
We r already less than 5% in corporate
— Mohd Kaif (@iammkaif) April 13, 2026
I thought and encouraged alot of muslims to go into corporate to have a better lifestyle and could come out of ghetto
Now the system has come for this too
If you think media trial is true for Muslims in India you’re just a sanghi
स्क्रॉल और वायर जैसे पोर्टल जो दिन-भर कुकुरहाँव करते रहते हैं, वो नासिक वाले मुद्दे पर मुंह में दही जमा लिए हैं। TCS सर्च करने पर इनके पोर्टल पर एक खबर नहीं दिखती है। और वजह सिर्फ़ यह है कि आरोपी एक मुस्लिम।
और इन पोर्टल के लिए वाइटवाशिंग कोई नया धंधा नहीं बल्कि मेन धंधा क्योंकि ये वही लोग है जो लाल क़िले ब्लास्ट के वक्त उमर के लिए आँसू बहा रहे थे उसके घर जाकर रिपोर्टिंग की जा रही थी, बताया जा रहा था कि कितना होनहार छात्र था।
वाइटवाशिंग में महारत हासिल कर चुकी आरफ़ा ने रोते हुए ट्वीट किया है कि इस देश में अब सिर्फ़ सब्जी बेचने वाले या ठेले पर काम वाले मुसलमानों को ही टारगेट नहीं किया जा रहा है बल्कि अब वेल-एडुकेटेड, IT sector वाले मुसलमानों को भी टारगेट किया जा रहा है।
A new wave of targeting Muslims- not the paan vendor or street hawker this time, but the educated, skilled, employed.
— Arfa Khanum Sherwani (@khanumarfa) April 14, 2026
The aim is clear: make even the few who’ve secured jobs in this majoritarian system unemployable.
मतलब आप इनके सोचने की कैपेसिटी को समझ सकते हैं। देश के सबसे बड़े IT कंपनी में कॉर्पोरेट जिहाद चल रहा है। बीफ खिलाया जा रहा है और ये लोग चंद लाइक, शेयर और कमेंट के लिए सोशल मीडिया पर उन महिलाओं के इज़्ज़त, आबरू और मानसिक हालात के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उन महिलाओं को ही दोषी बना दिया जा रहा है।
इन लोगों को शह मिलती है इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबारों से। वही अख़बार जिनके मुख्य संपादक का एक वीडियो खूब शेयर किया जा रहा था आज से कुछ दिनों पहले तक कि आहा क्या बोला समाप्दक महोदय ने, क्या जर्नलिज्म नजीर पेश की है।
राज कमल झा की स्पीच सुनने लायक़ है 👇🏼
— Govind Pratap Singh | GPS (@govindprataps12) March 28, 2026
शुरुआत उन्होंने गलगोटिया यूनिवर्सिटी और उनकी वायरल शिक्षिका को धन्यवाद देते हुए की 😇
pic.twitter.com/xEVtF1c7ND
अब वही अख़बार नासिक वाले मुद्दे पर TCS के नाम लेने से कतरा रहे हैं और इस मामले की जब खबर रिपोर्ट भी की तो शुरुआत की अशोक खरात से की, और सिर्फ़ इसलिए कि रीडर्स के मन में ये डाला जाये कि sexual exploitation सिर्फ़ मुस्लिम ही नहीं बल्कि हिंदू भी करता है।
अरे भाई, अशोक खरात का मामला अलग है और नासिक का मामला अलग है। बुद्धि कहाँ चली जाती इन खबरों को रिपोर्ट करने से पहले। और सिर्फ़ यही नहीं, बल्कि इंडियन एक्सप्रेस ने अपने रिपोर्ट में यह भी कहा कि राइट विंग के तरफ़ से कॉर्पोरेट जिहाद और ऑफिस जिहाद जैसे टर्म दिए गए।
क्या भाई, पत्रकारीय ज्ञान बस अवार्ड शो तक? उस वक्त ज्ञान कहाँ गया जब यह लिखा गया कि “And they hanged Yakub Memon”। और मेन मीडिया स्ट्रीम तक ने अपने शुरुआती रिपोर्ट्स में कही भी TCS का ज़िक्र नहीं किया बल्कि IT फर्म लिखा। क्यों विज्ञापन ज़्यादा जरूरी है ना। किसी महिला के साथ कुछ भी हुआ वो क्या लेना देना। कंपनी का नाम नहीं लेंगे भाई क्योंकि विज्ञापन नहीं आयेगा।
ये तो बात हुई संस्थागत तरीक़े से काम करने वालों की, लेकिन आप लोग Faye D’Souza के नाम से वाक़िफ़ होंगे। वही D’Souza जो देश के हर मुद्दे पर इंस्टाग्राम स्लाइड तो बना ही देती हैं लेकिन टीसीएस वाले मामले पर चुप्पी इन्होंने भी साध ली थी।
जब सोशल मीडिया पर इन पर क्वेश्चन हुए तो इन्होंने पोस्ट तो किया लेकिन उसमें सेक्सुअल harasament जैसे शब्दों का प्रयोग और एक जगह religious लिखा भी तो उसको पुलिस के बयान के हवाले से कोट किया। मतलब साफ़ है कि मुस्लिम दोषी पाया जाए तो वाइटवाश करो।
सोचिए, जब देश में नासिक वाले मुद्दे को लेकर इतना बवाल मचा हुआ है, उन महिलाओं के ऊपर क्या बीत रही होगी इसको सोचकर हमारे रौंगटे खड़े हो जा रहे हैं तो उस बीच ये जिहाद के ठेकेदार आते हैं और व्हाइटवॉश का नंगा नाच सोशल मीडिया करते हैं। जहाँ इस चीज़ को लेकर बात होनी चाहिए कि इतने बड़े कॉर्पोरेट कंपनी में धर्मांतरण का रैकेट कैसे चल सकता है ? लेकिन नहीं इनको व्हाइटवॉशिंग करनी है। इस मामले के वक्त मुस्लिम समुदाय अगर उन हिंदू महिलाओं के लिए आवाज़ नहीं उठा सकते है तो कम से कम अपने मुंह को बंद रख सकते थे। लेकिन नहीं, आपके इस व्हाइटवॉशिंग ने हमें फिर से बता दिया कि हिंदुओं को लेकर आपके मन में कितनी नफ़रत हैं और आपका एक और असल चेहरा सामने आया है।




