अगर किसी शख्स ने भारत के इंटेलिजेंस ऑफ़िसर्स की हत्या की हो, सैनिकों पर हमले किए हों, कश्मीर को अलग करने की बात करने वाले JKLF का को फ़ाउंडर रहा हो तो आप उसे क्या कहेंगे? आप उसे आतंकी कहेंगे! लेकिन जम्मू कश्मीर की सरकारी किताब में इसी शख्स यानी मकबूल भट को स्वतंत्रता सेनानी बताया गया है। यही नहीं बल्कि किताब में उसे शहीद का दर्जा भी दिया गया है।
ये वही मकबूल भट है जिसने भारतीय राजनयिक रवींद्र महात्रे और CID इंस्पेक्टर उमर चंद की अगवा कर हत्या कर दी थी।
मकबूल को शहीद बताने का कारनामा किया है जम्मू कश्मीर की उमर अब्दुल्ला सरकार ने। अब्दुल्ला सरकार ने हिलाल अहमद और संतोष मीणा की लिखी personalities and legends of jammu and kashmir नाम की एक सरकारी किताब को समग्र शिक्षा के तहत स्कूलों की लाइब्रेरीज में इश्यू किया था और इसकी लगभग 250 कॉपीज जम्मू और कश्मीर दोनों डिवीजंस में भेजी गईं थी।
लेकिन ये किताबें भारत के ख़िलाफ़ ज़हर से भरी हुई थीं और इनमें मकबूल भट् के साथ हुर्रियत कॉन्फ्रेंस बनाने वाले सैय्यद अली शाह गीलानी, शबीर शाह, जैसे लोगों को शहीद बता दिया गया था। इस किताब में लिखा गया है कि मकबूल भट्ट के लिए ‘महान बलिदान’ की राह तब शुरू हुई, जब वह सेंट जोसेफ कॉलेज में छात्र थे।” किताब में कहा गया कि कश्मीरी लोग मकबूल भट्ट को आज भी शहीद-ए-आजम के तौर पर याद करते हैं।
लेकिन समस्या सिर्फ़ यही नहीं है बल्कि किताब में भारत को कश्मीर पर कब्जा करने वाला बताया गया है। ऐसा लगता है कि किसी पाकिस्तानी ने ये किताब लिखी है क्योंकि इसमें कश्मीर को इंडियन ऑक्यूपाइड टेरिटरी बताया गया है। भारत को दमनकारी राज्य बताया गया है। अब मामला सामने आने के बाद एक्शन शुरू हो रहा है। राज्य के LG मनोज सिन्हा ने उन सारे ऑफिशियल्स को ससपेंड कर दिया है, जिन्होंने इस बुक को अप्रूव किया था।
इसके साथ ही इस बुक के पब्लिशर पर भी छापे पड़े है। लेकिन सोचिए आज जब कश्मीर से धारा 370 ख़त्म हो चुकी है, आतंकवाद का समूल नाश हो चुका है तब भी बच्चों के मन में भारत के ख़िलाफ़ ज़हर घोलने की साज़िशें चल रही हैं। सिस्टम और समाज में बचे कुछ नक्सली और आतंकी आज भी अपने आतंकी आकाओं के लिए जोर लगा रहे हैं। याद करिए ये वही मकबूल बट है जिसके लिए JNU में उमर ख़ालिद ने नारे लगाए थे।
और अब उसे कश्मीर में हीरो बताया जा रहा है।






