उत्तराखंड के नाम पर अगर दिल्ली में बैठा मीडिया का एक गिरोह अचानक रोना-धोना शुरू कर दे तो बिल्कुल भी चौंकना मत क्योंकि देवभूमि से एक बहुत बड़ा डेटा सामने आया है।
क्या है वो डेटा बताता हूं। उत्तराखंड इलेक्शन कमीशन ने SIR का पहला ड्राफ्ट जारी कर दिया है और इसमें से 8,26,977 नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए हैं।
लेकिन कहानी में ट्विस्ट ये है कि सबसे ज्यादा नाम 4 जिलों से हटाए गए हैं और ये वो जिले हैं, जहां पर मुस्लिमों की आबादी पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से बढ़ी है।
पहला जिला है देहरादून, यहां से 1,86,008 नाम वोटर लिस्ट से बाहर हुए हैं और यहां पर मुस्लिमों की आबादी है लगभग 12%। दूसरा जिला है ऊधम सिंह नगर, यहां से 1,77,673 नाम हटाए गए हैं। यहां मुस्लिम पॉपुलेशन है 22.58%। इसके बाद आता है हरिद्वार का नंबर, यहां से 1,30,203 नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं और यहां मुस्लिम हैं 34.28%। चौथे पर आता है नैनीताल, यहां वोटर लिस्ट से 71,810 नाम गायब और यहां मुस्लिम आबादी लगभग 12% है।
बीते कुछ सालों में मुस्लिम आबादी पूरे उत्तराखंड में बढ़ी है, इवन पहाड़ों में जहाँ एक मुस्लिम तक नहीं दिखता था वहाँ अब मस्जिदें बन रही हैं और इमाम बिहार से लाए जा रहे हैं, ये बातें हैं जो किसी से भी छुपी हुई नहीं है लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि SIR के बाद जो ये सारे नाम कटे हैं वो किसी एक ही समुदाय के हैं। मगर इतना जरूर साफ है कि सबसे ज्यादा चेकिंग वहीं हुई है, जहां की आबादी सबसे ज्यादा मूविंग और मिक्स थी और नाम हटने के भी 4 अलग-अलग कारण हैं। Absent, Shifted, Dead और Duplicate।
अब वैसे तो देश में एक तबका है जो SIR का विरोध कर रहा है लेकिन हर स्टेट से डेटा हमारे सामने आ रहा है और हर कोई यही चाहता भी है कि वैध नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में हो और कोई अवैध या फर्जी नाम इसमें न रहे क्योंकि ये निष्पक्ष चुनाव और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों के लिए बेहद जरूरी है।






