देश की प्रत्येक व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली एक मजहबी बिरादरी को अब स्कूलों में बच्चों की प्रार्थनाओं पर भी परेशानी होने लगी है। ताजा मामला छत्तीसगढ़ का है, जहाँ वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल सलाम रिजवी, पूर्व अल्पसंख्यक विभाग अध्यक्ष महेंद्र छाबड़ा और बिलासपुर के शफीक अहमद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए राज्य के सरकारी स्कूलों में ‘गायत्री मंत्र’ और ‘सरस्वती वंदना’ जैसी प्रार्थनाओं को बंद करने की मांग की।
हाईकोर्ट ने इस याचिका को तत्काल प्रभाव से खारिज कर दिया और याचिकाकर्ताओं को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि संविधान सरकारी स्कूलों में धार्मिक शिक्षा पर रोक लगाता है, लेकिन नैतिक शिक्षा देने पर कोई रोक नहीं है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि किसी छात्र को उसकी इच्छा के विरुद्ध इन प्रार्थनाओं का पाठ करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
इस याचिका में राज्य सरकार के 12 जून के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें सरकारी स्कूलों की प्रार्थना सभा में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, महापुरुषों की जीवनी का वाचन, मध्याह्न भोजन से पहले भोजन मंत्र और छुट्टी के समय गायत्री मंत्र तथा शांति मंत्र के पाठ का निर्देश दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह आदेश संविधान की भावना के खिलाफ है। उनका तर्क था कि सरकारी स्कूलों में केवल एक धर्म से जुड़ी प्रार्थनाएं शामिल करने से अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों की धार्मिक स्वतंत्रता और अंतरात्मा की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि आदेश में उन छात्रों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है जो इन प्रार्थनाओं में भाग नहीं लेना चाहते।
याचिका के जवाब में राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि इन मंत्रों का उद्देश्य किसी विशेष धर्म का प्रचार करना नहीं, बल्कि अनुशासन, नैतिक मूल्यों, कृतज्ञता, सामाजिक सद्भाव और भारतीय सांस्कृतिक विरासत से विद्यार्थियों को परिचित कराना है। सरकार ने यह भी बताया कि आदेश लागू होने के बाद किसी छात्र, अभिभावक या शिक्षक की ओर से जबरदस्ती की कोई शिकायत सामने नहीं आई है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने कहा कि आदेश को पढ़ने से कहीं भी यह नहीं दिखता कि छात्रों को उनकी धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध कोई काम करने के लिए बाध्य किया गया है। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 28(1) में सरकारी स्कूलों में धार्मिक शिक्षा पर रोक है, लेकिन नैतिक शिक्षा पर नहीं। इसलिए इस स्तर पर आदेश को असंवैधानिक नहीं माना जा सकता।
इस देश में हजारों वर्षों से गायत्री मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और भोजन मंत्र की परंपरा रही है। लेकिन हर बात को मजहबी चश्मे से देखने वालों को देश की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने के बहाने चाहिए होते हैं।
ये लोग उन स्कूलों पर तो सवाल उठाते हैं जहाँ से बच्चे डॉक्टर्स, इंजीनियर्स और वैज्ञानिक बनकर निकलते हैं, लेकिन उन मदरसों पर चुप्पी ओढ़कर बैठ जाते हैं जहाँ मासूम बच्चों के दिमाग में कट्टरता का जहर भरा जाता है।






