सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण के एक बड़े और पुराने विवाद को साफ कर दिया है। अगर कोई SC, ST या OBC उम्मीदवार सामान्य वर्ग की कट-ऑफ से ज्यादा अंक लाता है, तो उसे सामान्य कैटेगरी में ही जगह मिलेगी। यह फैसला न होनहार आरक्षित उम्मीदवारों के लिए बड़ी राहत है, जो अपनी योग्यता के बावजूद ऊँची कैटेगरी कट-ऑफ की वजह से बाहर हो जाते थे।
मामला राजस्थान हाईकोर्ट की एक भर्ती से जुड़ा है। अगस्त 2022 में हाईकोर्ट ने दो चरणों में 2,756 पदों पर भर्ती शुरू की थी। पहला चरण लिखित परीक्षा था, जिसका परिणाम मई 2023 में आया। दूसरे चरण यानी कि टाइपिंग टेस्ट के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करना था।यहाँ गड़बड़ हुई। भर्ती अधिकारियों ने हर कैटेगरी के लिए अलग-अलग कट-ऑफ तय की।
सामान्य कट-ऑफ पार तो मेरिट में जगह
सामान्य वर्ग का कट-ऑफ करीब 196 अंक रहा, लेकिन SC, OBC, EBC और EWS जैसी आरक्षित श्रेणियों का कट-ऑफ इससे कहीं ज्यादा, कई मामलों में 230 अंक से भी ऊपर, तय कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि कई आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार, जिन्होंने सामान्य कट-ऑफ से ज्यादा अंक लिए थे, अपनी कैटेगरी के ऊँचे कट-ऑफ तक नहीं पहुँच पाए और टाइपिंग टेस्ट से बाहर हो गए। वहीं, उनसे कम अंक वाले सामान्य वर्ग के उम्मीदवार आगे बढ़ गए।
प्रभावित उम्मीदवारों ने इसे मनमाना बताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की और कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।हाईकोर्ट ने उम्मीदवारों के पक्ष में फैसला दिया।
भर्ती प्राधिकरण ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उनकी मुख्य दलील थी कि अगर आरक्षित उम्मीदवार को सामान्य कट-ऑफ से आगे बढ़ने दिया गया तो उसे “दोहरा लाभ” मिल जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी और हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया।कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सामान्य या ओपन कैटेगरी किसी खास जाति या वर्ग की नहीं होती। यह पूरी तरह मेरिट पर आधारित होती है और सभी के लिए खुली होती है।
योग्यता का सम्मान और आरक्षण का संतुलन
ओपन पदों पर किसी भी योग्य उम्मीदवार की नियुक्ति हो सकती है, चाहे वह किसी भी वर्ग से हो। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सिद्धांत भी स्थापित किया कि अगर आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार लिखित परीक्षा में सामान्य कट-ऑफ से ज्यादा अंक लाता है, तो अगले चरण में उसे सामान्य कैटेगरी का उम्मीदवार माना जाएगा। लेकिन अगर अंतिम मेरिट में उसके अंक सामान्य कट-ऑफ से कम रह जाते हैं, तो वह अपनी मूल आरक्षित श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ ले सकेगा।
इस फैसले से योग्यता और आरक्षण के बीच संतुलन बना रहेगा। होनहार आरक्षित उम्मीदवारों को उनकी मेहनत का पूरा सम्मान मिलेगा, और जरूरतमंद उम्मीदवारों को आरक्षण का सुरक्षा कवच भी बना रहेगा।





