हम सब अपने-अपने घरों की सफाई करते रहते हैं। कोई वीकेंड पर साफ-सफाई करता है, कोई महीने में 1 बार करता है, तो वहीं कुछ तेजस्वी लोग भी होते हैं जो सिर्फ दीपावली के समय साफ-सफाई करते हैं। घर की सफाई करते हुए आप मकड़ी के जाले हटाते हैं, लकड़ियों के आसपास दीमक न आए उसके लिए पेस्टीसाइड छिड़कते हैं। लेकिन इतना तो तय है, कि किसी न किसी समय, हर व्यक्ति अपने घर की साफ़-सफाई करता है।
अब अगर बड़े स्तर पर देखा जाए, तो भारत भी हम सभी देशवासियों का घर ही है। इसलिए इस घर की साफ़-सफाई भी बेहद जरूरी हो जाती है। अच्छी बात यह है कि सरकार यह सफाई कर भी रही है। सरकार भारत-रूपी घर के अलग-अलग कोनों की सफाई अपने तरीके से कर रही है। पूरे देश में इस समय आपको अलग-अलग क्षेत्रों में सफाई दिख रही होगी। इस वीडियो में हम यही जानेंगे कि कैसे सरकार पूरे भारत में ‘ऑपरेशन शुद्धिकरण’ कर रही है।
शुरुआत करते हैं मतदाता सूची यानी वोटर लिस्ट से।
पिछले कुछ दिनों से वोटर लिस्ट का मामला पूरे देशभर में खबरों में रहा है, क्योंकि बिहार में चुनाव आयोग ने Special Intensive Revision यानी SIR की शुरुआत कर दी है, जिसके अंतर्गत फर्जी वोटरों को वोटिंग लिस्ट से बाहर किया जा रहा है। भारत में हर चुनाव के समय फर्जी वोटिंग और डुप्लीकेट नाम पर सवाल उठते रहे हैं। बहुत पहले एक चुटकुला मैंने कहीं सुना था।
किसी गांव में एक बुजुर्ग व्यक्ति रहते थे। वह जब भी वोट देने जाते थे, तो वहां पर जो मतदान अधिकारी होता था उससे यह बोलते थे – “बेटा, चेक करना मेरी बीवी वोट देकर चली गई क्या?” मतदान अधिकारी चेक करके बता देता था कि “हां, वह वोट देकर चली गई है।” ऐसे ही जब यह कई चुनाव तक चलता रहा, तो एक बार उस मतदान अधिकारी ने खीज में आकर यह बोल दिया कि “बार-बार अपनी ही बीवी के बारे में क्यों पूछते हो कि वोट देकर चली गई कि नहीं, जाकर उनसे अपने घर पर ही पूछ लेना।” इस पर उस बुजुर्ग ने जवाब दिया, “नहीं, वह तो 20-25 साल पहले मर चुकी है, पता नहीं हर बार चुनाव के समय जाकर वोट देकर चली जाती है, बताती भी नहीं है।”
हो सकता है कि ये कोई वास्तविक घटना हो, जिसे चुटकुला कहकर सुनाया जा रहा हो, क्योंकि चुनाव के दौरान फर्जी वोटिंग करना भारत में कोई नई बात नहीं है। इसलिए सरकार ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया है कि वोटिंग लिस्ट का शुद्धिकरण हो। कोई भी आदमी न तो फर्जी वोट दे पाए और न ही कोई ऐसा व्यक्ति वोट देने आ जाए जो भारत का नागरिक है ही नहीं। इसलिए आप देख रहे होंगे कि इस शुद्धिकरण के विरुद्ध पूरा विपक्ष एकजुट है कि वोटर लिस्ट में साफ-सफाई क्यों चल रही है। विपक्ष चाहे कितना भी चिल्लाए, चुनाव आयोग और सरकार ने कमर कस ली है और वोटिंग लिस्ट की यह सफाई तो अब पूरे देशभर में होकर रहेगी।
शुद्धिकरण की प्रक्रिया नागरिकता के स्तर पर भी की जा रही है। आपने देखा होगा कि बीते कुछ दिनों में नॉर्थ-ईस्ट के कुछ क्षेत्रों में तथा गुड़गांव और नोएडा जैसे बड़े शहरों में भी उन लोगों को आईडेंटिफाई किया जा रहा है जो भारत में अवैध घुसपैठिए के रूप में आकर बसे हुए हैं। ऑपरेशन पुशबैक के तहत तो ऐसे कई बांग्लादेशी घुसपैठियों को बांग्लादेश में वापस भेज भी दिया गया है।
लेकिन आप इस बात की ओर ध्यान दीजिए कि ‘हम कागज नहीं दिखाएंगे’ कहने वाला जो गिरोह है, वह गिरोह कागज नहीं दिखाने की बात करके कहीं न कहीं इन अवैध घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन वही कहावत है कि ‘बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी?’ भारत को सराय मानकर इसके संसाधनों पर अपना हक जमाने वाले घुसपैठियों के दिन अब लद गए, क्योंकि भारत में नागरिकता के आधार पर सरकार ने शुद्धिकरण शुरू कर दिया है।
केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की योजनाओं के जो लाभार्थी हैं, उनकी लिस्ट में भी एक तरह से शुद्धिकरण का काम चालू है। जब लाभार्थी की बात की जा रही है, तो यह जानना भी जरूरी हो जाता है कि भारत में एक ऐसे प्रधानमंत्री भी हुए थे जिन्होंने यह तक कह दिया था कि केंद्र सरकार जब ₹1 गरीब के पास भेजती है तो गरीबों तक पहुंचते-पहुंचते वह 1 रुपया सिर्फ 15 पैसे रह जाता है। और मैं आपको बिल्कुल नहीं बताऊंगा कि वह प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे।
बहरहाल इस सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि अगर ₹1 सरकार की तरफ से गरीब को भेजे जाते हैं तो गरीब के खाते में पूरे ₹1 पहुँचे। हालाँकि इसके बावजूद बीते दिनों में आपने कई ऐसी खबरें देखी होंगी कि लाडली बहन योजना में कुछ लाडले भाइयों ने भी फर्जीवाड़ा करके पैसे उठाए हैं। अब उन लाडलों को चिन्हित किया जा रहा है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सरकारी योजनाओं का फायदा सीधे उन लोगों तक पहुंचे, जिनके लिए वह स्कीम शुरू की गई है। इसके लिए सरकार अपनी स्कीम्स के इम्प्लीमेंटेशन में [Aadhaar Redacted] बायोमैट्रिक जैसी चीजें भी इंट्रोड्यूस कर रही है, ताकि सरकारी संसाधनों के लीकेज को रोका जा सके।
सरकार की तरफ से जो शुद्धिकरण चल रहा है, वह सिर्फ योजनाओं और नागरिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि वह फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में भी उतना ही दिख रहा है। सरकार एक तरह से अवैध संपत्तियों को चिन्हित करके उनके पुनर्वितरण की तरफ भी काम कर रही है। बीते कुछ महीनों से लगातार अवैध बाजारों को, अवैध झुग्गियों को टारगेट करके उन्हें समतल किया जा रहा है।
ऑपरेशन शुद्धिकरण का एक पहलू हमें NGOs के ऊपर भी दिख रहा है। वर्षों तक कई विदेशी NGOs ने दूसरे देशों के एजेंडे को भारत में फैलाया है। ये NGOs भारत में रहकर दूसरे देशों की तरफ से वर्क फ्रॉम होम करते थे। ये NGOs भारत ‘में’ काम जरूर करते थे, लेकिन भारत ‘के लिए’ काम नहीं करते थे। ग्रीनपीस जैसी अनेक संस्थाएं थीं जो पर्यावरण बचाने के नाम पर भारत में विकास के कार्यों को रोकने का काम करती थीं।
लेकिन सरकार अब इन NGOs को आईडेंटिफाई करके इन्हें जड़ से खत्म कर रही है। पिछले एक दशक में 20,000 से भी अधिक NGOs के लाइसेंस रद्द किए गए हैं। भारत में काम कर रहे इन NGOs को विदेश से फंडिंग आती थी, जिसका इस्तेमाल भारत में अस्थिरता फैलाने में किया जाता था। घर की सफाई करते वक्त जिस पेस्टीसाइड के छिड़कने की मैंने बात की थी, इन NGOs को सरकार वैसे ही ट्रीट कर रही है। सरकार ने NGOs के शुद्धिकरण से यह संदेश दे दिया है कि भारत में रहकर मानवाधिकार और पर्यावरण अधिकार के नाम पर भारत के विकास को रोकने का एजेंडा अब नहीं चलेगा।
जिस तरह से भारत का यह शुद्धिकरण अलग-अलग क्षेत्रों में चल रहा है, उसे केवल प्रशासनिक प्रक्रिया की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। आज सरकार वही कर रही है, जो हर घर के लोग करते हैं—अपने घर को साफ रखना, हर जाले को हटाना, हर दीमक को खत्म करना।
इसलिए जब सरकार यह सफाई कर रही है, तो ऐसे में जो लोग फर्जी वोटिंग, अवैध नागरिकता, और विदेशी एजेंडे पर पलने वाली NGOs के पक्ष में खड़े हैं, वे दरअसल उस गंदगी के रक्षक हैं। ऐसे जाहिलों को पहचानने की जरूरत है। ये लोग घर के भेदी हैं।
ऐसे लोगों की आँखों में आँखें डालकर यह कहने की जरूरत है कि भारत अब कोई ‘सराय’ नहीं है, जहाँ कोई भी आ जाए। यह वह भारत है, जो अपनी सीमाओं की तरह अपने समाज, अपनी योजनाओं और अपनी आत्मा की भी सुरक्षा कर रहा है। भारत ने तय कर लिया है कि कोई दीमक, कोई जाला, कोई गंदगी, अब इस घर की दीवारों पर नहीं रहेगी। यह सफाई नहीं, यह एक राष्ट्र के रूप में भारत का शुद्धिकरण हो रहा है।





