अगर मैं आपसे एक सवाल पूछूँ कि कांग्रेस की ऐसी कौन सी एक चीज़ है जो इसकी स्थापना से लेकर आज तक एक जैसी रही है, तो शायद आपके दिमाग़ में आएगा कि गांधी परिवार की चापलूसी। लेकिन ऐसा नहीं है। फिर हो सकता है आपके दिमाग़ में भ्रष्टाचार आए, तो वह भी नहीं। असल में वह एक चीज़ है जो आपके दिमाग़ में कभी आई ही नहीं, और वह है, सत्ता की नब्ज़ को अपने हिसाब से ढाल लेना या किसी भी राजनीतिक परिस्थिति को अपने लिए इस्तेमाल करना। और मेरे पास ऐसा कहने के तीन मुख्य कारण हैं:
पहला यह कि वे किसी भी परिस्थिति को गहराई से Observe करते हैं।
दूसरा यह कि वे Future Threats को पहले से Anticipate कर लेते हैं। कब, कहाँ क्या ख़तरा आने वाला है, उन्हें इसकी पूरी समझ होती है।
तीसरा यह कि कांग्रेस सही समय पर Corrective Actions लेना जानती है।
और इस सबके बीच अगर आपको लगता है कि कांग्रेस मूर्ख है, तो आप बेहद ग़लत हैं। इस पार्टी ने आज़ादी से पहले भी देश को चलाया, और आज़ादी के बाद भी। यानी सौ साल से ज़्यादा समय से यह पार्टी देश की सत्ता का मज़ा ले रही है। और यह कोई संयोग नहीं है, यह तो कला है, राजनीति करने की कला।
वर्तमान परिदृश्य और CJP
अब देखिए आज क्या हो रहा है। CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) ने Gen-Z को सड़क पर उतारा। जंतर-मंतर पर तंबू गाड़ दिए और कई दिनों तक डेरा डाला। पेपर लीक का मुद्दा उठाया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का श्रेय ले लिया। लोगों ने तालियाँ बजाईं कि कमाल हो गया, नई क्रांति आ गई। और अब तो इसी गति से आने वाले दो साल में BJP को हरा देंगे, ऐसी घोषणाएँ भी हो रही हैं। लेकिन जंतर-मंतर पर क्रांति ख़त्म होते ही खेल शुरू हुआ।
CJP के नेता सौरभ दास, टिकटॉक वाला रांका और अभिजीत दीपके पार्टी करने निकल गए। सेलिब्रेशन मोड में चले गए और एक लग्ज़री होटल में जश्न मनाया। और पीछे छोड़ गए उन सैकड़ों स्टूडेंट्स को, जो गर्मी में, धूप में और रात-रात भर जंतर-मंतर पर पड़े रहे। उनके लिए न खाना था, न पानी और न ही घर लौटने का टिकट। उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया।
कांग्रेस की दोतरफा रणनीति और नैरेटिव का खेल
और तभी मैदान में उतरे कांग्रेस के लोग। आप NewsLaundry के मेघनाद का वह वीडियो देखिए और फिर यूथ कांग्रेस के ये पोस्ट देखिए। मेघनाद जैसे लोग, जो CJP को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे थे, अब चतुराई से उसी CJP को दोषी ठहरा रहे हैं। वह वीडियो यह संदेश दे रहा है कि CJP ने अपना काम निकलने के बाद स्टूडेंट्स को छोड़ दिया, और अब Youth Congress उनके खाने-पीने, रहने और ट्रेन के टिकट का इंतज़ाम कर रही है।
सोशल मीडिया पर यह नैरेटिव ज़ोर-शोर से चलाया जा रहा है। स्टूडेंट्स को घर भेजने का श्रेय लिया जा रहा है। एक तरफ कपिल सिब्बल, सीनियर एडवोकेट और पूर्व केंद्रीय मंत्री, जाकर CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके से मिल रहे हैं। प्रोटेस्टर्स पर दर्ज मुक़दमों के लिए एक करोड़ रुपये के Legal Fund की घोषणा कर रहे हैं। प्रेस कॉन्फ़्रेंस हो रही है और लीगल हेल्प का पूरा इंतज़ाम भी कर दिया गया है। यानी दोतरफा खेल।
