kashi iftari

काशी: गंगा नदी पर ‘हलाल इफ़्तारी पार्टी’? काशी में जिहादी टूरिज्म पर चला CM योगी का डंडा

Summary
काशी के पावन गंगा घाटों पर चलती बोट में 'Iftar Party' और मांस के अवशेष नदी में फेंकने का शर्मनाक वीडियो सामने आया है। जहाँ योगी सरकार ने त्वरित एक्शन लेते हुए 14 लोगों को जेल भेजा, वहीं कांग्रेस और विपक्षी दलों के बयानों ने नई बहस छेड़ दी है। क्या यह महज़ एक पिकनिक थी या सनातन आस्था को ठेस पहुँचाने की कोई गहरी साजिश?


काशी की मर्यादा और गंगा पर इफ़्तारी से तुष्टीकरण की राजनीति.. काशी दर्शन याद करके आपको क्या-क्या याद आता होगा? Kashi Chaat Bhandar की चाट-पकौड़ी, रास्ते में चलते-चलते कुल्हड़ की चाय और क्योंकि ये “महादेव की नगरी” है, तो हवाओं में वैसे ही कुछ अलग है; हवाओं में डमरू की गूँज है और पानी में मोक्ष की शक्ति है।

यह नगरी खुद में इतनी पवित्र है कि इंसान भक्ति भावना और घाट किनारे ध्यान लगाने के अलावा कुछ नहीं करना चाहता। लेकिन आपने यह वीडियो तो अब तक देख लिया होगा… यह वीडियो भी उसी काशी से है। “महादेव की नगरी” काशी के इस वीडियो में कुछ Goat Lovers और “मजहबी मुसाफिर”, कुर्ता-पजामा पहने और सिर पर टोपी लगाए Boat पर चढ़कर Iftari Party कर रहे थे। Iftar के नाम पर पिकनिक मना रहे थे, हलाल मांस ठूँस रहे थे और फिर वीडियो बनाते हुए Chicken की हड्डियाँ गंगा जी में फेंक रहे थे।

Ramzan का पाक महीना चल रहा है; Iran, Afghanistan और Pakistan में इनके भाईजान लोग आपस में मरने-मारने को तैयार बैठे हैं, और इधर ये लोग Boating करते हुए पार्टी कर रहे हैं। अरे भाई, ईद पर गंगा जी में पार्टी करने का क्या तुक है? कौन सी पाक किताब में यह लिखा है, यह तो खुदा ही जाने। और फिर यह वीडियो देखिए कि यह Iftari Party चल कहाँ रही थी? बिंदुमाधव मंदिर के पास, जहाँ मांस पूरी तरह से Ban(प्रतिबंधित) है।

वीडियो देखकर जब लोगों ने इन ‘मुर्गीकट’ वालों की पुलिस में शिकायत की, तो योगी जी की पुलिस ने इनकी Iftari Party पर ग्रहण लगा दिया और 14 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। भाईजानों का Chicken पचने से पहले ही कानून का डंडा बज गया। खैर, बंद कमरों में क्या हुआ क्या नहीं, यह तो हम नहीं बता सकते, लेकिन पूजा स्थल को यदि हम भी अपवित्र करते तो हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही होता, क्योंकि गंगा घाट और नदी को साफ़ रखने के अपने Laws (नियम) हैं। यहाँ तक कि यदि कोई साबुन से कपड़े धोता हुआ घाट पर पाया जाता है, तो उस पर भी पुलिस Actionलेती है।

इन लोगों पर पुलिस ने Action लिया, तब जाकर बाकी Iftari वालों को भी संदेश मिला कि बिरादरों की तरह गलती नहीं करनी है। सबको समझ आया, लेकिन कांग्रेस के Multi Level Marketing Agents यानी MLM’s के अंदर छिपी हुई बिलकिस खाला को बड़ा दुख हुआ। सुप्रिया श्रीनेत का यह Tweet देखिए; वह जनता से पूछ रही हैं कि पार्टी करने वालों ने क्या कानून तोड़ा? क्या पाप किया? और पूछ रही हैं कि “हम किस ओर जा रहे हैं?” अंत में Sick (बीमार मानसिकता) भी लिखा है।

