न्यूयॉर्क के मेयर चुनाव में ज़ोहरान ममदानी ने डेमोक्रेटिक पार्टी से जीत हासिल की। भारतीय मूल के मामदानी की माँ वोक फिल्म मेकर मीरा नायर हैं और पिता’ महमूद ममदानी हैं। लेकिन उनके कट्टर विचार उनके पोस्ट में दिखायी देते हैं।
जैसे ईद की बधाई में उन्होंने गोवंश की तस्वीर लगायी है। न्यूयॉर्क में ज़ोहरान एक ऐसे विरोध प्रदर्शन का हिस्सा थे, जिसमें हिंदुओं को बास्टर्ड्स कहा गया।
ज़ोहरान ये तक कह चुके हैं कि बाबरी मस्जिद के मलबे पर राम मंदिर बनाया गया है।
अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन के दिन ज़ोहरान खालिस्तानी समर्थकों के साथ खड़े थे।
लेकिन भारत के कुछ पत्रकार ज़ोहरान ममदानी को सर पे चढ़ा रहे हैं।
पार्ट टाइम पत्रकार और फुल टाइम बॉक्सर राजदीप सरदेसाई ने अपने ट्वीट में लिखा कि इन चुनावी नतीजों से ये पता चलता है कि “ट्रंपलैंड” में भी अभी तक सामजिक और राजनीतिक विविधता की गुंजाइश है। ऐसे पत्रकार ‘विविधता’ के नाम पर खुद को प्रगतिशील बताते हैं। लेकिन असल में वो किस तरह की विविधता को बढ़ावा देते हैं, आइये जानते हैं –
सागरिका घोष ने डॉ. अब्दुल कलाम को Bomb डैडी कह दिया था। क्यों? क्योंकि वो जिहादी विचारधारा नहीं रखते थे। उन्हें भारत से नफ़रत नहीं था। उन्हें हिंदुओं से नफ़रत नहीं था। डॉक्टर कलाम ने भारत को रक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में मजबूत किया। वो मिसाइल मैन थे, लेकिन कट्टरपंथी नहीं।
वहीं दूसरी ओर राजनीतिक विविधता की बात करें, तो हामिद अंसारी को दो बार भारत का उप-राष्ट्रपति बनाया गया। लेकिन उन दस सालों में उन्होंने किस प्रकार की भूमिका निभाई, वो हम सबने देखा है। संविधान की शपथ लेने के बावजूद, बार-बार उनका रुख ऐसा दिखा, जैसे वो भारत से ज्यादा किसी और के हितैषी हों।
जोहरान ममदानी का गुणगान भारतीय पत्रकार क्या सिर्फ इसलिए कर रहे हैं कि उन्होंने नरेंद्र मोदी को नरसंहार का अपराधी कह कर संबोधित किया था? या सिर्फ इसलिए कि उसके नाम के आगे indian origin लिखा जा सकता है?
अगर ऐसा है तो उन्हें एक बार लंदन का ‘सूरत-ए-हाल’ देख लेना चाहिए जहाँ 2016 में पहला मुस्लिम मेयर चुने जाने के बाद नौ सालों में डेमोक्रेसी की आड़ में सड़कों से शिक्षा संस्थानों तक शरिया लागू हो रखा है। नौ साल में लंदन बदल कर अब लंदनिस्तान हो गया है। इस्लामिक कट्टरवादी जोहरान ममदानी को न्यूयॉर्क को बदलने में कितने वर्ष लगेंगे, ये तो आने वाला समय ही बताएगा।





