पश्चिम बंगाल की महिलाओं के लिए चलाई जा रही लक्ष्मी भंडार योजना को लेकर राज्य की नई भाजपा सरकार ने बड़ा दावा किया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि योजना के तहत बड़ी संख्या में अपात्र महिलाएं वर्षों से सरकारी सहायता प्राप्त कर रही थीं। सरकार का कहना है कि व्यापक सत्यापन अभियान के दौरान करीब 30 लाख लाभार्थी ऐसे पाए गए जो योजना की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते थे।
लाभार्थियों में विदेशी महिलाओं के नाम भी शामिल
राज्य सचिवालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सत्यापन प्रक्रिया में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। उनके अनुसार लाभार्थियों की सूची में मृत महिलाओं के नाम, कथित रूप से फर्जी पहचान वाले लाभार्थी तथा ऐसी महिलाओं के नाम भी शामिल पाए गए जो भारतीय नागरिक नहीं थीं।
सरकार का यह भी दावा है कि बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए हैं जिन्हें एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बाहर किया जा चुका था, लेकिन वे अब भी योजना का लाभ प्राप्त कर रही थीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने योजनाओं के लाभार्थियों का पुनः सत्यापन के आधार पर अपात्रों को सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार के अनुसार जिन व्यक्तियों की नागरिकता संबंधी जांच लंबित है अथवा जिनके नाम मतदाता सूची से हट चुके हैं, उन्हें फिलहाल सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं दिया जाएगा।
भाजपा ने लॉन्च की ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भाजपा की नई महत्वाकांक्षी योजना ‘अन्नपूर्णा भंडार’ का आवेदन पत्र भी जारी किया। सरकार का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने घोषणापत्र में महिलाओं को प्रतिमाह 3000 रुपये की आर्थिक सहायता देने का वादा किया था और अब उस वादे को लागू किया जा रहा है।
आपको बता दें कि बंगाल में लक्ष्मी भंडार योजना की शुरुआत वर्ष 2021 में तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार द्वारा की गई थी। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करना था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार योजना के तहत लगभग 2.21 करोड़ महिलाओं को लाभ दिया जा रहा था।
अब सवाल यह कि क्या ममता सरकार फर्जी लाभार्थियों की आड़ में कोई बड़ा घोटाला कर रही थीं। अब इसे लेकर भी भाजपा की नई सरकार ने जांच शुरू कर दी है।