एक तरफ कोर्ट में और मीडिया में CJP के साथ खड़े दिखो कि साहब ‘हम युवाओं के साथ हैं, न्याय के साथ हैं।’ दूसरी तरफ उन्हीं युवाओं को यह संदेश दो कि CJP ने तुम्हें छोड़ दिया, और हमने तुम्हें बचाया।
कांग्रेस की असुरक्षा और राजनीतिक अस्तित्व
लेकिन कांग्रेस ऐसा कर क्यों रही है? क्योंकि कांग्रेस जानती है कि अगर CJP सच में बड़ी हो गई और Gen-Z ने इसे असली विकल्प मान लिया, तो जनता इसे कांग्रेस का सीधा विकल्प समझने लगेगी। आपको याद होगा, जब सबका ध्यान जंतर-मंतर पर था, तब राहुल गांधी कैसे असुरक्षित महसूस करके सीधे Prime Minister के आवास के आगे धरने पर बैठ गए और मीडिया में अपनी वापसी की कोशिश की? क्यों? क्योंकि उन्हें लगा कि CJP के इस प्रोटेस्ट ने कांग्रेस को भुलाने में मदद की है, और कांग्रेस अपनी मौजूदगी कभी ख़त्म नहीं होने देती, कभी भी नहीं, आज़ादी से पहले भी नहीं और आज़ादी के बाद भी नहीं।
1857 से लेकर आज तक
यह कोई नई ट्रिक नहीं है, यह सौ साल पुरानी कला है। 1857 की क्रांति हुई, देश जल रहा था और अंग्रेज़ परेशान हो रहे थे। फिर कांग्रेस बनी, नरमपंथी, गरमपंथी, याचिका, ज्ञापन और संवैधानिक रास्ता। तरह-तरह की शब्दावली से काम चलता गया। और इसका नतीजा क्या हुआ? अंग्रेज़ों को इस देश में टिके रहने के लिए नब्बे साल और मिल गए। कांग्रेस अराजकता और साम्राज्य के बीच का कुशन बन गई। क्रांति को धीरे-धीरे ‘गैर-जिम्मेदार’ बता दिया गया, और इनाम में 1947 के बाद सत्ता मिल गई, सौ साल का राज।
इतिहास के बदलते पन्नों के साथ कई चेहरे भी सामने आते रहे। इनमें से एक नायक थे सरदार भगत सिंह, जो बम-बारूद और फाँसी की बात करते थे, यानी क्रांतिकारी रास्ता। उस वक़्त कांग्रेस ने कहा कि हिंसा ग़लत है और अहिंसा ही सही रास्ता है। सवाल यह है कि अगर भगत सिंह ज़िंदा रहते, तो सबसे बड़ा ख़तरा किसे होता? बेशक, कांग्रेस को। उस वक़्त कोई दूसरी बड़ी पार्टी थी ही नहीं। ऐसे में, क्रांतिकारियों को ‘आतंकवादी’ या ‘गैर-जिम्मेदार’ बताना ज़रूरी था। भगत सिंह आज भी किताबों में क्रांतिकारी नहीं हैं। ऐसा क्यों किया गया? क्योंकि अगर भगत सिंह बड़े बन जाते, तो कांग्रेस के सत्ता का सपना टूट जाता।
फिर नाथूराम गोडसे वाला कांड हुआ। जब देश दंगों में जल रहा था, अगर उस वक़्त कोई गोडसे को यह कहकर Justify कर देता कि जब हिंदुओं के रक्त के प्यासी ताकतें तबाही मचा रही थीं और देश का नेतृत्व अहिंसा की बातें कर रहा था, तब एक युवा का ख़ून खौलना स्वाभाविक था, तो हो सकता है वह फ़ौरन हिंदू हृदय सम्राट बन जाता। आख़िर कोई तो था जिसने हिंदुओं की फ्रस्ट्रेशन को आवाज़ दी। शायद यह तब का लोकप्रिय नैरेटिव होता और जनता उसी दिशा में आगे बढ़ रही होती। इसलिए गोडसे को राक्षस बना दिया गया और इतिहास में हमेशा के लिए वह दानव ही बन गया।
शास्त्री, जेपी आंदोलन और पाटीदार आंदोलन
इसके बाद लाल बहादुर शास्त्री ताशकंद से लौटे और वापस नहीं आ सके। शास्त्री की छवि आम लोगों जैसी थी। वह भारत के ऐसे पहले प्रधानमंत्री थे जिनमें भारत के किसान की छवि थी, राष्ट्रवादी Reformer की छवि थी, जिनके लिए राष्ट्रवाद एक बड़ा मुद्दा था। तो इस सबसे कौन बड़ा होता? शास्त्री ही बड़े होते जाते। लेकिन कांग्रेस ने कभी किसी को बड़ा नहीं होने दिया, भीड़ से तो छोड़िए, अपने अंदर से भी नहीं।
