Mohammad deepak Fund raiser

कोर्ट के आदेश और जिम का किराया: मोहम्मद दीपक की ‘गरीबी’ के पीछे की हकीकत

Summary
मोहम्मद दीपक की 'गरीबी' और अजीत अंजुम के फंडरेजिंग अभियान पर उठे गंभीर सवाल. जानिए कोर्ट के आदेश, बिना सबूत की कहानियों और लाखों रुपये के चंदे की उगाही का पूरा सच.

कभी आपने ऐसा गरीब आदमी देखा है, जो खुद को बर्बाद बता रहा हो, लेकिन दिल्ली में नेताओं से मिल रहा हो, संसद में घूम रहा हो, दरगाहों में सजदे कर रहा हो, पार्टी में नोट उड़वा रहा हो, मुफ्त खाना बंटवा रहा हो, पैसे बाँट रहा हो और उसी समय उसके लिए लाखों रुपये का चंदा भी इकट्ठा हो रहा हो? और सबसे दिलचस्प बात, इस पूरी ‘गरीबी’ की मार्केटिंग कौन कर रहा है? मोहम्मद दीपक के लिए अजीत अंजुम ने Fundraiser शुरू किया है.

इंसानियत का मसीहा, ठगों का उस्ताद, मुहब्बत का सिपाही, झूठ की दुकान, मिक्स वेज मोहम्मद दीपक फिर से एक बार गरीब हो गया है. मोहम्मद भाईजान ने इस बार नई ठग विद्या का उपयोग करते हुए खूब माल अंदर कर लिया है. चंदा उगाही के इस कार्यक्रम में मोहम्मद दीपक के प्रमुख सहयोगी और गुरु बने हैं अजीत अंजुम.

25 मई को इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया कि मोहम्मद दीपक पिछले 4 महीने से अपने जिम का रेंट नहीं भर पाया है, जिस कारण उसके मकान मालिक ने उसे जिम खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया है. मोहम्मद भाईजान ने बताया कि वह घर की EMI नहीं भर पा रहा है, अपने घर का राशन-पानी और बच्चों की फीस तक नहीं दे पा रहा है. भाईजान की यह दशा देखकर देश की सेक्युलर बिरादरी का दर्द छलक आया.

लिबरल गिरोह के तथाकथित पत्रकार अजीत अंजुम ने मुद्दे को हाथों-हाथ लपकते हुए सबसे पहले मोहम्मद दीपक का एक इंटरव्यू किया. इस इंटरव्यू में भाईजान ने बिना किसी तथ्य और सबूत के जो झूठ फैलाया, आप उसका एक उदाहरण देखिए. अजीत अंजुम के साथ इंटरव्यू में मोहम्मद दीपक ने हिंदू समाज को बदनाम करने के लिए एक फर्जी कहानी सुनाई.

भाईजान ने बताया कि कोटद्वार में किसी चप्पल बेचने वाले मुस्लिम की दुकान पर एक हिंदू महिला जाती है और चप्पल का रेट पूछती है. मुस्लिम दुकानदार 150 रुपये कीमत बताता है, तो हिंदू महिला पूछती है कि कुछ दिन पहले तो आपने 120 रुपये बताए थे, आज 150 क्यों? कहानी में यहाँ तक सब ठीक चल रहा था, लेकिन इसके बाद कहानी में प्रपंच का असली ट्विस्ट आता है. मोहम्मद दीपक के अनुसार, मुस्लिम दुकानदार हिंदू महिला से कहता है कि उस दिन आप शायद दुकान बढ़ाने के समय आई होंगी, हम जब दुकान बंद करते हैं तो अक्सर ऐसा करते हैं.

कहानी के अनुसार, इसके बाद हिंदू महिला ने मुस्लिम दुकानदार से गलत व्यवहार किया. अब मोहम्मद दीपक ने कहानी में अपना एजेंडा घुसाना शुरू किया. उसने बताया कि हिंदू महिला का पति बजरंग दल में था और उसने मुस्लिम दुकानदार को 3-4 थप्पड़ मारे और फिर थाने ले गया. थाने में जब मुस्लिम दुकानदार के घरवाले उसे छुड़ाने के लिए आए, तो हिंदू महिला के पति ने बजरंग दल के नाम 51,000 रुपये की गौ सेवा रसीद काटने को कहा. अंत में जब मुस्लिम दुकानदार के परिवार ने 20,000 रुपये दिए, तब जाकर उसे छोड़ा गया.

