अगर ‘कुछ भी बोलकर माफ़ी मांगने’ का कोई गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड इनाम होता, तो हमारे कांग्रेस के ‘अधेड़ युवा’ नेता राहुल गांधी जी उसमें टॉप कर रहे होते। नहीं, मैं मज़ाक नहीं कर रही, ये फैक्ट के आधार पर ही बोल रही हूँ।
साल 2018 में राहुल जी ने मध्य प्रदेश के झाबुआ में एक चुनावी रैली में ‘पनामा पेपर्स लीक’ का नाम लेकर शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय पर Allegations लगा दिए थे। कार्तिकेय चौहान सीधे कोर्ट पहुंच गए और राहुल जी पर मानहानि का केस लग गया।
अब जब कोर्ट ने समन भेजा और खुद पेश होने को कहा, तो राहुल जी ने लिखित में ‘सॉरी’ बोल दिया। कोर्ट में क्या दलील दी? बोले, ’अरे, वो बयान कार्तिकेय के लिए नहीं, छत्तीसगढ़ के रमन सिंह के बेटे के लिए था, गलती से नाम ले लिया।’ Excuse me? गलती से नाम? Is this अधेड़ युवा नेता Serious in his life?
राहुल गांधी जी को ये समझना बहुत ज़रूरी है कि लोकतंत्र की हत्या ऐसे न करें जनाब। मतलब आपकी दादी ने Emergency लगायी थी, तो इसका मतलब ये थोड़ी न है कि डेमोक्रेसी की हत्या करने का हक आपकी Legacy में है और आप उसका Exploitation करते ही जाएँ।
आप स्टेज पर चढ़कर माइक पकड़ते हो, बिना किसी Proof के किसी की भी सोशल रेप्युटेशन खराब कर देते हो, और जब कोर्ट का डंडा चलता है, तो कहते हो ‘ओह, my bad! गलती से इधर का उधर बोल दिया।’ क्या आपके माफ़ी मांग लेने से वो Damage Control हो जाता है? मतलब राहुल गांधी ने मिसइंफ़ॉर्मेशन और डिफ़ेमेशन को ही अपनी पॉलिटिकल फ़िलोसोफ़ी बना लिया है।
अभी तो और दोगलापन देखिए राहुल जी का। यही राहुल गांधी और इनकी पूरी टीम आए दिन वीर सावरकर को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ती। इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स तक पर जाकर वीर सावरकर के संघर्ष को डिफेम किया जाता है, उन्हें ‘माफ़ीवीर’ कहा जाता है। भाई, वो सावरकर थे जिन्होंने अंडमान की सेलुलर जेल में वो टॉर्चर झेला जो आज की जनरेशन सोच भी नहीं सकती। देश के लिए वो किया जो कभी राहुल गांधी के दिमाग़ में आएगा भी नहीं।
जो इंसान खुद हर दूसरे केस में कोर्ट में माफ़ी मांगकर बचता है, वो देश के एक फ्रीडम फाइटर के योगदान को देशद्रोह बताता है। और हाँ, वो जो आए दिन इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स पर जाकर भारत की डेमोक्रेसी को बदनाम किया जाता है, उसका क्या?






