किसी देश में क्रांति की कॉस्ट क्या होती है, अगर आपको ये जानना हो तो हमारे पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश से बढ़िया एग्जाम्पल कुछ नहीं होगा। अगस्त 2024 में जब शेख हसीना को इस्लामी कट्टरपंथियों ने सत्ता से बाहर किया था, तो उन्हें लगा था कि आगे कुछ नहीं बदलेगा और जैसे बांग्लादेश लगभग 2 दशक तक हाई ग्रोथ एरा में रहा था, वैसे ही रहेगा।
हालाँकि अब क्रांति की असली कॉस्ट सामने आने लगी है, बांग्लादेश की इकॉनमी की ग्रोथ रेट लगातार गिर रही है। वर्ल्ड बैंक का डेटा कहता है कि साल 2015 से लेकर क्रांति वाले साल यानी 2024 से पहले तक लगातार कहीं 7% तो कहीं 6% की रफ़्तार से बढ़ रहा था। साल 2019 में तो उसकी GDP ग्रोथ रेट 7.9% पहुँच गई थी।
लेकिन जिस साल यानी 2024 में बांग्लादेश में क्रांति शुरू हुई, उसकी इकॉनमी गिरना शुरू हो गई। अब हाल ये है कि साल 2024-25 में ये ग्रोथ रेट 3.5% तो साल 2025-26 में 4.7% रही। सोचिए इतना बड़ा देश और इकॉनमी ग्रोथ सिर्फ़ 4% की। और ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ़ काग़ज़ पर लिखे जाने वाले कोई नंबर हैं।
इसका सीधा असर बांग्लादेश की इकॉनमी पर हो रहा है, बांग्लादेश प्रतिदिन की एक रिपोर्ट कहती है कि दो सालों में बांग्लादेश में 450 से ज्यादा फैक्ट्रियाँ बंद हो चुकी हैं। इसमें बड़ी संख्या में कपड़े की फैक्ट्रियाँ हैं, जिनके चलते बांग्लादेश का एक्सपोर्ट चलता है।
द फाइनेंसियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट कहती है कि बांग्लादेश में 2026 के शुरुआती 5 महीने में ही 7784 फैक्ट्री वर्कर्स की नौकरी जा चुकी है। इससे पहले भी हजारों लोग नौकरियां गँवा चुके हैं। और इसी का नतीजा है कि बड़ी संख्या में लोग विदेशों में नौकरियां ढूँढ रहे हैं।
साल 2024 में जहाँ बांग्लादेश से लगभग 10.1 लाख लोग विदेश गए थे, वहीं साल 2025 में ये नंबर 11.3 लाख से ज्यादा हो गया। बांग्लादेश में महंगाई भी लगातार 9 से 10% के बीच बनी हुई है जो समस्या को और गंभीर कर रही है। कुल मिलाकर बात ये है कि कल बांगलदेश में जो लोग क्रांति में लगे हुए थे आज वो वीजा की लाइन में लगे हैं और क्रांति की कॉस्ट चुका रहे हैं।
जो बांग्लादेश कभी IMF से लेकर वर्ल्ड बैंक तक के लिए एक मॉडल बन रहा था, जिसके आधार पर उसे एशिया का नया टाइगर बताया जा रहा था, अब वो सब उम्मीदें फेड हो चुकी हैं, अब बांग्लादेश की इकॉनमी स्थिर हो जाए, ये बड़ी बात है और इसका जिम्मेदार कहीं ना कहीं वो कथित क्रांतिकारी हैं, जिन्होंने बांग्लादेश को अस्थिरता के इस दलदल में धकेला है।