इस कहानी का कोई सबूत नहीं है, कोई गवाह नहीं है. मोहम्मद दीपक ने जो कह दिया उसे एकदम पत्थर की लकीर मानकर अजीत अंजुम ने पूरी कहानी अपने चैनल पर चला दी. अपने आप को पत्रकार कहने वाले इस आदमी ने एक बार भी यह पूछना ज़रूरी नहीं समझा कि आखिर हिंदुओं और बजरंग दल को बदनाम करने वाली इस कहानी का सोर्स क्या है? क्या किसी पुलिस थाने में ऐसा हो सकता है कि जमानत तब मिले जब कोई बाहरी संगठन आकर उसके बदले पैसा मांगे?

मोहम्मद दीपक ने यहाँ न केवल हिंदू संगठन को बदनाम करने का काम किया, बल्कि उत्तराखंड पुलिस को भी बदनाम किया है. कोटद्वार पुलिस इस मामले में कब संज्ञान लेती है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन अजीत अंजुम की पत्रकारिता का स्तर यहाँ ज़रूर पता चल गया.

इसी इंटरव्यू में अजीत अंजुम ने मोहम्मद दीपक की पत्नी के अकाउंट का UPI बारकोड शेयर किया और लोगों से चंदा देने की अपील की. इस बारकोड को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया गया. इसके बाद सेक्युलर, लिबरल, कांग्रेसी और मुस्लिमों ने इस अकाउंट में खूब चंदा भेजा. आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने भी 50,000 का चंदा दिया. इस अकाउंट में कुल कितना चंदा जमा हुआ, इसका कोई भी हिसाब नहीं दिया गया.

चंदे की रकम जब बढ़ने लगी, तो अजीत अंजुम अपना माइक और झोला उठाकर सीधे कोटद्वार ही पहुँच गए. वहाँ पहुँचकर उन्होंने सबसे पहले मोहम्मद दीपक का एक फंड रेजिंग वेबसाइट पर अकाउंट बनाया और फिर उसे चारों तरफ फैलाया.

इस डोनेशन कैंपेन के लॉन्च होने के कुछ घंटों के अंदर ही 12 लाख रुपये इकट्ठा हो गए. आपको याद होगा कि जनवरी में जब यह पूरा विवाद शुरू हुआ था, उस समय भी मोहम्मद दीपक ने ऐसे ही चंदा उगाही की थी. उसने तब भी बताया था कि वह रेंट नहीं दे पा रहा है, बच्चों की फीस नहीं भर पा रहा और घर का राशन नहीं खरीद पा रहा है.

उस समय भी इंडियन एक्सप्रेस ने ही इसको लेकर बड़ी इमोशनल खबर छापी थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के 15 वकीलों ने एक साल की जिम मेंबरशिप ली थी. इसके अलावा स्वरा भास्कर, हर्ष मंदर और कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने भी मेंबरशिप ली थी.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी मोहम्मद दीपक को निर्देश दिया था कि उसे जो भी चंदा मिला है, उसके बारे में पूरी जानकारी कोर्ट को एक एफिडेविट में दे. मोहम्मद भाईजान ने कोर्ट को यह जानकारी दी या नहीं, इसके बारे में अभी तक कोई खबर नहीं आई है. लेकिन भाईजान के चंदे की दूसरी और मोटी किश्त ज़रूर आ गई है.

अब सवाल उठता है कि चंदे के इस धंधे से क्या अजीत अंजुम का भी कोई व्यक्तिगत स्वार्थ जुड़ा हुआ है? क्यों हर बार मुस्लिमों और सेक्युलर बिरादरी की भावनाओं का दोहन करके अजीत अंजुम, मोहम्मद दीपक के लिए चंदा वसूली अभियान चला रहे हैं?

मोहम्मद दीपक बताता है कि उसने 4 महीने से जिम का किराया नहीं दिया है. 4 महीने का उसके जिम का कुल किराया होता है 1,60,000 रुपये. सुप्रीम कोर्ट के 15 वकीलों ने जो एक साल की मेंबरशिप खरीदी थी, केवल उसी से इसको डेढ़ लाख रुपये मिले थे. मोहम्मद दीपक बताता है कि बजरंग दल के कारण उसके जिम में लोगों ने आना बंद कर दिया है, लेकिन सच्चाई क्या है?

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