मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि पंजाब में भगवंत मान और केजरीवाल की सरकार आख़िर कर क्या रही है? पंजाब में सिर्फ़ आठ महीनों में सोलह ग्रेनेड अटैक हो चुके हैं। कुल 22 ग्रेनेड और रॉकेट लांचर अटैक हो चुके हैं और अधिकतर हमले पुलिस स्टेशन पर हुए हैं। अभी कल की खबर है कि पंजाब में मोगा के एक पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड से हमला हुआ है।
वही पुलिस स्टेशन, जिसे आम आदमी अपनी सबसे सुरक्षित जगह मानता है। अगर किसी पर हमला हो जाए, कोई अपराधी पीछे पड़ जाए, तो इंसान सबसे पहले थाने की तरफ़ भागता है। लेकिन पंजाब में हालात ऐसे हो गए हैं कि अब थाने ही हमलों का निशाना बन रहे हैं।
सोचिए, जिस राज्य की कानून-व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी पुलिस मानी जाती है, अगर उसी पर बार-बार ग्रेनेड फेंके जा रहे हों, तो आम नागरिक के मन में सुरक्षा का भरोसा कैसे बचेगा? आठ महीनों में सोलह हमले और पिछले कुछ वर्षों में बाईस से ज़्यादा ग्रेनेड और आरपीजी अटैक ये सिर्फ़ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह बताते हैं कि अपराधियों के हौसले किस स्तर तक बढ़ चुके हैं।
दूसरी तरफ़ भगवंत मान सरकार दावा करती है कि पंजाब बदल रहा है। लेकिन सवाल है कि आखिर किस दिशा में बदल रहा है? जिस पंजाब को ड्रग्स और गैंगस्टर कल्चर से बाहर निकालने का वादा किया गया था, वहीं आज पुलिस थानों पर विस्फोट हो रहे हैं। आखिर सरकार की प्राथमिकता क्या है?
और सबसे हैरानी की बात यह है कि विपक्ष जब इन घटनाओं पर सवाल उठाने जाता है, तब जवाब देने के बजाय नेताओं को रोकने की कोशिश होती है। कहीं उन्हें हाउस अरेस्ट किया जाता है, कहीं भारी पुलिस बल लगाकर विरोध को सीमित किया जाता है। लेकिन इससे सवाल खत्म नहीं होते।
पंजाब विधानसभा चुनाव अब ज़्यादा दूर नहीं हैं। ऐसे में जब भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल जनता के बीच वोट मांगने जाएंगे, तो पंजाब की जनता उनसे सिर्फ़ एक सवाल पूछ सकती है, जिस “नए पंजाब” का वादा किया था, क्या वही नया पंजाब है, जहां पुलिस स्टेशन भी ग्रेनेड हमलों से सुरक्षित नहीं हैं।





