azam khan jauhar university

पैसा टैक्सपेयर का, मौज आज़म ख़ान की, 106 करोड़ रुपये के फंड का पूरा मामला

Summary
आजम खान ने अपने कैबिनेट मंत्री होने का फायदा उठाया और उत्तर प्रदेश सरकार के 6 अलग-अलग विभागों से 106 करोड़ रुपये अपने इस प्राइवेट प्रोजेक्ट के लिए मंजूर करवा लिए।

अगर आप उत्तर प्रदेश में रहते हैं और आपके टैक्स का एक भी रुपया यहाँ जाता है, तो ये वीडियो आपके लिए है! क्या आपको पता है कि 2012 से 2017 के बीच आपके टैक्स के 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आज़म ख़ान की प्राइवेट यूनिवर्सिटी को फंड करने के लिए दिए गए।

जी! आज जब आज़म ख़ान की जौहर यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग्स तोड़ी जाने वाली हैं, तो समाजवादी पार्टी और उसका इकोसिस्टम शोर मचा रहा है। लेकिन इस शोर ने एक सच्चाई को दबा दिया है।

दरअसल, आज़म ख़ान ने ये यूनिवर्सिटी एक प्राइवेटली हेल्ड ट्रस्ट में बनाई थी और इस यूनिवर्सिटी का कंस्ट्रक्शन हुआ था अखिलेश यादव की सरकार में। आज़म ख़ान कोई कारोबारी या राजा-महाराजा तो थे नहीं कि उनके पास यूनिवर्सिटी बनाने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये खुद के होते।

लेकिन उन्होंने अपने कैबिनेट मंत्री होने का फायदा उठाया और उत्तर प्रदेश सरकार के 6 अलग-अलग विभागों से 106 करोड़ रुपये अपने इस प्राइवेट प्रोजेक्ट के लिए मंजूर करवा लिए।

इसमें से 17 करोड़ रुपये तो 4 बिल्डिंग्स बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी से लिए गए और 37 करोड़ रुपये यूपी जल निगम की एक संस्था सी एंड डीएस से। इसके साथ ही 53 करोड़ 56 लाख रुपये सीधे तौर पर जल निगम से ले लिए गए और इनसे जौहर यूनिवर्सिटी में कंस्ट्रक्शन हुआ।

और ये सारा पैसा इस बहाने से लिया जा रहा था कि इससे गांवों के लोगों को पीने का साफ पानी दिया जाएगा। लेकिन टैक्सपेयर के पैसे का इस्तेमाल जौहर यूनिवर्सिटी के अंदर बनी झील में पानी भरने के लिए किया गया।

और सिर्फ इतना ही टैक्स का पैसा बर्बाद नहीं हुआ, बल्कि आज़म ख़ान ने पीडब्ल्यूडी से 3.5 किलोमीटर की प्राइवेट सड़क भी जौहर यूनिवर्सिटी में बनवाई। यानी पैसा सरकार का और सड़क आज़म ख़ान की। अब योगी सरकार ने इन सड़कों को आम आदमी के लिए खोल दिया है।

और ये सब मैसिव फंड डायवर्जन अखिलेश यादव की सरकार में चलता रहा। अखिलेश यादव ने उन्हें कभी नहीं रोका क्योंकि वो एम-वाई समीकरण का मुस्लिम फेस थे।

किसी अधिकारी की आज़म ख़ान को रोकने की हिम्मत ही नहीं थी क्योंकि आज़म उन्हें जूते साफ करवाने की धमकी देते थे। लेकिन अब इस अवैध जौहर यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग्स भी गिरेंगी और टैक्सपेयर के पैसे से बना इंफ्रास्ट्रक्चर आम लोगों के इस्तेमाल में आएगा।

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