एक हिंदू लड़का सूर्या गले मिलकर अपने मुस्लिम दोस्त असद को ईद की बधाई देता है और असद, उसी समय सूर्या के पेट में चाकू घोंप देता है और फिर सूर्या को तड़पा तड़पा कर मार दिया जाता है।
आपकी रूह कंपा देने वाली ये घटना उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की है। बकरीद के दिन यानी 28 मई को 17 साल का सूर्या जो अभी 11वीं क्लास में पढ़ रहा था वो अपने दो हिंदू दोस्तों विक्की और आयुष के साथ अपने घर के पास घूम रहा था।
उसी दौरान एक मुस्लिम असद ने सूर्या को फोन किया और बकरीद पर मिलने के लिए एक गली में बुलाया। सूर्या अपने हिंदू दोस्तों के साथ असद की बुलाई जगह पर चला गया। असद से मिलते ही सूर्या ने उसे गले लगाया और एक अच्छे दोस्त की तरह बकरीद की मुबारक बात भी दी। इसके बाद असद सूर्या से बड़े ही आक्रामक स्वर में पूछता है कि तुमने कभी बकरा हलाल होते देखा है?
इस पर सूर्या ने जब कहा कि नहीं देखा तो असद जबरदस्ती करने लगा कि आओ आज तुम्हें दिखाते हैं कैसे बकरा हलाल होता है। सूर्या ने असद की बात नहीं मानी और उसके साथ जाने से मना कर दिया और वो वहां से अपने घर की तरफ लौटने लगा।
इस बात से असद गुस्से से आग-बबुला हुआ और उसने सूर्या को गाली देनी शुरू कर दी। इसके बाद जब सूर्या ने विरोध किया तो असद ने चाकू निकाला और उसके पेट में घोंप दिया।
जब ये घटना हो रही थी तब सूर्या के हिंदू दोस्तों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन असद अपने साथ 4 और मुस्लिमों को लाया था। इनके नाम हैं, नवाब, फरहान, आतिफ, सारिक। इन पांचों ने उन्हें चाकू दिखाकर डराया कि अगर वो बीच में पड़े तो उन्हें भी चाकू से मार दिया जाएगा।
अब चाकू लगने के बाद सूर्या ने जैसे-तैसे असद को धक्का देकर ख़ुद को छुड़ा तो लिया लेकिन चाकू अब भी पेट में फंसा रहा। पेट में चाकू लेकर सूर्या अपनी जान बचाने के लिए भागा लेकिन बेचारा कितनी दूर तक भाग पता।
सूर्या के दोस्तों ने बताया कि असद और उसके साथियों ने सूर्या का पीछा किया और उसके पेट से चाकू निकालकर फिर से पांच से छ बार हमला किया। इसके बाद सूर्या बेहोश हो गया और वो मुस्लिम हत्यारे वहां से भाग गए।
उनके भागने के बाद विक्की और आयुष ने अपनी शर्ट सूर्या के पेट पर बाँधी ताकि खून रुक सके। इसके बाद उन्होंने सूर्या के भाई को इस बारे ने बताया और तुरंत नज़दीकी अस्पताल लेकर चले गए लेकिन ख़ून इतना बह चुका था और घाव इतने गहरे थे कि अगले दिन यानी 29 मई को सूर्या ने दम तोड़ दिया।
अब पुलिस अपना काम कर रही है, कुछ गिरफ्तार हो गए हैं और कुछ का होना बाक़ी है लेकिन सवाल उस मानसिकता का है जो आए दिन कभी पहलगाम में धर्म पूछकर मार रही है तो कभी मुंबई में कलमा ना पढ़ने पर छुरा घोंप रही है और आज 11वीं में पढ़ने वाला सूर्या इस जिहादी मानसिकता का शिकार बना है। आख़िर इसका इलाज क्या है और कब तक हिंदू इसकी बलि चढ़ता रहेगा?