सुप्रिया जी, इस Sick की परिभाषा क्या है? जो दिल्ली के उत्तम नगर में तरुण के साथ हुआ, क्या वह Sick नहीं था? जो सलीम वस्तिक के साथ हुआ, क्या वह Sick नहीं था? गंगा में हलाल मीट डालने से आपको समस्या नहीं हो रही, तो इसका मतलब आप भी ऐसे ही Chicken खाकर गंगा जी में हड्डियाँ फेंक देती होंगी। कभी नेहरू जी की अस्थियाँ भी इसी गंगा में प्रवाहित हुई होंगी, लेकिन सुप्रिया जी का एकतरफा समर्थन सिर्फ जिहादियों के लिए है… वो जिहादी जो गंगा जल को गंदा कर रहे हैं।

खैर, कांग्रेसियों का तो सनातन धर्म से वैसे भी कोई लेना-देना है नहीं; इनका सारा सरोकार बस ‘चादर और फादर’ वालों से है और यह सबको पता है। यह कांग्रेस है… इनको कोई परवाह नहीं। वह तो अच्छा है कि यूपी में योगी सरकार Bulldozer Action लेती है और उनका खौफ इन जिहादियों के जेहन में बैठ चुका है, अन्यथा समाजवादी और कांग्रेस मिलकर गंगा पर Iftari को भी Normalise (सामान्य) कर देते; और तो और, कांग्रेस खुद ही Iftari Picnic Organize करती।

आपको याद होगा कि अभी कुछ दिन पहले London से एक खबर आई थी। एक सिख दुकानदार को सिर्फ इसलिए पुलिस ले गई क्योंकि उसने अपनी दुकान पर ‘हलाल’ मीट बेचने से मना कर दिया था। और इसकी वजह क्या थी? वहाँ के मुस्लिमों की ‘मजहबी भावनाएं’ आहत हो गई थीं। गजब का Secular लोकतंत्र है भाई! इसे ‘दोगलेपन की PHD’ नाम दिया जाना चाहिए, जो सिर्फ विशेष मदरसों या Al Falah University में ही मिलती है।

विदेश में ये लोग अपनी मर्जी का मांस खिलाने के लिए दूसरों की रोजी-रोटी छीन लेते हैं, और हमारे भारत में ये क्या करते हैं, वह भी देख लीजिए। हमारे भारत में ‘गंगा’ पर Boating चल रही है, Iftari Party चल रही है, Winner Winner Chicken Dinner चल रहा है। यह कौन सी मानसिकता है? यह तो जिहादी सोच ही है जो दूसरों को काफ़िर मानती है, तो वे आस्था का मजाक ही उड़ाएंगे।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का Bulldozer जब इनके घरों पर चलता है, तो अपराधियों के इरादों पर वैसे ही पूर्ण विराम लग जाता है। ईद से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसीलिए साफ कह दिया है कि Law and Order से खिलवाड़ यानी सीधा यमराज का टिकट। चाहे वह अवैध कब्जे हों, माफियाओं का हिसाब-किताब पूरा करना हो, या फिर त्योहारों पर दंगा फैलाने वालों को ठीक करना। योगी सरकार ने Latest Guidelines में स्पष्ट कर दिया है कि सड़कों पर नमाज नहीं होगी, मजहबी जुलूसों में हथियार नहीं होंगे और अगर किसी ने प्रदेश का माहौल बिगाड़ा, तो उसकी सात पीढ़ियां हर्जाना भरते-भरते थक जाएंगी।

लेकिन शायद कुछ लोगों को यह शांति पच नहीं रही है। और अगर आपको लगता है कि ये जिहादी भाईजान लोग जानबूझकर ऐसा नहीं कर रहे हैं, तो आप बेहद ‘भोले’ आदमी हैं। यह गंगा में मीट फेंकना कोई Coincidence (संयोग) नहीं है, यह एक सोची-समझी साजिश है ताकि हिंदू-मुसलमान सड़क पर उलझते नजर आएं और फिर ये लोग Victim Card खेल सकें।

और इसके रुझान दिखने भी लगे हैं। आरफ़ा ख़ानम Tweet करके लिख रही हैं कि “हम आह भी करें तो होते हैं बदनाम, और वो क़त्ल भी करें तो चर्चा नहीं होता”। मतलब बेशर्मी की जो पराकाष्ठा है, यह उसकी Superlative Degree है। दिल्ली के उत्तम नगर में कत्ल ही किया है इसी कौम वालों ने, और वहाँ के मुस्लिम हत्या को भी यह कहकर Justify (सही ठहराना) कर रहे हैं कि इस्लाम में (होली के) रंग को अशुभ मानते हैं—और यह गंगा को अपवित्र करने वालों पर होने वाले Legal Action को कह रही हैं कि ये बदनाम हुए हैं! यह हर बार खुद को Victim बताने का हुनर हिंदू कहाँ से लेकर आएं, सवाल इस बात का है।

