पश्चिम बंगाल में एक शब्द बोला जाता है टोलामूल। ये टर्म काफी पुरानी है लेकिन चुनाव के चलते आजकल ये फिर से खूब चर्चा में है और खास बात ये है कि पॉप कल्चर भी टोलामूल नाम का ठीक-ठाक इस्तेमाल कर रहा है।
सबसे पहले ये जानिए कि टोलामूल का मतलब क्या है? बंगाल में टोलाबाजी शब्द काफी पॉपुलर है जिसका सीधा मतलब होता है, जबरन वसूली। यहां छोटी-छोटी बस्तियों को भी टोला या फिर पाड़ा कहा जाता है और इनमें से ज्यादातर इलाकों में TMC के लोगों का कब्जा है जो बेसिकली सबसे निचले स्तर से वसूली के काम में माहिर हैं।
तो अगर आसान शब्दों में कहें तो पश्चिम बंगाल में तृणमूल पार्टी टोलामूल बन चुकी है जो जबरन वसूली का काम करती है।
यहां अलग-अलग जगहों पर लोकल ग्रुप्स का ऐसा नेटवर्क बना है जो सिंडिकेट कल्चर चलाता है यानी वो तय करता है कि अगर आप घर बना रहे हैं या किसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, तो आपको उन्हीं से रेत, ईंट, सीमेंट लेना होगा और ये हाल केवल कंस्ट्रक्शन सेक्टर का नहीं है बल्कि हर सेक्टर का है। इसी के साथ फिर कट मनी भी शामिल होती है यानी अगर किसी को घर बनाने के लिए सरकारी पैसा मिला, तो उसका एक हिस्सा लोकल लेवल पर देना पड़ता है।
वैसे तो ये सिंडिकेट कम्युनिस्ट सरकारों के समय से चलता आया है लेकिन तृणमूल ने इसे नेक्स्ट लेवल तक पहुंचा दिया है और इसलिए भी इसे सीधा टोलाबाजी बोला जाता है।
अब इस टोलाबाजी से पूरी जनता परेशान है इसलिए तृणमूल का दूसरा नाम टोलामूल बन गया है। फेसबुक ग्रुप्स, इंस्टाग्राम और रेडिट पर बंगाली यूजर्स इसे तंज कसने और अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
इंस्टाग्राम पर तो टोलामूल नाम से पेज तक बने हुए हैं। फेसुबक पर तो टोलामूल पार्टी और ममता बनर्जी के लिए टोलामूल सुप्रीमो जैसे शब्द से तंज कसे जा रहे हैं। रेडिट पर अगर आप टोलामूल सर्च मारेंगे तो ऐसे सैकड़ों पोस्ट्स देखने को मिल जाएंगी।
यहां आपको इंग्लिश और बंगाली दोनों में इस शब्द की चर्चा देखने को मिलेगी। जैसे ‘बंगाली सर्टिफिकेट एसोसिएशन ऑफ टोलामूल।’
सोशल मीडिया पर ऐसे कई अकाउंट्स और पोस्ट मौजूद हैं इसलिए हम कह सकते हैं कि टोलामूल शब्द अब चुनावी स्लैंग से कूदकर बंगाली पॉप कल्चर का हिस्सा बन गया है।
इतने सालों से चल रही इस जबरन वसूली से आम जनता अब तंग आ चुकी है और बड़ी बात ये है कि अब ये इसके खिलाफ बोलने भी लगे हैं। इसका एग्जाम्पल हमनें आपको बताया टोलामूल के रूप में बताया और हां ये सिर्फ एक शब्द भर नहीं है बल्कि बंगाल की राजनीति में इस समय एक बड़ा नैरेटिव बन हुआ है कि ये खत्म होना चाहिए।





