जंतर-मंतर पर आंदोलनों के दौरान कई तरह के रंग देखने को मिलते हैं, लेकिन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन में जो कुछ कैमरे में कैद हुआ, उसने हंसी और हैरत दोनों को एक साथ दावत दे दी। ऑपइंडिया के रिपोर्टर अनुराग मिश्रा जब भीड़ के बीच घूम रहे थे, तब उनकी मुलाकात प्रदर्शन में शामिल प्रशांत राणा नाम के एक शख्स से हुई। हाथ में एक मोटी सी किताब थामे प्रशांत खुद को गंभीर क्रांतिकारी दिखाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन जब पत्रकार ने उनसे बातचीत शुरू की, तो वह बातचीत बेहद अजीब और दिलचस्प बहस में तब्दील हो गई।
‘यह तो 2026 की कोरी डायरी है…’ – ‘नहीं, यह मेरा संविधान है’
रिपोर्टर अनुराग मिश्रा ने जब प्रशांत राणा के हाथ में मौजूद चीज़ पर नजर डाली और पूछा कि भाई साहब, हाथ में क्या है? तो प्रशांत ने बड़े गर्व से जवाब दिया, ‘यह इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन (भारतीय संविधान) है।‘
हैरान रिपोर्टर ने जब उसे थोड़ा करीब से देखा, तो असलियत सामने आ गई। वह कोई भारत का संविधान नहीं, बल्कि साल 2026 की एक बिल्कुल ब्लैंक (कोरी) डायरी थी। जब रिपोर्टर ने टोका कि यह तो कोरी डायरी है, तो प्रशांत ने दार्शनिक अंदाज अपनाते हुए कहा:
“यह मेरी अंतरात्मा का संविधान है! इसमें मैंने अपनी तरफ से कुछ आर्टिकल्स (अनुच्छेद) लिखे हैं।”
जब पूछे गए संविधान के अनुच्छेद, तो अटकी सांसें
बात यहीं नहीं रुकी। रिपोर्टर ने जब प्रशांत राणा से पूछा कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित भारत के असली संविधान में कितने अनुच्छेद हैं और आपकी इस ‘अंतरात्मा वाले संविधान’ में कितने हैं? तो प्रशांत ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि संविधान में केवल 15 आर्टिकल्स हैं!
जब पत्रकार ने उनसे उनकी डायरी के पन्ने पलटने और लिखे हुए आर्टिकल्स को कैमरे पर दिखाने का अनुरोध किया, तो प्रशांत राणा ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने दावा किया कि इस कोरी डायरी में उनकी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का भविष्य का गुप्त विजन (Vision) लिखा हुआ है, जिसे वो लीक नहीं कर सकते।
‘चौथा स्तंभ’ और असली संविधान की चुनौती
अपनी ही बातों के जाल में फंसने के बाद प्रशांत राणा ने खीझ मिटाने के लिए हमेशा की तरह मीडिया को निशाने पर लिया और पत्रकार को ‘गोदी मीडिया’ कहना शुरू कर दिया। उन्होंने ज्ञान बांटते हुए कहा कि मीडिया संविधान का ‘चौथा स्तंभ’ है और यह बात बकायदा संविधान में लिखी हुई है।
इस पर रिपोर्टर अनुराग मिश्रा ने उन्हें कैमरे के सामने खुली चुनौती दे दी कि वे असली संविधान की कोई भी ऐसी कॉपी या क्लॉज दिखा दें, जहां मीडिया को ‘चौथा स्तंभ’ लिखा गया हो (क्योंकि यह एक व्यावहारिक मुहावरा है, संविधान का लिखित हिस्सा नहीं)। इस चुनौती पर प्रशांत राणा पूरी तरह निरुत्तर हो गए और बगलें झांकने लगे।
कोरे दावों की तरह कोरी निकली डायरी
जंतर-मंतर का यह वाकया सोशल मीडिया पर वायरल है और यह साफ दिखाता है कि CJP के इस तथाकथित आंदोलन की जमीनी तैयारी कितनी खोखली थी। देश के सबसे बड़े और गंभीर परीक्षा विवाद (NEET) पर प्रदर्शन करने निकले इन ‘क्रांतिकारियों’ को न तो देश के संविधान की बुनियादी जानकारी थी और न ही अपने आंदोलन के उद्देश्यों की। हाथ में 2026 की कोरी डायरी लेकर घूम रहे प्रशांत राणा जैसे प्रदर्शनकारी दरअसल इस पूरी पार्टी के खोखलेपन और सतही ज्ञान का जीता-जागता विज्ञापन बन गए।



