आजकल एक न्यूज़ आप लोगों ने भी सुनी होगी कि मुस्लिमों के लिए अयोध्या में मस्जिद बनाने को पैसे नहीं हैं.. भाई पहले तो ये झूठ बोलना बंद करो! मार्केट में अफवाह है कि ‘फंडिंग की कमी’ की वजह से मस्जिद का प्रोजेक्ट छोटा किया जा रहा है। अरे भाई, चंदा क्यों नहीं आ रहा? क्या कौम के पास पैसे खत्म हो गए? बिल्कुल नहीं! असलियत कुछ और है, जो ये लोग आपसे छुपा रहे हैं।
सच ये है कि ‘भाईजानों’ का मन ही खराब है। उन्हें डर इस बात का नहीं है कि मस्जिद छोटी बन रही है, उन्हें दर्द इस बात का है कि सदियों के इतिहास में पहली बार भारत में उन्होंने ‘इस्लामी ज़मीन’ खो दी है! ये वक्फ का मामला हो, भोजशाला हो या अयोध्या… इनकी साइकोलॉजी एक ही है। इनके लिए ज़मीन सिर्फ ज़मीन नहीं, ‘साख’ है। जिस जगह एक बार इनका कब्ज़ा रहा, उसे ये ‘दार-अल-इस्लाम’ मानते हैं। उसे गंवाना, इनके लिए एक पराजय है, इसीलिए ये ‘हार’ इन्हें अंदर तक चुभ रही है
मैंने पहले भी अपने वीडियो में कहा था, जैसे लेबनान के किले पर अधिकार जमाते वक्त इजरायल ने इस मानसिकता को समझा था, वैसे ही आप भी समझो। ये मस्जिद का size नहीं, ये अपनी खोई हुई दावेदारी को वापस पाने की कुंठा है। ये अयोध्या वाली मस्जिद में जानबूझकर प्रोजेक्ट को लटकाते हैं, नक्शा पास कराने में सुस्ती बरतते हैं ताकि कल को ये कह सकें कि ‘हमें तो करने ही नहीं दिया गया’। इनके पास चंदे की कमी नहीं है , देशभर में इनके सैलून से लेकर बाकी तमाम काम के लिए खूब पैसा और फंडिंग है, यहाँ तक कि बंगाल में जो ये छोटा बाबरी बनाने निकले थे उसके लिए भी दबाकर फंडिंग आई थी, और तो और; कुछ ऐसे हिन्दू जो अभी गंगा जमुनी चूरन में यकीन रखते हैं, और वो भी इसके लिए चंदा दे रहे थे..
तो इन भावनाओं के ‘फंडिंग कम है’ वाले झांसे में मत बहिए। ये पैसे की कमी नहीं, ये एक सोची-समझी वैचारिक हार की बौखलाहट है.. ज़्यादा डिटेल में अगर आपको ये समझना है तो ऑपइंडिया के यूट्यूब चैनल पर जाकर ये वीडियो जरूर देखें..





