कांग्रेस से पंजाब के फॉर्मर CM खुल्लेआम इलेक्शन कैंपेन में यूपी और बिहार के लोगों को भैया बोल रहे हैं और पंजाब में ना घुसने देने की बात बोल रहे हैं। पंजाब की गलियों में नारे गूँज रहे हैं। होशियारपुर से लेकर मानसा तक लाउडस्पीकर पर अल्टीमेटम दिया जा रहा है – “भैया भगाओ, पंजाब बचाओ”, और कहा जा रहा है कि सभी भैया 24 घंटे में पंजाब छोड़ दें।
गाँव‑गाँव मीटिंग हो रही है। पंचायतें फ़रमान सुना रही हैं कि यूपी‑बिहार के लोगों को किराए का कमरा मत दो, इन्हें ज़मीन मत बेचो, न वोटर कार्ड बनेगा, न राशन कार्ड। सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनलों पर आग भड़काई जा रही है कि ये प्रवासी पंजाब के लिए ख़तरा हैं।
नतीजा ये हो रहा है कि रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भगदड़ मची है। यूपी‑बिहार से आए मज़दूर अपने परिवारों को लेकर ऐसे भाग रहे हैं, मानो पंजाब की ज़मीन पर रहना उनकी जान लेने के बराबर हो गया हो। मोहाली ज़िले के लोकल मंडी और दुकानें बंद कर दी गईं। स्थानीय लोगों का कहना है जो बाहर से आए हुए लोग हैं, उनका पुलिस वेरिफिकेशन किया जाए, लेकिन सोचने वाली बात है कि इतने कम समय में ये लोग वेरीफाई कैसे करवाएँगे? प्रवासी ऐसा नहीं करता, तो उसे गांव छोड़कर अपने राज्य लौट जाना होगा।
लोगों को पिंड छोड़ने की धमकी दी जा रही है। आप इस वीडियो को देखिए जिसमें खुल्लेआम गाँव के लोगों को जमा करके उन्हें कहा जा रहा है कि कोई भी गुज्जर, लेबर या प्रवासी हो, उन्हें ज़मीन नहीं दी जाएगी। कई गांवों में यह खुलेआम कहा जा रहा है कि किसी प्रवासी की फाइल या आधार कार्ड नहीं है तो उसे बाहर निकाल दिया जाये।
आपको शुरुआत में एक वीडियो दिखायी थी, फार्मर CM की, जिसमें वो सेम नारे लगा रहे थे, तो ये तो पता है कि ये कोई नयी आग नहीं है, इसकी चिंगारी तो कई साल पहले लग चुकी थी, लेकिन इतने सालों बाद ये सब क्यों?
9 सितंबर को होशियारपुर में 5 साल के बच्चे की हत्या हुई। आरोपित उत्तर प्रदेश का प्रवासी मजदूर था। और इस एक घटना के बाद पूरे पंजाब में “प्रवासी भगाओ” का माहौल खड़ा कर दिया गया कि 24 घंटे में प्रदेश छोड़ दें। कई पंचायतों ने प्रस्ताव पास कर दिया कि “भैय्या अब गाँव में नहीं रहेंगे।” और यहीं से शुरू हुआ “भैया भगाओ, पंजाब बचाओ” का शोर।
प्रवासी रेहड़ी वालों को धमकाया जा रहा है, कि “यहाँ से निकल जाओ।” वीडियो सामने आई हैं, जिनमें पंचायतें तालिबानी अंदाज़ में आदेश सुनाती दिख रही हैं।
असलियत ये है कि “भइया” को पंजाब में गाली बना दिया गया है। भीड़ इकट्ठा करके रैलियां हो रही हैं। मानो हर अपराध का ज़िम्मेदार सिर्फ प्रवासी है। यूपी‑बिहार में किसी को भैया कहना जहाँ आदर और सम्मान का भाव दिखाता है, वहीं पंजाब में “भैया” ऐसे लोगों को कहा जाता है जो दूसरे राज्यों से इस सूबे में आए हैं। पिछले कुछ सालों में महाराष्ट्र की शिवसेना की राजनीति और पंजाब के इन घृणा से भरे गिरोहों ने “भैया” शब्द को एक गाली में बदलकर रख दिया है।
लेकिन पंजाब का सच कुछ और है। ये वही राज्य है जहाँ के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कुछ साल पहले कहा था कि “यूपी, बिहार के भैय्यों को घुसने मत दो।” तब बिहार से लेकर दिल्ली तक राजनीति गरमा गई थी। आज फिर वही जहर फैल रहा है।
जहाँ हर चौराहे पर IELTS कोचिंग मिलती है, जहाँ नौजवान कनाडा‑अमेरिका भागने के लिए बेचैन रहते हैं, वहीं अपने ही देश के मेहनतकश भाइयों को बाहर खदेड़ने की साज़िश हो रही है।
और ये भी सच है कि पंजाब की इंडस्ट्री इन्हीं प्रवासी ‘भइयाओं’ के दम पर चलती है। लुधियाना की टेक्सटाइल से लेकर खेत‑खलिहानों तक अगर यूपी‑बिहार का मज़दूर निकल जाए तो पंजाब एक महीना भी नहीं टिक सकता। खुद बिजनेसमैन भी मान रहे हैं कि ये लोग चले गए तो काम ठप हो जाएगा।
फिर भी भगवंत मान की सरकार चुप है। ना तो भगवंत मान और ना ही पंजाब में काफिला लेकर घूमने वाले केजरीवाल इस अन्याय पर बोल पा रहे हैं। क्या ये सन्नाटा मौन समर्थन नहीं है? जिस पंजाब को गुरुओं और पीरों की धरती कहा जाता है, क्या वहाँ अपने ही देश के लोग अजनबी बना दिए जाएंगे? क्या सिख गुरुओं के अंदर कभी हिंदुओं के ख़िलाफ़ घृणा थी?
