कांग्रेस को इस देश का ‘मिडल क्लास’ क्यों पसंद नहीं करता, इसका एक जवाब मुझे कल मिला। मैं बात कर रही हूँ दिल्ली और कर्नाटक की सरकारों की प्राथमिकता के बारे में। दरअसल, कल यानी 29 जून को दिल्ली सरकार ने अपनी नई ‘ईवी पॉलिसी’ (EV Policy) घोषित की।
यह शायद देश में लाई गई अब तक की सभी ‘ईवी पॉलिसीज’ में सबसे ‘प्रोग्रेसिव’ (Progressive) है। इसमें टू-व्हीलर के लिए 30 हज़ार रुपये की सब्सिडी, थ्री-व्हीलर के लिए 50 हज़ार रुपये की सब्सिडी, ट्रक्स के लिए 1 लाख रुपये की सब्सिडी और नई ‘ईवी कार्स’ (EV Cars) के लिए ‘रोड टैक्स’ (Road Tax) माफ करने जैसे कई सारे कदम उठाए गए हैं।
यह भी कहा गया है कि अगर कोई अपना पुराना पेट्रोल या डीजल वाहन ‘स्क्रैप’ (Scrap) करके ‘ईवी’ (EV) पर स्विच करेगा, तो उसे 1 लाख रुपये का लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर पूरी तरह इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि लोग ‘ईवी’ पर स्विच कर जाएं और ‘एनवायरमेंट प्रोटेक्शन’ (Environment Protection) के साथ ही पेट्रोल-डीजल की खपत कम हो।
लेकिन इसके ठीक उलट भारत के सबसे आधुनिक कहे जाने वाले शहर बैंगलोर वाले राज्य में ‘ईवी’ को दिए जाने वाले लाभ वापस ले लिए गए हैं। यानी अप्रैल 2026 में कर्नाटक सरकार ने ‘ईवी’ को ‘रोड टैक्स’ में दिए जाने वाले लाभों को वापस (Roll back) ले लिया था।
‘टियागो’ और ‘कॉमेट’ जैसी छोटी ‘ईवी’ तक पर यहाँ 5% का टैक्स लगा दिया गया है और ‘नेक्सॉन ईवी’ (Nexon EV) जैसी गाड़ियों पर 8% का। यानी अगर कोई 11 लाख की ‘ईवी’ ले रहा होगा, तो उसे लगभग एक लाख रुपये अब ‘रोड टैक्स’ में देने ही पड़ेंगे। वहीं ‘एक्सयूवी 9ईवी’ (XUV 9EV) जैसी गाड़ियों के कुछ मॉडल्स पर तो अब कोई टैक्स लाभ मिलेगा ही नहीं।
और यह सब इसलिए किया गया ताकि कुछ सौ करोड़ रुपये टैक्स के कमाए जा सकें। यानी सारे ‘एनवायरमेंटल गोल्स’ (Environmental Goals) और ‘एनर्जी ट्रांजिशन’ (Energy Transition) को ‘शॉर्ट टर्म’ (Short Term) फायदे के लिए बलि चढ़ा दिया गया। और मुझे यह याद दिलाने की ज़रूरत नहीं है कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है, जो दिन भर निकोबार जैसे प्रोजेक्ट्स पर आँसू बहाती है।
यानी जहाँ एक तरफ दिल्ली ‘ग्रीन ट्रांजिशन’ (Green Transition) की तरफ जा रही है, तो कांग्रेस उसे कर्नाटक में ‘पेनलाइज’ (Penalise) कर रही है।




