Amarnath Cave Buta Malik Fake News

क्या बूटा मलिक ने ढूंढ़ी थी अमरनाथ गुफा? प्राचीन ग्रंथों और यात्रा वृत्तांतों में दर्ज है असली इतिहास

Summary
अमरनाथ यात्रा की खोज को अक्सर बूटा मलिक से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन क्या यह सच है? प्राचीन ग्रंथों, राजतरंगिणी और मुगलकालीन यात्रा वृत्तांतों के आधार पर जानिए इस दावे की सच्चाई।

सुनने में आता है कि कश्मीर का भी अपना एक वास्कोडिगामा है, जिसने अमरनाथ गुफा की खोज की थी। आप ‘बूटा मलिक’ सर्च करेंगे, तो हर जगह आपको यही कहानी देखने को मिलेगी। दिया मिर्जा से लेकर फारूख अब्दुल्ला तक और यहाँ तक कि अनंतनाग जिले की आधिकारिक वेबसाइट भी यही लिखती है। खबरों की तो बात ही छोड़िए, ‘बूटा मलिक के वंशज और वो मुस्लिम परिवार, जिनके बिना अधूरी है अमरनाथ यात्रा’। अरे भाई, थम जाओ, कितना झूठ छापोगे?

मुझे बस एक सवाल का जवाब चाहिए कि जब तक बूटा मलिक नहीं थे, तब क्या अमरनाथ यात्रा नहीं होती थी? और अगर ऐसा है, तो इसके प्रमाण दो। नहीं तो, मैं प्रमाण देता हूँ कि यह सब एक विशुद्ध प्रोपेगेंडा क्यों है।

वे कहते हैं कि यह 1850 की बात है, जब एक साधु ने पहलगाम के मुस्लिम गडरिये बूटा मलिक को कोयले से भरी एक पोटली दी थी। घर आकर जब बूटा मलिक ने पोटली खोली, तो उसमें से सोने के सिक्के निकले। अब बूटा मलिक हैरान, परेशान और नादान, उस साधु की खोज में निकल पड़े और ढूंढते-ढूंढते अमरनाथ की बर्फीली गुफा तक पहुँच गए और इस तरह उन्होंने अमरनाथ गुफा की खोज निकाली।

अब यह कहानी सुनने में तो मजेदार है, लेकिन इसे साबित करने के लिए उनके पास कोई ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं है। जबकि इसके उलट, ऐसे ठोस तथ्य मौजूद हैं कि अमरनाथ यात्रा 1850 यानी बूटा मलिक की इस कहानी से कहीं पहले से चली आ रही है और हिंदू श्रद्धालु वहाँ जाते रहे हैं।

‘आइन-ए-अकबरी’, जिसे मुगल इतिहास के एक बड़े संदर्भ के तौर पर माना जाता है, जो 16वीं सदी में लिखी गई थी, उसमें अमरनाथ गुफा और शिवलिंग का स्पष्ट जिक्र है।

1663 में दारा शिकोह के निजी चिकित्सक डॉ. बर्नियर कश्मीर की यात्रा पर आते हैं। वे अपनी किताब ‘ट्रैवल्स इन द मुगल एम्पायर’ में लिखते हैं कि, बर्फ की चमत्कारी आकृतियों से घिरी यह गुफा ही अमरनाथ गुफा है, जहाँ छत से टपकती बूंदों से बने बर्फ के शिवलिंग को भक्त महादेव का रूप मानकर पूजते हैं। ग्लेशियरों के बीच छिपा यह धाम, गंगाबल के दक्षिण-पूर्व में स्थित है।

मुगल काल के ये फैक्ट मैंने इसलिए बताए, क्योंकि जो लोग यह बूटा मलिक के नाम का प्रोपेगेंडा चलाते हैं, उन्हें इन स्रोतों पर ज्यादा विश्वास है।

इसके पहले हम देखें, तो ‘नीलमत पुराण’ में अमरनाथ गुफा और उसकी यात्रा की पूरी महिमा लिखी हुई है। 11वीं सदी के कश्मीर के सबसे बड़े इतिहासकार कल्हण की ‘राजतरंगिणी’ में अमरनाथ यात्रा के बारे में विस्तार से लिखा गया है। इसमें जिक्र है कि कश्मीर के अनगिनत तीर्थों में हिंदू तीर्थ यात्रियों को अमरनाथ की यात्रा विशेष रूप से आकर्षित करती है (पृष्ठ 385)।

और पीछे अगर हम जाएँ, तो श्रीमद्भागवत पुराण में भी अमरनाथ से जुड़ी एक कथा के बारे में विस्तार से बताया गया है। यानी इस बात के कई सारे प्रमाण अलग-अलग कालखंडों के मौजूद हैं कि हिंदू तीर्थ यात्री अमरनाथ यात्रा पर जाते रहे हैं और ये सब बूटा मलिक के नाम पर चलाए जाने वाले झूठ से कहीं पहले की बातें हैं।

अब मुझे सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर होती है कि अमरनाथ यात्रा से दान के रूप में जो पैसा इकट्ठा होता है, उसका एक हिस्सा इस बूटा मलिक के परिवार को जाता है, ऐसा दावा किया जाता है। अगर यह सच है, तो फिर आप सोचिए कि किस स्तर तक जाकर कश्मीरियत और भाईचारे के नाम पर यह झूठ परोसा गया है।

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