उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब 30 किलोमीटर दूर मलीहाबाद क्षेत्र के कसमंडी गांव में एक नया धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद सामने आया है। पासी समाज के लोगों ने दावा किया है कि गांव में स्थित एक प्राचीन किला और शिव मंदिर, जो उनके अनुसार राजा कंसा पासी की विरासत का हिस्सा है, उस पर वर्षों से अतिक्रमण किया गया है। उनका आरोप है कि परिसर में कब्रें और मजारें बनाकर मूल हिंदू पहचान को धीरे-धीरे समाप्त करने का प्रयास किया गया।
विवाद सामने आने के बाद क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। इस पूरे मामले ने स्थानीय स्तर पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच बहस को जन्म दे दिया है।
पासी समाज का दावा- राजा कंसा पासी की विरासत पर कब्जा
स्थानीय पासी समाज के लोगों का कहना है कि विवादित परिसर लगभग 18 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है और यह राजा कंसा पासी के किले का हिस्सा रहा है। उनका दावा है कि परिसर में आज भी पुराने किले की मोटी दीवारें, प्राचीन निर्माण शैली के अवशेष, धार्मिक प्रतीक और मंदिरनुमा संरचनाएं मौजूद हैं।
समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि बीते कुछ वर्षों में यहां नई कब्रें और मजारें बनाई गई हैं। उनका कहना है कि कुछ संरचनाएं हाल में बनाई गई प्रतीत होती हैं और पहले यहां इस प्रकार की धार्मिक गतिविधियां नहीं होती थीं। उनका आरोप है कि धीरे-धीरे इस स्थान की मूल पहचान को बदलने का प्रयास किया गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले यह पूरा क्षेत्र खंडहर और पुरातात्विक अवशेषों के रूप में मौजूद था, लेकिन बाद में यहां जगह-जगह मजार के नाम पर अवैध कब्जा शुरू हो गया। लोगों को आरोप है कि यह सब अखिलेश सरकार में हुआ।
‘प्राचीन शिव मंदिर को मुक्त कराया जाए’
पासी समाज के नेताओं और स्थानीय निवासियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन से मांग की है कि विवादित स्थल की ऐतिहासिक और राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच कराई जाए। उनका कहना है कि परिसर में मौजूद प्राचीन शिव मंदिर और अन्य अवशेषों को संरक्षित किया जाना चाहिए।
समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि प्रशासन स्तर पर कार्रवाई नहीं होती है तो वे न्यायालय का रुख करेंगे। उनका दावा है कि इस संबंध में पूर्व में भी शिकायतें और मुकदमे दर्ज कराए गए थे, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ पाया।
मुस्लिम पक्ष ने आरोपों को बताया राजनीतिक
दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पासी समाज के दावों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यह स्थान लंबे समय से मुस्लिम समाज से जुड़ा हुआ है और यहां दशकों से धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं।
स्थानीय मुस्लिम निवासियों का कहना है कि यहां कई वर्षों से नमाज पढ़ी जाती रही है और कब्रें भी पुरानी हैं। उनके अनुसार, अचानक इस प्रकार के दावे सामने आना राजनीतिक कारणों से प्रेरित हो सकता है। उनका कहना है कि यदि किसी पक्ष को आपत्ति है तो मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए और जो भी फैसला कानून तथा अदालत करेगी, उसे सभी को स्वीकार करना चाहिए।
फिलहाल मलीहाबाद का कसमंडी गांव एक ऐसे विवाद का केंद्र बन गया है, जहां एक पक्ष इसे राजा कंसा पासी की ऐतिहासिक विरासत बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे लंबे समय से मुस्लिम धार्मिक स्थल होने का दावा कर रहा है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और संभावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।





