क्या आपको भी लगता है कि अयोध्या का राम मंदिर ‘खाली’ हो गया है? अगर हाँ, तो मुबारक हो, आपने फेक न्यूज़ का शिकार बनकर अपनी आँखों पर पट्टी बाँध ली है!
विपक्ष एक ही राग अलाप रहा है कि ‘राम मंदिर बदहाल है और श्रद्धालु गायब हैं’, लेकिन ज़रा हकीकत देखिए। जून 2026 के आँकड़े क्या कहते हैं? 7 से 11 जून के बीच, यानी सिर्फ 5 दिनों में लगभग 5 लाख लोग रामलला के दर्शन कर चुके हैं। क्या यह वो भीड़ है जिसे ‘कम’ कहा जा रहा है?
और मज़े की बात देखिए, जो लोग यह शोर मचा रहे हैं कि दान में कमी आई है, उन्हें ज़रा बैंक स्टेटमेंट देख लेना चाहिए। राम मंदिर निर्माण के पहले जहाँ दान के रूप में औसतन 16 से 18 लाख रुपये प्रतिदिन आते थे, अब वे बढ़कर 22 से 24 लाख रुपये के बीच पहुँच गए हैं। जनता ने अपना फैसला सुना दिया है कि उनकी आस्था पर इन विवादों का ‘ज़ीरो’ असर है।
तो यह अचानक ‘चिंता’ क्यों?
ये वही लोग हैं जिन्होंने 90 के दशक में राम मंदिर आंदोलन को ‘सांप्रदायिकता’ कहा था। अचानक 2027 के चुनाव आते ही इन्हें ‘पारदर्शिता’ की याद आ गई। बिना सबूत के माहौल बनाना और फिर खुद को मसीहा घोषित कर देना; यह उनका वही पुराना, घिसा-पिटा सॉफ्टवेयर है जो अब अपडेट होने के बाद भी क्रैश हो रहा है।
देखिए, दान और सुरक्षा पर सवाल पूछना लोकतंत्र में जायज़ है, लेकिन आस्था और फुटफॉल (श्रद्धालुओं की संख्या) के आँकड़ों के साथ ‘छेड़खानी’ करना रामभक्तों के विवेक का अपमान है। श्रद्धालु अभी भी भारी संख्या में रामलला के दर्शन करने पहुँच रहे हैं और रामलला के प्रति अटूट आस्था का यह कारवां रुकने वाला नहीं है।
अगली बार जब कोई कहे कि ‘सब छोड़कर भाग रहे हैं’, तो बस मुस्कुराते हुए यह लेख या वीडियो दिखा दीजिए।






