आज नोएडा से कमर्शियल फ्लाइट्स शुरू हो गई हैं और पहली फ्लाइट ही काफ़ी अनयूजुअल रही। अब तक आपने देखा होगा कि पहली फ्लाइट्स में बड़े बड़े इन्फ़्लुएंसर्स, सेलिब्रिटीज और पत्रकार ट्रैवल किया करते थे, उनका वाटर कैनन से स्वागत हुआ करता था।
लेकिन नोएडा एयरपोर्ट से उड़ी पहली फ्लाइट में वो किसान बैठे, जिन्होंने इसके लिए अपनी ज़मीन दी। 172 ऐसे किसान इस पहली फ्लाइट से लखनऊ गए और सीएम योगी आदित्यनाथ से मिले, इनमें से कई किसान तो ऐसे थे, जिन्होंने पहले कभी हवाई सफ़र नहीं किया था।
किसानों के साथ उनके घरों की महिलाएँ भी थीं। धोती कुर्ता और पगड़ी पहनने वाले किसानों ने अपने सामने ये विटनेस किया कि उनका योगदान कितना बड़ा बदलाव ला रहा है। यानी उत्तर प्रदेश की इस विकास की यात्रा में योगी सरकार ने उन लोगों को स्टेकहोल्डर बनाया, जिनकों अपनी उपजाऊ ज़मीन छोड़नी पड़ी थी।
इस पूरे वाकये से मुझे याद आया कि आज से कुछ साल पहले तक इसी नोएडा में भट्टा पारसौल जैसे किसान आंदोलन हुआ करते थे, जहाँ अपनी ज़मीन के ठीक पैसे तक लेने के लिए किसान प्रदर्शन पर मजबूर होते थे, उनके ऊपर गोलियाँ चलती थीं। राहुल गांधी जैसे नेता यहाँ से अपना कैरियर सेट करने की सोचते थे।
एक्टिविस्ट उनके सहारे विदेशी फंड के जुगाड़ में रहते थे और विकास को लेकर हॉस्टिलिटी का माहौल रहता था। ये वही नोएडा है जहाँ अखिलेश यादव मुख्यमंत्री रहते हुए कदम नहीं रखते थे तो भला इन किसानों से मिलना तो दूर की बात थी।
लेकिन अब योगी सरकार में ये किसान यूपी और देश की विकास यात्रा का हिस्सा हैं, और पीएम मोदी की उस बात को चरितार्थ कर रहे हैं कि हवाई चप्पल वाला भी हवाई सफ़र करेगा।


