पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार को मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम हुआ है। आप के राज में यहां कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है।
पंजाब के हाल हर दिन बिगड़ रहे हैं, हर जगह कूड़ा पड़ा हुआ है, सड़कें इन दिनों डंपयार्ड बन चुकी हैं। पंजाब के बड़े शहर हों या छोटे, हर जगह यही हाल है और आम आदमी पार्टी इस सब से पीसफुली निपटने के बजाय उन सफाईकर्मियों पर लाठी बरसा रही है, उनके सिर फोड़ रही है। कई सफाईकर्मी अस्पतालों में भर्ती हैं।
और ये सिर्फ सफाई कर्मचारियों का मामला नहीं है। सरकारी भर्तियों की मांग को लेकर बेरोज़गार युवा लगातार सड़कों पर हैं, वो पीसफुली अपनी मांगें रख रहे हैं और उनको भगवंत मान सरकार हिरासत में ले रही है।
दूसरी तरफ, सरकारी कर्मचारी ओल्ड पेंशन स्कीम, महंगाई भत्ते और रेगुलर होने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और इतना ही नहीं अभी और सुनो, पंजाब रोडवेज, PUNBUS और PRTC के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी भी 3 से 5 अगस्त के बीच हड़ताल पर उतरने की तैयारी में हैं।
कहानी यहीं नहीं खत्म होती है, मनरेगा कर्मचारी महीनों से बकाया वेतन और नियमितीकरण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इनकी पंजाब पुलिस के साथ झड़पें भी हुई हैं।
अब थोड़ा अगर आप एजुकेशन की तरफ आओ तो पंजाब यूनिवर्सिटी में एक पीएचडी स्कॉलर की मौत हो गई। कारण ये था कि बिजली तारें नंगी पड़ी हुई हैं। इसके बाद से छात्र प्रशासन के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं। अभी फॉर्मेसी ऑफिसर वाला पेपर लीक का मसला तो आपने भी देखा ही और संसद में पंजाब के सांसद ये भी बता चुके हैं पिछले 4 साल में दर्जन भर पेपर लीक हो गए हैं।
उधर किसान संगठन तो बड़े ट्रेन की पटरियों पर तो कभी सड़कों पर आंदोलनरत रहते हैं और भगवंत मान सरकार उन पर लट्ठ बजाती रहती है। पंजाब में हर आदमी परेशान है, बारिश होती है तो सड़कें नदी बन जाती है और नंगी तारों के चलते करंट से मौत और जब बारिश नहीं है, गर्मी है तो बिजली गायब
अब सवाल ये है कि आखिर पंजाब में ऐसा कौन-सा मोर्चा बचा है। जहां लोग अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर नहीं हैं और क्या ये है असली पंजाब? क्या ये है भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी का रंगला पंजाब जिसका इन लोगों ने वादा किया था।





