मामला गुजरात के आणंद जिले के खंभात शहर का है। यहां के पीठ बाजार इलाके में निहाल रावल की जनरल स्टोर की दुकान है। 21 दिसंबर की सुबह निहाल रावल दुकान पर अपने पिता संजयभाई के साथ बैठे हुए थे। इसी दौरान मोइनुद्दीन सैयद नाम का युवक हाथ में चाकू लेकर गाली-गलौज करते हुए दुकान में घुस गया और चिल्लाकर कहने लगा कि, “मेरे अब्बू सज्जाद हुसैन ने कहा है कि दो-तीन रावल को मारकर आओ।” और फिर आरोपी ने निहाल पर चाकू से हमला कर दिया।
इसमें निहाल तो बच गया लेकिन जब निहाल के पिता संजयभाई बीच में आए तो आरोपी ने उन पर भी हमला कर दिया। जिससे बांए हाथ में चाकू लगने से खून बहने लगा। शोर सुनकर इकठ्ठा हुई भीड़ ने मोइनुद्दीन को पकड़कर उसके घर वालों को सौंप दिया। इस पर आरोपी के परिवार ने उल्टा पीड़ित परिवार को ही धमका दिया।
टारगेटेड हमले और झूठी मानसिक बीमारी
जब पीड़ित द्वारा पुलिस में शिकायत की गई तो आरोपी के पिता ने पुलिस के सामने आरोपी को पागल बता दिया लेकिन पुलिस में शिकायत करने पर पीड़ित परिवार को जान से मारने की धमकी दे डाली। हालांकि इससे पहले भी मोइनुद्दीन ने खंभात के रहने वाले कमलेश रावल, अनिल रावल और गोपाल भाई रावल पर भी ऐसे ही हमला किया था। अब लोगों से पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि आरोपी ने 1-2 बार नहीं बल्कि 6 बार हिंदू समाज के लोगों पर हमला किया है।
जिहादी मानसिकता को बचाने की कोशिश
हैरानी की बात यह कि घटना के बाद मीडिया के एक वर्ग ने बड़ी ही बेशर्मी के साथ आरोपी मोइनुद्दीन को ‘मानसिक रूप से बीमार बता दिया, जबकि मानसिक रूप से बीमार होते हुए मोइनुद्दीन ने न तो अपने परिवार के किसी सदस्य पर हमला बोला और न ही किसी पड़ोसी मुस्लिम पर। अब पुलिस ने आरोपित मोइनुद्दीन, उसके अब्बा, उसकी अम्मी और उसके भाई के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
बता दें कि यूपी के गोरखपुर मंदिर पर हमला करने वाले आरोपी मुरतजा अब्बासी को भी मीडिया के एक वर्ग ने मानसिक रूप से बीमार बता दिया था जबकि उसने “अल्लाहु अकबर” चिल्लाते हुए सुरक्षाकर्मियों पर चाकू से हमला किया था, जिसमें PAC के दो जवान घायल हुए थे। और ऐसे सिर्फ़ यही एक आध मामले नहीं हैं, ऐसे कई किस्से हैं जब इन जिहादियों को बचाने के लिए मानसिक रूप से अस्वस्थ बता दिया जाता है। भले ही इस बात का जवाब शायद ही कोई दे पाए कि 72 हूर की चाह में जिहाद करने निकला जिहादी मानसिक रूप से ठीक होता ही कब है?





