एक तरफ बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं, और दूसरी तरफ हमारे ही देश की एक बड़ी नेता कहती हैं कि ‘मैं नाम नहीं लूंगी, नहीं तो बांग्लादेशी नाराज हो जाएंगे’… चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी अब अपना मानसिक संतुलन खो चुकी हैं और BJP से बदला लेने के चक्कर में वह अब सीधे देश के खिलाफ जाने को तैयार हैं। ममता बनर्जी ने एक ऐसा बयान दे डाला है जो सीधे-सीधे भारत विरोधी है। इस बयान ने बांग्लादेशी जिहादियों को एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगलने का खुला मौका दे दिया है।
कोलकाता के धर्मतला में Y Channel पर एक धरना प्रदर्शन चल रहा था। वहीं खड़े होकर ममता बनर्जी ने भारत के खिलाफ नफरत फैलाने वाले जिहादी उस्मान हादी की हत्या का ठीकरा सीधे भारत सरकार के सिर फोड़ दिया। सीधे गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए ममता बोलीं, ‘मुझे सबकुछ पता है कि इस मर्डर को अंजाम देने के लिए आपने किसका इस्तेमाल किया था।’
‘अमित शाह ने मुझे फोन किया था’ – ममता का दावा
ममता ने मंच से दावा किया कि बांग्लादेश में एक बड़ी हत्या करने के बाद हत्यारे मेघालय के रास्ते पश्चिम बंगाल में घुसे थे, जहां STF ने उन्हें दबोच लिया था। लेकिन, होम मिनिस्टर अमित शाह ने उन्हें (ममता को) फोन करके कहा था कि इस गिरफ्तारी की खबर बाहर नहीं आनी चाहिए, क्योंकि यह देशहित में नहीं होगा।
ममता का कहना है, ‘मैंने इस मामले में आज तक कुछ नहीं कहा, लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है, इसलिए अब मैं मुंह खोल रही हूं। मैं यहां किसी का नाम नहीं लूंगी, क्योंकि ऐसा करने से बांग्लादेश के लोग गुस्सा हो जाएंगे।’
यहां एक बड़ा सवाल उठता है: क्या ममता बनर्जी यहां साफ-साफ यह जताने की कोशिश कर रही हैं कि अगर उन्होंने नाम ले लिया, तो बांग्लादेश के जिहादी भड़क जाएंगे और वहां फिर से मासूम हिंदुओं पर हमले शुरू कर देंगे?
बांग्लादेशी जिहादियों की आई मौज, अपने ही देश से ‘गद्दारी’?
ममता के इस बयान के आते ही बांग्लादेश के जिहादियों की तो लॉटरी लग गई। उन्होंने तुरंत भारत के खिलाफ जमकर जहर उगलना शुरू कर दिया। अब सोचिए, जिस उस्मान हादी के मर्डर के लिए उसके सगे भाई ने मोहम्मद यूनुस की सरकार को जिम्मेदार ठहराया था, उसी मर्डर के लिए भारत के एक राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री अपने ही देश को कटघरे में खड़ा कर रही हैं। यह खुलेआम देश के साथ गद्दारी नहीं तो और क्या है?
इस पूरे ड्रामे में दो बेहद गंभीर बातें हैं: पहली बात, ममता बनर्जी ने जो भी बेबुनियाद आरोप लगाए हैं, उनका दूर-दूर तक कोई सबूत नहीं है। दूसरी बात, अगर इस बात में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो क्या सरेआम मंचों से ऐसे सेंसिटिव मामलों पर बयानबाजी करना सही है? अपनी अंदरूनी राजनीतिक लड़ाई में कोई इतना आगे कैसे बढ़ सकता है कि एक पार्टी का विरोध करते-करते वह देश का ही विरोध करने लग जाए?
हार ने बनाया और खतरनाक, क्या दर्ज होगा केस?
चुनावी हार ने ममता बनर्जी को और भी ज्यादा खतरनाक बना दिया है। जिहादियों के लिए उनकी हमदर्दी अब खुलकर सामने आ रही है। वह अब खुले मंचों से देश के खिलाफ जहर उगल रही हैं, यहां तक कि वह हिंदू धर्म को ‘गंदा धर्म’ तक कह चुकी हैं।
अब जनता पूछ रही है कि क्या चुनाव हारने के बाद भी ममता बनर्जी सुधरने का नाम नहीं लेंगी? क्या वह भी अब राहुल गांधी और कांग्रेस के रास्ते पर चल पड़ी हैं, जहां हार का भी जश्न मनाया जाता है?
TMC के इस जिहादी सिंडिकेट की बुरी तरह हार के बाद बंगाल में BJP और TMC के बीच का पॉलिटिकल वॉर और तेज हो गया है। एक तरफ जहां बंगाल की जनता TMC के गुंडों को सबक सिखा रही है, वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी बौखलाकर देश को बदनाम करने वाले बयान दे रही हैं।
ऐसे देशविरोधी बयानों के लिए ममता बनर्जी के ऊपर तुरंत मुकदमा दर्ज होना चाहिए। क्योंकि ऐसे बयानों से न सिर्फ देश की इमेज खराब होती है, बल्कि देश के दुश्मनों को हमारे ही खिलाफ भौंकने का मौका मिल जाता है।





