illegal bangladeshi in south india

पश्चिम बंगाल से साउथ तक, कैसे फैला अवैध बांग्लादेशियों का नेटवर्क?

Summary
ऐसे ही तमिलनाडु से इसी महीने 50 बांग्लादेशियों को ट्रेन के जरिए पश्चिम बंगाल भेजा गया ताकि उन्हें वापस बांग्लादेश भेजा जा सके। ये लोग तार के नीचे से अवैध तरीके से भारत में घुसे थे। ऐसी ही खबरें तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से भी हैं जहां पर अवैध बांग्लादेशियों को हिरासत में लिया गया है।

अवैध बांग्लादेशियों का नेटवर्क भारत में कितना तगड़ा है, उसके लिए ये खबर देखो… कर्नाटक का मंगलुरु, यहां एक कंस्ट्रक्शन साइट पर 8 बांग्लादेशी पिछले दो महीने से काम कर रहे थे। ये लोग पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से इलिगली भारत की सीमा में घुसे थे। सबसे पहले इन्होंने नकली आधार कार्ड बनवाए और कार्ड पर एड्रेस पश्चिम बंगाल का था। इसके बाद ये लोग सैकड़ों किलोमीटर दूर कर्नाटक पहुंच गए और वहां दिहाड़ी मजदूरी करने लगे। अब इन्हें हिरासत में ले लिया गया है।

ये कोई अकेला मामला नहीं है। पिछले महीने केरल से एक ऐसे बांग्लादेशी मियां-बीबी को अरेस्ट किया गया जो 10 साल से केरल में रह रहे थे। ये लोग प्लास्टिक बोतलों को इकट्ठा करने का काम करते थे और इनके पास भी सारे फर्जी दस्तावेज थे। 

ऐसे ही तमिलनाडु से इसी महीने 50 बांग्लादेशियों को ट्रेन के जरिए पश्चिम बंगाल भेजा गया ताकि उन्हें वापस बांग्लादेश भेजा जा सके। ये लोग तार के नीचे से अवैध तरीके से भारत में घुसे थे। ऐसी ही खबरें तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से भी हैं जहां पर अवैध बांग्लादेशियों को हिरासत में लिया गया है। मतलब साउथ का कोई भी स्टेट ऐसा नहीं है जहां पर ये बांग्लादेशी ना घुसे हों और सभी ने फर्जी कागजात बनवाए हुए हैं। 

एक मामला तो ऐसा है कि आप भी सुनकर चौंक जाएंगे। यूपी के बलिया में एक बांग्लादेशी अब्दुल अमीन को 3 साल की सजा सुनाई गई है क्योंकि इसने फर्जी डॉक्यूमेंट के बेस पर इंडियन पासपोर्ट बनवा लिया और इस पासपोर्ट के सहारे ये आदमी बहरीन और सऊदी अरब भी ट्रैवल करके आ गया और तो और इसने पश्चिम बंगाल में अपने नाम पर जमीन भी ले ली। 2023 में यूपी में इस पर केस दर्ज हुआ और इस साल इसे सजा सुनाई गई। 

ऐसे ना जाने कितने लोग होंगे जो यहां रोजी-रोटी और जमीन पर कब्जा कर चुके होंगे और समस्या ये है कि उनकी पहचान करना भी कोई आसान काम नहीं है।

अब आप सोचकर देखिए कि ये लोग कहां कहां फैले हुए हैं और इनकी जड़ें यहां कितनी मजबूत हैं। इनका एक पैटर्न है। ये लोग पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत में घुसते हैं, कुछ समय वहां पर रहते हैं, अपने फर्जी कागजात बनवाते हैं और फिर साउथ के अलग-अलग स्टेट में फैल जाते हैं और वहां खुद को माइग्रेंट लेबर बताते हैं और लोग इनकी बातों पर भरोसा भी कर लेते हैं। 

इन दिनों पश्चिम बंगाल से हर हफ्ता, दस दिन में ये खबर आती है कि आज इतने बांग्लादेशी डिटेन किए गए या उन्हें वापस भेजा गया  और ये इसलिए हो रहा है क्योंकि वहां डबल इंजन सरकार आई है और वो बांग्लादेशियों को वापस भेजने के लिए प्रतिबद्ध है इसलिए बाकी के स्टेट के साथ भी इस मामले पर ठीक कॉर्डिनेशन हो पा रहा है और वहां से भी ये दीमक अब बाहर निकाले जा रहे हैं।

हालांकि, ये काम अभी शुरू ही हुआ है और अब टाइम आ गया है कि बांग्लादेशियों को बाहर भगाने के साथ-साथ उन लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, जो इन्हें फर्जी दस्तावेज मुहैया करवाते हैं, जो इनके बसने की व्यवस्था भारत में करते हैं।

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