और इस आग में घी डालने का काम कौन कर रहा है? वही ‘मोहब्बत की दुकान’ वाली पार्टी, जो खुद अपनी कब्र हर रोज खोद रही है—यानी कांग्रेस। सत्ता तो अब कांग्रेस के लिए ‘मृगतृष्णा’ बन चुकी है। दूर-दूर तक कोई Chance नहीं है, तो अब इन्होंने वापस नया रास्ता चुना है, जो इन नकली गांधियों को इनके असली पूर्वज सिखाकर गए थे: Divide and Rule (बाँटो और राज करो)। Congress को आजकल Muslim League बनने की तड़प मची हुई है। उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि गंगा अपवित्र हो रही है, उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुँची है। उन्हें तो बस अपने उस खास Vote Bank की चिंता है जिसके कंधों पर बंदूक रखकर वे हिंदुओं के खिलाफ अपना जहर उगल सकें।

कांग्रेस का मकसद सीधा है कि राजनीति की भड़काऊ बहस को जिंदा रखना। जब तक समाज बंटेगा नहीं, इनका Political Agenda चलेगा कैसे? ये मजहबी कट्टरपंथियों को उकसाते हैं, उन्हें पनाह देते हैं ताकि ये लोग हिंदू समाज को चिढ़ा सकें और फिर कांग्रेस Secularism का चोला ओढ़कर उनका बचाव कर सके।

हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों ने यह हरकत की, उन्हें खुद उनके समाज के जानकारों ने आईना दिखा दिया है। Anjuman Intezamia Masjid Committee ने खुद इन लोगों की हरकत को गलत बताया है। कमेटी ने साफ कहा है कि “इफ्तार कोई पार्टी या पिकनिक नहीं है।” इफ्तार के बाद नमाज पढ़ना जरूरी होता है। और वीडियो में तो ठूँस-ठूँसकर खाया जा रहा है, ठहाके लगाए जा रहे हैं। यह इबादत नहीं है, यह सरेआम गुंडागर्दी है। यह हिंदू आस्था का अपमान है। जब खुद आपकी मजहबी कमेटियां कह रही हैं कि यह गलत है, तो कांग्रेस के पेट में मरोड़ क्यों उठ रही है? क्योंकि कांग्रेस को इबादत से मतलब नहीं है, उसे तो बस उस नफरत से मतलब है जो इस हरकत से पैदा होगी।

ये जो आज नए-नए ‘विशेष’ बनकर गंगा की लहरों को गंदा कर रहे हैं, इन्हें शायद अपना इतिहास याद नहीं। ये भूल गए हैं कि इनके पूर्वजों की हड्डियां भी इसी गंगा माँ की गोद में प्रवाहित हुई थीं। क्यों? क्योंकि तब तक वे सनातनी थे, तब तक वे इसी मिट्टी और इसी संस्कृति के हिस्से थे। आज चार दिन का मजहबी जुनून क्या चढ़ा, तुम उस गंगा को ही चुनौती देने लगे जिसने तुम्हारे पूर्वजों को मुक्ति दी थी?

हिंदू तो सदियों से गंगा को पवित्र मानते आए हैं, लेकिन यह दृश्य देखकर हर सनातनी का दिल दुखेगा। दुख तो खैर सभी को हो रहा होगा, लेकिन ‘सेकुलर’ होने के कारण कई लोग चुप हैं और कांग्रेसी तो खैर बोलने वालों को भी चुप करवाना चाहते हैं। हिंदू परंपरा के अनुसार घाट पर दाह संस्कार करना आस्था है, लेकिन हलाल मीट की हड्डियां फेंककर गंगा को अपवित्र करना घोर Blasphemy (ईशनिंदा/अनादर) है। समस्या यही है कि हिंदुओं के शब्दकोश में Blasphemy जैसा कोई कठोर शब्द (कानूनन) प्रभावी नहीं है, इसलिए सबको छूट मिली हुई है।

लेकिन जब उनकी तरफ से गंगा जी जैसे पवित्र स्थल पर अपमान होता है तो कांग्रेस उसे Sick कहती है। वाराणसी जैसे पवित्र शहर से यह वीडियो हर तरह से भड़काऊ है और हिंदुओं का मजाक बनाना ही उनका मकसद है। बस उनकी किस्मत खराब है कि वहाँ योगी आदित्यनाथ की सरकार है।

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