फिर जेपी आंदोलन आया। इंदिरा गांधी के ख़िलाफ़ पूरा देश उठ खड़ा हुआ। कांग्रेस ने इमरजेंसी लगाई, आंदोलन को कुचला और नेताओं को जेल में डाला। फिर जब सत्ता वापस आई, तो धीरे-धीरे जेपी की विरासत को भी अपने अंदर समाहित कर लिया और ‘हम भी लोकतंत्र के रक्षक हैं’ वाला नैरेटिव चला दिया।
गुजरात का पाटीदार आंदोलन भी देख लीजिए। 2015 में हार्दिक पटेल ने आरक्षण को लेकर सड़कें जाम कर दीं। तब राज्य में कांग्रेस की सरकार नहीं थी, फिर भी राहुल गांधी की पार्टी ने उसे गले लगाया और अंततः उसे कमज़ोर कर दिया। हार्दिक पटेल को फिर अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए BJP में शामिल होना पड़ा।
वर्तमान राजनीति और कांग्रेस का मूलमंत्र
और अब CJP की बारी है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े के बाद इनके हौसले बुलंद हैं, इतने बुलंद कि CJP अगले दो साल में BJP को हरा देने की बात कर रही है। जबकि कांग्रेस मुस्कुरा रही है, क्योंकि उसे पता है कि सत्ता में रहना एक अलग कला है।
BJP को अभी भी यह कला पूरी तरह नहीं आती, लेकिन कांग्रेस को आती है। Good cop, bad cop। एक तरफ क्रांति का साथ दो, दूसरी तरफ से क्रांति को अपनी जेब में डाल लो। एक तरफ से Legal Help दो, और फिर स्टूडेंट्स को ‘हमने तुम्हें बचाया’ कहकर श्रेय ले लो। CJP की राजनीतिक जमीन को सीमित ही रखो। उसने लेफ्ट और अन्य समूहों को तोड़ दिया है, और आप देख भी रहे होंगे कि AISA राहुल गांधी के साथ खड़ी है और राहुल गांधी का Ecosystem यह साबित करने में लगा है कि स्टूडेंट्स के साथ तो कांग्रेस थी और बाक़ी कोई नहीं।
कांग्रेस का मूलमंत्र यही है कि विरोधी को कभी बड़ा मत होने दो। इतिहास इस बात का गवाह है कि कांग्रेस ने अपने रहते किसे बड़ा बनने दिया? भगत सिंह से लेकर अब CJP तक, किसी को नहीं। और सबसे बड़ी विडंबना यह है कि CJP वाले कह रहे हैं कि दो साल में BJP हार जाएगी, लेकिन कांग्रेस ख़ुद ब्रिटिश राज को नब्बे साल तक नहीं हटा पाई और क्रांति तथा सत्ता के बीच का कुशन बनी रही। फिर उसे सत्ता मिली, और आज भी वह उसी कला से खेल रही है।
निष्कर्ष और राजनीतिक दृष्टिकोण
तो अगर आपको कांग्रेस को समझना है, तो उसकी सत्ता-लालसा को समझिए। वह हर क्रांति को, हर जायज़ माँग को पहले अपना बनाती है और फिर धीरे-धीरे उसे बेअसर कर देती है। किसी मुद्दे या नेता को पहले कांग्रेस के दायरे में लाना और फिर उसे राहुल गांधी से भी बड़ा न होने देना, यही उनकी रणनीति है। कांग्रेस Observe करती है, Anticipate करती है और Corrective action ले लेती है। और ऐसे में अगर किसी को लगता है कि कांग्रेस बेवकूफ़ है, तो वह इतिहास नहीं पढ़ रहा है।
कांग्रेस कहीं से भी परेशान नहीं है। उसकी राजनीतिक हार का जो ग्राफ़ चल रहा है, वह उनके सौ साल के शासन के सामने बहुत छोटा फ़ासला है। कांग्रेस तो अभी सिर्फ़ अपने राजनीतिक करियर के Portfolio का dip देख रही है। उनकी नज़रों में यह 2014 से अब तक सिर्फ़ बारह साल का dip है, इससे ज़्यादा कुछ नहीं, क्योंकि वे बाक़ी सौ साल का मुनाफ़ा देख पाती हैं। और यह मुनाफ़ा तब तक जारी रहेगा, जब तक कोई सच में बड़ा ख़तरा पैदा नहीं करता।
सच यही है कि आपका कोई भी राजनीतिक झुकाव क्यों न हो, आपको यह मानना पड़ेगा कि CJP हो या कोई और, कांग्रेस उसे कभी बड़ा नहीं होने देगी।





