लद्दाख का पहला मॉडल बॉर्डर विलेज बनेगा चुमूर, ठंडे मौसम के लिए बनेंगे घर, होमस्टे के लिए भी बनेगा एक कमरा

Summary
L.G सक्सेना के अनुसार अब यहाँ सभी परिवारों के लिए आधुनिक घर बनाए जाएंगे। ये घर बेहद ठंडे मौसम को ध्यान में रखकर तैयार होंगे और हर घर में होमस्टे के लिए भी एक कमरा होगा, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके।

सीमा पर रहने वाले लोगों को अक्सर देश की First Line of Defence कहा जाता है। यानी अगर बॉर्डर पर कोई हलचल होती है तो सबसे पहले इसकी जानकारी इन्हीं लोगों को मिलती है। ये लोग सिर्फ वहाँ रहते ही नहीं, बल्कि हमारी सेना के लिए आँख और कान का काम भी करते हैं।

भारत-चीन युद्ध हो या पाकिस्तान के साथ हुई लड़ाइयाँ, हर मुश्किल समय में सीमावर्ती गांवों के लोगों ने सेना का साथ दिया है। लेकिन विडंबना ये रही कि जो लोग देश की सुरक्षा में इतना बड़ा योगदान देते हैं, उन्हें ही दशकों तक बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ा।

एक समय ऐसा भी था जब देश के कुछ बड़े नेता कहते थे कि अक्साई चिन जैसे इलाकों का क्या महत्व, वहाँ तो घास का एक तिनका भी नहीं उगता। अरुणाचल प्रदेश में सड़क और पुल बनाने तक पर सवाल उठाए जाते थे। नतीजा ये हुआ कि सीमा पर बसे कई गांव सालों तक विकास से दूर रहे।

लेकिन 2014 के बाद तस्वीर बदलनी शुरू हुई। केंद्र सरकार ने बॉर्डर इलाकों के विकास को प्राथमिकता दी और इसी सोच के साथ Vibrant Village Programme शुरू किया गया। इसका उद्देश्य है कि सीमा पर बसे गांवों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाए ताकि वहाँ रहने वाले लोगों का जीवन बेहतर बन सके।

इसी योजना के तहत लद्दाख के चुमुर गांव में एक नई शुरुआत हुई है। लद्दाख के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस गांव में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की आधारशिला रखकर इस योजना का शुभारंभ किया। करीब 16,700 फीट की ऊँचाई पर बसे इस गांव में सिर्फ 24 परिवार रहते हैं और कुल आबादी 91 लोगों की है।

L.G सक्सेना के अनुसार अब यहाँ सभी परिवारों के लिए आधुनिक घर बनाए जाएंगे। ये घर बेहद ठंडे मौसम को ध्यान में रखकर तैयार होंगे और हर घर में होमस्टे के लिए भी एक कमरा होगा, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके।

लद्दाख प्रशासन का कहना है कि ऐसे ही 10 मॉडल विलेज विकसित किए जाएंगे। इनमें सड़क, पर्यटन, रोजगार, ऑल-वेदर सुविधाएँ और स्थानीय उत्पादों के प्रमोशन पर खास ध्यान दिया जाएगा। पश्मीना और स्थानीय हस्तशिल्प को भी नई पहचान देने की तैयारी है।

कुल मिलाकर सरकार सिर्फ बॉर्डर पर सैन्य ढाँचा मजबूत नहीं कर रही, बल्कि वहाँ रहने वाले लोगों का जीवन भी बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है। लद्दाख हो या अरुणाचल प्रदेश, अब सीमा के गांवों को उनके हाल पर नहीं छोड़ा जा रहा। क्योंकि देश जानता है कि जो लोग हमारी सीमाओं की पहली सुरक्षा पंक्ति हैं, उनका मजबूत और सुरक्षित होना भी बेहद जरूरी है।

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