इस मामले को नेशनल सेक्योरिटी की नज़र से भी देखना चाहिए क्योंकि पंजाब एक बॉर्डर स्टेट है, पाकिस्तान से लगी 550 किलोमीटर की सीमा पर खड़ा। जिसने दशकों तक आतंकवाद झेला है। ऐसे राज्य में इस तरह की नफ़रत की आग क्या ये पूरे देश के लिए ख़तरे की घंटी नहीं है?
महाराष्ट्र में भेदभाव भाषा और नौकरी के नाम पर हुआ था। पंजाब में वजह सिर्फ एक है कि वे “भइये” हैं।
आज जो लोग यूपी‑बिहार वालों को बाहर निकालने के लिए नारे लगा रहे हैं, वो तब कुछ नहीं बोलते जब कनाडा में पंजाब का ही एक आदमी ट्रक चलते हुए माँ‑बेटी को कुचल देता है, यानी जब कनाडा जैसी जगह में पंजाब से निकला लड़का किसी को मार दे और उसके ख़िलाफ़ कुछ एक्शन लिया जाये तो ये विक्टिम दिखना शुरू हो गए, लेकिन जब पंजाब में इसका उल्टा हो गया, ये वाहनों से लोगों को ही भगा रहे हैं। तो क्या पंजाब भारत का हिस्सा नहीं है? या ऐसा कोई खास रूल है कि यूपी और बिहार का कोई भी आदमी पंजाब की धरती पर क़दम नहीं रख सकता?
ये नारे आज पंजाब की गलियों में गूंज रहे हैं। होशियारपुर से लेकर मानसा तक लाउडस्पीकर पर अल्टीमेटम दिया जा रहा है – “भैया 24 घंटे में पंजाब छोड़ दो।”
गाँव‑गाँव मीटिंग हो रही है। पंचायतें फ़रमान सुना रही हैं कि यूपी‑बिहार के लोगों को किराए का कमरा मत दो, इन्हें ज़मीन मत बेचो, न वोटर कार्ड बनेगा, न राशन कार्ड। सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनलों पर आग भड़काई जा रही है कि ये प्रवासी पंजाब के लिए ख़तरा हैं।
नतीजा ये हो रहा है कि रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भगदड़। यूपी‑बिहार से आए मज़दूर अपने परिवारों को लेकर ऐसे भाग रहे हैं, मानो पंजाब की ज़मीन पर रहना उनकी जान लेने के बराबर हो गया हो। मोहाली ज़िले के लोकल मंडी और दुकानें बंद कर दी गईं। स्थानीय लोगों का कहना है जो बाहर से आए हुए लोग हैं उनका पुलिस वेरिफिकेशन किया जाए, लेकिन सोचने वाली बात है कि इतने कम समय में ये लोग वेरीफाई कैसे करवाएँगे? प्रवासी ऐसा नहीं करता, तो उसे गांव छोड़कर अपने राज्य लौट जाना होगा।
लोगों को पिंड छोड़ने की धमकी दी जा रही है। आप इस वीडियो को देखिए जिसमें खुल्लेआम गाँव के लोगों को जमा करके उन्हें कहा जा रहा है कि कोई भी गुज्जर, लेबर या प्रवासी हो, उन्हें ज़मीन नहीं दी जाएगी।
कई गांवों में यह खुलेआम कहा जा रहा है कि किसी प्रवासी की फाइल या आधार कार्ड नहीं है तो उसे बाहर निकाल दिया जाये।
लेकिन सवाल है कि आख़िर ये सब क्यों?
