शायद उत्तराखंड को किसी की नजर लग गई है, कुछ दिन पहले हरियाणा के पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच हुए झगड़े के बाद खूब बवाल हुआ और अब निहंग सिखों के तलवार चलाने की घटना के बाद तो पूरा इंटरनेट इसी पर उबल रहा है।
दरअसल 16 जून को निहंगों ने कार्यप्रयाग में स्थानीय लोगों पर तलवारों से हमला कर दिया था, इसके बाद स्थानियों ने भी उनके साथ हाथापाई की, मामले में पुलिस ने निहंगों को गिरफ्तार कर लिया और उनके लंगड़ा कर चलने के वीडियो सामने आए। इस पर तमाम सिख संगठनों ने आपत्ति जताई और कहा कि एक तरफ़ा कार्रवाई हुई है।
इसको लेकर दोनों पक्ष आपस में झगड़ ही रहे थे कि 20 जून को नगरासू में कुछ और निहंगों में एक गुरुद्वारे को क़ब्ज़ा लिया, यहाँ उन्होंने गुरुद्वारे के सेवादारों के साथ ही मारपीट कर दी और उसकी छत पर चढ़ कर तलवारे लहराई। निहंग इस बात से गुस्सा थे कि आख़िर गुरुद्वारे ने कर्णप्रयाग में हंगामा काटने वाले निहंगों का समर्थन क्यों नहीं किया?
निहंगों ने यहाँ अब गुरुद्वारा कब्जाया हुआ है और उसकी छत पर तक पहरा दे रहे हैं। अब इस हंगामे के चलते रुद्रप्रयाग में अब इंटरनेट बंद है और धारा 163 भी लागू है, लेकिन सोचने वाली बात ये है कि आख़िर उत्तराखंड में हर सप्ताह एक नया फ़्लैशपॉइंट क्यों तैयार हो रहा है?
उत्तराखंड के स्थानीय लोग जहाँ टूरिज्म के बढ़ते दबाव और उससे भी ज्यादा उन लोगों से परेशान हैं जो टूरिज्म के नाम पर हुड़ंदगई करते हैं और यहाँ तक कि स्थानीय लोगों से मारपीट पर उत्तर आते हैं, इसके चलते अब हॉस्टिलिटी भी बढ़ रही है, पहले जो स्थानीय लोग छोटी छोटी बातें इग्नोर कर दिया करते थे, अब वो भी गुस्सा हो रहे हैं।
हैरानी की बात ये है कि उस उत्तराखंड में निहंग सिख और स्थानीय लोग आमने सामने आ रहे हैं, जहाँ तराई और पहाड़ दशकों से एक साथ रहे हैं और उत्तराखंड को आगे बढ़ाने में दोनों का ही योगदान रहा है। लेकिन अब हर छोटी मोटी घटना दोनों समुदायों के बीच ऑनलाइन युद्ध छेड़ दे रही है।
कहीं ऐसा तो नहीं है कि इसके ज़रिए देवभूमि को अशांत करने की कोई साजिश रची जा रही है?





