वरिष्ठ पत्रकार और द वायर से जुड़ी आरफ़ा ख़ानम शेरवानी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में वह ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामनेई के अंतिम संस्कार में मौजूद दिखाई दे रही हैं। वायरल वीडियो में आरफा खामनेई के लिए आंसू बहाते दिख रही हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं।
अंतिम संस्कार के दौरान आरफ़ा ने वहां मौजूद भीड़ को ईरान के राष्ट्रवाद का प्रतीक बताया। इसी को आधार बनाकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उनकी राष्ट्रवाद संबंधी टिप्पणियों की तुलना भारत में उनके पूर्व बयानों से की और सवाल उठाए कि क्या अलग-अलग देशों के संदर्भ में उनका नजरिया अलग है।
वायरल वीडियो में आरफ़ा ख़ानम शेरवानी काले रंग के कपड़ों में दिखाई दे रही हैं। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इसे अंतिम संस्कार के शोक से जोड़ते हुए सवाल उठाए कि यदि धार्मिक अवसरों पर भारतीय टीवी एंकरों के पारंपरिक हिंदू परिधान पहनने पर उन्होंने पहले आपत्ति जताई थी, तो ईरान में धार्मिक परंपरा के अनुरूप उनके पहनावे को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए।
वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि आरफ़ा ख़ानम शेरवानी ने खामनेई के अंतिम संस्कार में शिरकत क्यों की और शोक व्यक्त करते हुए दिखाई देने का क्या कारण है। कुछ यूजर्स ने इसे उनकी व्यक्तिगत संवेदना बताया, जबकि कई लोगों ने उनकी पत्रकारिता की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए।
इसी क्रम में कुछ सोशल मीडिया पोस्टों में यह भी कहा गया कि जब भारत में पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की हत्या हुई, उड़ी हमले में 19 सैनिक शहीद हुए, पुलवामा में 40 सीआरपीएफ जवानों ने बलिदान दिया और सुकमा-बीजापुर में 22 जवान नक्सली हमले में मारे गए, तब आरफ़ा की सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं उतनी मुखर दिखाई नहीं दीं। इन पोस्टों के आधार पर कुछ लोगों ने उनकी प्रतिक्रिया को “सेलेक्टिव” बताया।