9 सितंबर को होशियारपुर में 5 साल के बच्चे की हत्या हुई। आरोपित उत्तर प्रदेश का प्रवासी मजदूर था। और इस एक घटना के बाद पूरे पंजाब में “प्रवासी भगाओ” का माहौल खड़ा कर दिया गया कि 24 घंटे में प्रदेश छोड़ दें। कई पंचायतों ने प्रस्ताव पास कर दिया कि “भैय्या अब गाँव में नहीं रहेंगे।” और यहीं से शुरू हुआ “भैया भगाओ, पंजाब बचाओ” का शोर।
प्रवासी रेहड़ी वालों को धमकाया जा रहा है, कि “यहाँ से निकल जाओ।” वीडियो सामने आई हैं, जिनमें पंचायतें तालिबानी अंदाज़ में आदेश सुनाती दिख रही हैं।
असलियत ये है कि “भइया” को पंजाब में गाली बना दिया गया है। भीड़ इकट्ठा करके रैलियां हो रही हैं। मानो हर अपराध का ज़िम्मेदार सिर्फ प्रवासी है। यूपी‑बिहार में किसी को भैया कहना जहाँ आदर और सम्मान का भाव दिखाता है, वहीं पंजाब में “भैया” ऐसे लोगों को कहा जाता है जो दूसरे राज्यों से इस सूबे में आए हैं। पिछले कुछ सालों में महाराष्ट्र की शिवसेना की राजनीति और पंजाब के इन घृणा से भरे गिरोहों ने “भैया” शब्द को एक गाली में बदलकर रख दिया है।
लेकिन पंजाब का सच कुछ और है। ये वही राज्य है जहाँ के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कुछ साल पहले कहा था कि “यूपी, बिहार के भैय्यों को घुसने मत दो।” तब बिहार से लेकर दिल्ली तक राजनीति गरमा गई थी। आज फिर वही जहर फैल रहा है।
विडंबना देखिए कि जहाँ हर चौराहे पर IELTS कोचिंग मिलती है, जहाँ नौजवान कनाडा‑अमेरिका भागने के लिए बेचैन रहते हैं, वहीं अपने ही देश के मेहनतकश भाइयों को बाहर खदेड़ने की साज़िश हो रही है।
और ये भी सच है कि पंजाब की इंडस्ट्री इन्हीं प्रवासी ‘भइयाओं’ के दम पर चलती है। लुधियाना की टेक्सटाइल से लेकर खेत‑खलिहानों तक अगर यूपी‑बिहार का मज़दूर निकल जाए तो पंजाब एक महीना भी नहीं टिक सकता। खुद बिजनेसमैन भी मान रहे हैं कि ये लोग चले गए तो काम ठप हो जाएगा।
फिर भी भगवंत मान की सरकार चुप है। ना तो भगवंत मान और ना ही पंजाब में काफिला लेकर घूमने वाले केजरीवाल इस अन्याय पर बोल पा रहे हैं। क्या ये सन्नाटा मौन समर्थन नहीं है? जिस पंजाब को गुरुओं और पीरों की धरती कहा जाता है, क्या वहाँ अपने ही देश के लोग अजनबी बना दिए जाएंगे? क्या सिख गुरुओं के अंदर कभी हिंदुओं के ख़िलाफ़ घृणा थी?
इस मामले को नेशनल सेक्योरिटी की नजर से भी देखना चाहिए क्योंकि पंजाब एक बॉर्डर स्टेट है, पाकिस्तान से लगी 550 किलोमीटर की सीमा पर खड़ा। जिसने दशकों तक आतंकवाद झेला है। ऐसे राज्य में इस तरह की नफ़रत की आग क्या ये पूरे देश के लिए ख़तरे की घंटी नहीं है?
महाराष्ट्र में भेदभाव भाषा और नौकरी के नाम पर हुआ था। पंजाब में वजह सिर्फ एक है कि वे “भइये” हैं।
तो सवाल यही है कि क्या पंजाब भारत का हिस्सा नहीं है? या फिर इस देश का कोई भी आदमी पंजाब की धरती पर क़दम नहीं रख सकता?
आज जो लोग यूपी बिहार वालों को बाहर निकालने के लिए नारे लगा रहे हैं, वो तब कुछ नहीं बोलते जब कनाडा में पंजाब का ही एक आदमी ट्रक चलते हुए माँ‑बेटी को कुचल देता है, यानी जब कनाडा जैसी जगह में पंजाब से निकला लड़का किसी को मार दे और उसके ख़िलाफ़ कुछ एक्शन लिया जाये तो ये विक्टिम दिखना शुरू हो गए लेकिन जब पंजाब में इसका उल्टा हो गया ये वाहनों से लोगों को ही भगा रहे हैं। तो क्या पंजाब भारत का हिस्सा नहीं है? या ऐसा कोई खास रूल है कि यूपी और बिहार कोई भी आदमी पंजाब की धरती पर क़दम नहीं रख सकता?




