पश्चिम बंगाल में 1200 दुकानें जलकर ख़ाक हो गईं। फ़ायर ब्रिगेड दो घंटे बाद आई, आई तो बिना पानी के आई। हज़ारों लोग अपना सब कुछ बर्बाद हो जाने के शोक में डूबे थे, तभी ममता बनर्जी अवतरित हुईं। हाथों में माइक लेकर बंगाल की ये ममतामयी माँ दुकानदारों को डाँटने लगीं। कहती हैं, “आग हमने नहीं, तुम्हारे कर्मों ने लगाई है। हम सरकार हैं, हमारा काम हमें मत सिखाओ।”
दूसरी तरफ़ दुकानदारों का आरोप है कि मुस्लिम बहुल इलाक़े में ये इकलौती हिन्दू बहुल मार्केट थी, जिसे अब जला दिया गया है। उनका कहना है कि अब दशकों पुरानी दुकान से उनको बेदख़ल कर ये सब डेवलपमेंट के नाम पर कलीम ग्रुप को दे दिया जाएगा।
यदि आरोप सच हैं तो मामला गंभीर है। लेकिन, मुस्लिम वोट बैंक से सत्ता में आई ममता के आगे हिन्दू बेबस हैं। उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।
एक जवान लड़की डॉक्टर बनने जाती है, तो उसे अस्पताल में मार दिया जाता है। न्याय के लिए भूखे-प्यासे बैठे स्टूडेंट्स को धमकाया जाता है। टीएमसी का मुसलमान नेता शहज़ान शेख जब कई वर्षों तक हिन्दू महिलाओं और बेटियों का यौन उत्पीड़न करता है, तो उसे बचाया जाता है। चुनाव जीतने के लिए पूरे पश्चिम बंगाल की सड़कों और नालियों को खून से लाल कर दिया जाता है। और ऐसे हज़ारों केस हैं, जहाँ ममता की तानाशाही के आगे आम बंगाली बेबस और लाचार रह जाता है।
लेकिन ममता जी ध्यान रहे, आज कलीम ग्रुप के नाम की आग फैली है, कल पूरा सिंडिकेट धू-धू करके जलेगा। अपनी झुँझलाहट बचा कर रखिए — चुनावों के समय “कठोर” फ़ैसले लेने के काम आएगी।





