भारत के रूस से तेल खरीदने पर किलसा अमेरिका कभी कुछ दावा करता है तो कभी अपनी ही बात से पलट जाता है। राष्ट्रपति ट्रंप कहीं भारत को डेड इकॉनमी बताते हैं तो दूसरी तरफ उनका चेला कहता है कि रूस का युद्ध भारत ही तो फंड कर रहा है।
अमेरिका का विदेश मंत्री बोलता है कि भारत रूस से तेल खरीद कर यूरोप को नहीं बेच रहा तो ट्रंप का चेला बताता है कि यूरोप को बेचे हुए तेल के पैसे से ही तो भारत में अरबपति अमीर हो रहे।
इस कन्फ्यूजन की स्थिति के चलते भारत पर अमेरिका का दोहरा स्टैण्डर्ड सबके सामने आ गया है।
हम आपको समझाते हैं कि असल में ये मेगा कन्फ्यूजन है क्या।
हाल ही में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बोला कि ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50% का टैरिफ इसलिए लगाया गया है क्योंकि वह रूस का तेल खरीद कर यूरोप को नहीं बेचता।
रुबियो ने बताया कि चीन इसके उलट रूस से तेल खरीद कर यूरोप को बेच देता है, इसलिए उस पर इण्डिया वाला 50% टैरिफ हम नहीं ठोक रहे।
लेकिन रुबियो को अपना डेटा और GK दोनों अपडेट करने की जरूरत है…
मार्को रुबियो के दावे के उलट भारत पिछले 3 सालों में लगभग 40 बिलियन डॉलर से ज्यादा का तेल यूरोप को बेच चुका है।
और सीधे तौर पर यह इसलिए बढ़ा है क्योंकि भारत ने सस्ता कच्चा तेल रूस से खरीदा। इस कच्चे तेल को भारत की रिफायनरी ने प्रोडक्ट में बदला और यूरोप को बेच दिया।
हाँ, इसका कुछ हिस्सा भारतीय ग्राहकों के काम भी आया होगा। लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारत ने यूरोप को बड़ी मात्रा में तेल बेचा है।
ऐसे में रुबियो का फैक्ट चेक हो गया।
यहाँ तक कि एक रिपोर्ट कहती है कि भारत का यूरोप को तेल निर्यात ढाई लाख प्रतिशत तक बढ़ा है। लेकिन मार्को रुबियो को लगता है कि भारत यूरोप को तेल नहीं बेच रहा।
असल में मार्को रुबियो जानबूझ कर अनजान बन रहे हैं, क्योंकि उन्हीं के साथ काम करने वाले ट्रंप के खासमख़ास पीटर नवारो तो रो ही इसी बात पर रहे हैं कि भारत रूसी तेल बेच कर पैसा कमा रहा है।
पीटर नवारो ने भारत के खिलाफ हर तीसरे दिन प्रोपेगेंडा करने वाले फाइनेंसियल टाइम्स में एक आर्टिकल लिख कर रोना रोया कि भारत अमेरिका से पैसे कमाता है और रूस की युद्ध मशीन चलाता है।
पीटर नवारो ने कहा कि अमेरिका को भारत बड़ी मात्रा में सामान बेचता है, इससे वह डॉलर कमाता है और फिर इन पैसों से वह रूस से 15 लाख बैरल तेल रोज लेता है।
ट्रंप प्रशासन में शामिल दो लोग अलग-अलग दावे कर रहे हैं। ऐसे में समझा जा सकता है कि उनकी नीतियों का हाल क्या होगा और क्यों उनकी खोखली धमकियों को मोदी सरकार गंभीरता से नहीं ले रही।
मोदी सरकार का रुख एकदम स्पष्ट है। उनका साफ़ कहना है कि जहाँ से भी हमारे देश के लोगों के हित सुरक्षित होंगे, हम वहाँ से तेल खरीदेंगे।
भारत ऐसा कर भी रहा है, यहाँ तक कि ट्रंप कि कलाबाजियों के बाद अगस्त 2025 में रूस से तेल खरीद और तेज हो गई है।
अगस्त में भारत ने रूस से 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा।
एक और रिपोर्ट ने बताया कि जब रूस ने तेल के दाम घटाए तो सरकारी कम्पनी ने तेल खरीद बढ़ा दी।
अमेरिका को ये समझना पड़ेगा कि भारत कोई यूरोप का देश नहीं है जो एक धमकी के बाद स्कूल टीचर्स की तरह आकर ट्रंप के सामने पेश हो जाएगा।
भारत अपनी स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी हमेशा बनाए रखेगा और इसके लिए वह अमेरिका ही नहीं किसी भी शक्ति से टकराने में पीछे नहीं हटेगा।



