जब भी आपको न्यूजपेपर्स या बाक़ी मीडिया में AAP की सरकारों के ज्यादा एड्स दिखने लग जाएँ तो आपको समझ जाना चाहिए कि कोई बड़ा क्राइसिस छुपाया जा रहा है। इस बार बारी है पंजाब की जहाँ मैसिव पॉवर क्राइसिस आया हुआ है। पंजाब की भगवंत मान सरकार लोगों को बिजली देने में फेल हो गई है।
पंजाब में लंबे लंबे पॉवर कट्स हो रहे हैं और घरों के साथ ही उन किसानों को भी नहीं बिजली दी जा रही, जिन्हें अपने खेतों में सिंचाई करनी है। उन्हें तो सिर्फ़ 3-4 घंटे की ही बिजली सप्लाई मिल रही है। आप पंजाब के पॉवर क्राइसिस का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि सिर्फ़ 27 जून को ही पॉवर शॉर्टेज की 1 लाख से ज्यादा कंप्लेंट्स पंजाब में दर्ज हुईं।
जहाँ एक ओर पंजाब में पॉवर की डिमांड बढ़ती जा रही है तो वहीं उसकी ख़ुद के पॉवर प्लांट्स एक एक करके बंद हो रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट कहती है कि पंजाब में 6 पॉवर प्लांट यूनिट्स बंद हो चुके हैं और इससे 1100 मेगावॉट से ज्यादा का जनरेशन लॉस हो रहा है।
अब पंजाब के किसानों ने बिजली की माँग को लेकर मोर्चा लगा दिया है, जगह जगह चक्का जाम भी कर दिया है। और इन सबके बीच पंजाब के मुख्यमंत्री अपने राज्य का क्राइसिस मैनेज करने की बजाय इवेंट मैनेजेमेंट में लगे हुए हैं, लोक मिलनी टाइप के इवेंट्स हो रहे हैं, जहाँ भगवंत मान की अलग अलग एंगल से वीडियो फोटो बन रही हैं।
हास्यास्पद बात ये है कि आज क्राइसिस के समय में चुप रहने वाले भगवंत मान कुछ दिन पहले लंबी लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इलेक्ट्रिसिटी के मामले में अपनी अचीवमेंट्स गिनवा रहे थे। इस पूरे कांड से मुझे याद आया कि लगभग 2 साल पहले तक दिल्ली में भी केजरीवाल सरकार भी बधाई दिल्ली टाइप के एड्स छपवाया करती थी।
और इन एड्स के बीच दिल्ली में कहीं पानी भर जाता था, बाढ़ आ जाती थी तो कहीं पानी का क्राइसिस हो जाता था। लेकिन केजरीवाल सरकार के एड्स में कोई कमी नहीं आती थी। शायद पंजाब में भी केजरीवाल सरकार अपना ही पुराना मॉडल रिक्रिएट कर रही है, लेकिन उसका असर पंजाब की जनता पर पड़ रहा है जो गर्मियों में बेहाल है।
इसके साथ ही किसानों पर भी दोहरी मार पड़ रही है क्योंकि उन्हें तो अपने खेतों के लिए भी पानी नहीं मिल रहा।





