8 जुलाई 2025 को Times of Israel की एक रिपोर्ट छपी, जिसमें खुलासा हुआ कि इज़रायली रिसर्चर्स ने ‘दीना प्रोजेक्ट’ नाम से 7 अक्टूबर 2023 के हमलों पर एक गंभीर जांच की।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे हमास के आतंकियों ने इज़रायली महिलाओं के साथ बलात्कार और यौन हिंसा को युद्ध के एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया।
इसमें कुछ अर्धनग्न और कुछ पूर्णनग्न शव मिले, कुछ लाशें खंभों या पेड़ों से हथकड़ी लगाए हुए लटकी मिलीं, और कुछ के तो जननांग में गोली लगने तक के भयानक केस भी दिखे।
इस रिपोर्ट में 15 मामलों का दस्तावेज दर्ज है और ये सब पता लगाया गया विक्टिम्स से पूछकर, उनकी फोरेंसिक रिपोर्ट के ज़रिये और रिकोर्डिंग जैसे एविडेंस से।
कुछ पीड़ित तो मारे गए। और जो ज़िंदा थे, वो इतने सदमे में थे कि सामने भी नहीं आ सके।
लेकिन स्वरा भास्कर जैसी एक्स-इंडिपेंडेंट वुमन, कैमरे के सामने रोने के सीन करते-करते असल ज़िंदगी में तब रोने लगते हैं, जब आंसू फिलिस्तीन के लिए बहाने चाहिए, और जब आतंकवाद के शिकार ग़ैर-मुस्लिम हों, तो वही आँसू “ड्राय रन” पर भेज दिए जाते हैं।
7 अक्टूबर 2023 को, हमास ने सिर्फ़ रॉकेट नहीं दागे थे, 1200 लोगों का नरसंहार किया था और 251 को बंधक बना लिया था। लेकिन हमास की इस हैवानियत पर स्वरा का ट्विटर अकाउंट उतना ही शांत रहा… जितना बॉलीवुड की उनकी फिल्मों में लॉजिक।
हमास ने जो किया, उसे सिर्फ़ युद्ध नहीं कहा जा सकता, UN जेंडर-बेस्ड वॉयलेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये एक सुनियोजित नरसंहार था, जिसमें महिलाओं के साथ बलात्कार, यौन हिंसा और उनके शवों के साथ भी बर्बरता की गई।
इसके बाद “सिलेक्टिव फेमिनिस्ट” स्वरा भास्कर ने पूरी बेशर्मी से ये कह दिया कि इज़रायल खुद दशकों से फिलिस्तीनियों के साथ यही करता आया है। मतलब स्वरा भास्कर के अनुसार बलात्कारी कौन है? तो इसका जवाब ये है कि जिस पर हमला हुआ!
याद रहे कि ये वही हिपोक्रिट स्वरा है जो सज्जाद नौमानी से मिलने जाती है, वही मौलाना जो मुस्लिम लड़कियों को घर में बैठाने के लिए बोलता है, बुर्के में रहने के लिए बोलता है। जो ये तक बोलता है कि अगर ये मज़हब की लड़कियां बुर्के में नहीं रहती हैं तो मर्दों का मन जागेगा उनका रेप करने के लिए।
ये फेमिनिज्म स्वरा भास्कर का मौलाना के सामने ठंडा पढ़ गया, ये फेमिनिज्म उनका सिर्फ हिन्दुओं तक सीमित है, जब रक्षा बंधन आये, करवा चौथ आये, तब ये जरूर डंक मारने लगती हैं।
जब UN कहता है, “हमास ने यहूदी महिलाओं को नग्न कर सड़क पर घसीटा, बलात्कार हुआ और फिर शवों से भी दुर्व्यवहार किया गया” तो स्वरा भास्कर को उसमें “एक्टिंग की बू” आती है।
कैमरे के सामने एक्टिंग करने वाली ये “आरा की अनारकली” असली ज़िंदगी की ट्रेजेडी और आतंकवादियों की करतूतों को भी “राइट विंग स्क्रिप्ट” मानती हैं।
कौन-कौन मारा गया? किसके साथ बलात्कार हुआ? किसकी बच्ची गायब है?
इन सवालों का जवाब UN और मीडिया दें, लेकिन स्वरा भास्कर देंगी क्लोज-अप रिएक्शन और वोक ट्वीट्स।
तो क्या हमास का PR डिपार्टमेंट स्वरा भास्कर के पास है?
जब हमास, वो संगठन जिसकी विचारधारा में महिलाओं को “खेती की ज़मीन” कहा जाता है, वो संगठन जो लड़कियों को बंधक बनाकर उन्हें “माल ए गनीमत” बना देता है, तब स्वरा भास्कर का फेमिनिज्म अचानक से डिज़नी प्लस हॉटस्टार पर लॉगआउट हो जाता है।
स्वरा से कभी ट्वीट नहीं हुई, जब ISIS ने यहूदी महिलाओं के साथ बलात्कार किया। कभी पाकिस्तान में हिंदू-सिख लड़कियों के अपहरण पर आवाज़ नहीं उठी। कभी बांग्लादेश या कश्मीरी पंडित महिलाओं की चीख़ें उसे नहीं सुनाई पड़ी। लेकिन फिलिस्तीन के नाम पर आँख में ग्लिसरीन डालकर crying selfie ज़रूर आएगी।
आज हालात ये हैं कि Even hypocrisy hypocrites more when Swara tweets. स्वरा को न आतंकवाद से दिक्कत है, न बलात्कारियों से, दिक्कत है तो सिर्फ़ “पीड़ित के मज़हब” से। क्योंकि अगर पीड़िता यहूदी है तो स्वरा का “human rights” वाला काफिला हैदराबाद के नुमाइश मेले में भटक जाता है।
स्वरा भास्कर जैसे वही लोग हैं, जो इस्लामी बलात्कार भी करे तो “लैंग्वेज ऑफ़ द oppressed” को जस्टिफाई करता है, विक्टिम्स कम्युनिटी खुद को डिफेंड करे तो वो डिफेन्स को genocide का नाम दे देते हैं।
आज स्वरा भास्कर की छवि पार्ट टाइम एक्टर और “हमास की ऑफिशियल फैक्ट चेकर” वाली बन चुकी हैं। शायद अगली बार कोई आतंकी हमला हो, तो UN से पहले उनका ट्वीट आ जाए, जिसमें लिखा हो – “ये इज़रायल की प्रोपगेंडा मशीन है!”





