बंगाल में मंदिर पर हमला

बंगाल में फिर भड़की हिंसा: शिव मंदिर पर हमला, पुलिस मूकदर्शक

Summary
अल्लाहु अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारों के साथ शिव मंदिर पर हमला लेकिन पुलिस मूकदर्शक। बंगाल की पुलिस कब कट्टर भीड़ के खिलाफ एक्शन लेगी?

गुनाह ममता बनर्जी के बंगाल में हिंदू होना भर है। कल पश्चिम बंगाल के 24 परगना ज़िले में दंगा हुआ। पुलिस स्टेशन से महज़ दस कदम की दूरी पर। एक शिव मंदिर पर हमला करके कब्ज़ा करने की योजना के साथ इस्लामिक भीड़ इकट्ठा हुई। दंगाई भीड़ के सामने पुलिस लाचार नज़र आई। वो हिंदुओं से मंदिर बंद करके भाग जाने के लिए कहने लगी। हिंदू वहाँ डटे रहते हैं।

नतीजा यह होता है कि निहत्थे हिंदुओं को मारा जाता है। पुलिस पर जानलेवा हमला होता है। पुलिस भाग जाती है। पुलिस फिर से आती है बड़े अधिकारियों और दलबल के साथ। इस बार बड़े अधिकारियों को मारा गया। डिप्टी कमिश्नर तक घायल होकर अस्पताल चले गए।

और ध्यान रहे, कट्टर मुसलमानों के पत्थरों का शिकार भी वही पुलिस होती है, जो ममता के एक आदेश पर उनको बचाने के लिए खड़ी हो जाती है। कहने को बंगाल के एक छोटे से इलाके में विवाद हुआ। लेकिन यह संदेश है आने वाले रक्तिम भविष्य का।

वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि ममता की पुलिस दंगाइयों को सफेद कपड़ा दिखाकर रुकने के लिए कह रही है। मानो सरेंडर करते हुए सीज़फायर का अनुरोध कर रही है।

दूसरा वीडियो देखिए। अल्लाहु अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारों के साथ मंदिर पर हमला हो रहा है। पुलिस मूकदर्शक है।

एक और वीडियो देखिए। पुलिस स्टेशन पर हमला हो रहा है, पुलिस मूकदर्शक है।

ममता बनर्जी की पार्टी के नेता कुनाल घोष का कहना है कि यह एक अपवाद वाली घटना है, राज्य के law and order का इससे कुछ लेना-देना नहीं है। ठीक है, कुछ लेना-देना नहीं है। मुर्शिदाबाद के टाइम भी यही कह रहे थे, नतीजा हुआ कि हज़ारों हिंदुओं को पलायन करना पड़ा।

मेरे मन में अक्सर यह सवाल आता है कि जिन मुसलमानों को ममता बनर्जी ने अभी नई OBC आरक्षण लिस्ट में 86 फ़ीसदी हिस्सेदारी दी है, पूरी पुलिस और सरकारी महकमा दे दिया, स्टेट उनके दस्तरख़ान साफ़ कर रहा है — उनको और क्या देकर शांत कराएंगी? और क्या वो कभी शांत होना भी चाहते हैं? और क्या ममता को एक बार भी शर्म नहीं आती, मन में सवाल नहीं आता कि एक राज्य दंगाइयों के हाथों की कठपुतली बन गया है?

शायद उनको जवाब पता है। उनको पता है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री कार्यालय के दरवाज़ों की चाभी इन्हीं दंगाइयों के कुर्ते की जेब में है। जब तक सड़कें उस भीड़ के कंट्रोल में हैं, ममता के कंट्रोल में आलीशान मुख्यमंत्री आवास है।

मैं पश्चिम बंगाल के लाखों हिंदुओं की आँखों में डर देखते हुए, भविष्य के खतरों को देखते हुए भी यह कहना चाहता हूँ कि जब तक वो जेब नहीं फटेगी और चाभी ज़मीन पर नहीं गिरेगी, बंगाल यूं ही जलता रहेगा। हम वीडियो बनाते रहेंगे, आप कॉमेंट करते रहेंगे और हर तारीख पर मुर्शिदाबाद, मालदा, संदेशखली, 24 परगना जैसी घटनाएँ दर्ज होती रहेंगी।

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