चीन आज दुनिया की फैक्ट्री है, सुई से लेकर जहाज़ तक चीन सब कुछ बनाता है। भारत इस कहानी में 1980 और 90 के दशक में पिछड़ गया। लेकिन इस बस को हमने वापस पकड़ने की एक कोशिश 2015 में चालू हुई। ये कोशिश थी मेक इन इंडिया। मेक इन इंडिया में मोदी सरकार ने कोशिश की कि हम ज्यादा से ज्यादा चीज अपने देश में ही बनाएँ।
सरकार ने इसके लिए सीरियस प्रयास भी किए, सब्सिडी दीं, सस्ती जमीनें दीं, रूल्स रेगुलेशन सरल किए। लेकिन हमारे देश में किसी भी अच्छी पहल में लोग ग़लत फ़ायदा ना उठाएँ, ये असंभव है। यहीं से हमारी आज की कहानी निकलती है। ये बताता है कि कैसे हमारे देश में लोग तब भी जुगाड़बाजी करते हैं, जब उनके लिए सारे मौके उपलब्ध हों।
तो आज की कहानी शुरू होती है 2019 में।1 अप्रैल 2019 को मोदी सरकार ने भारत में इलेक्ट्रिक व्हीक्ल के एडॉप्शन को तेज करने के लिए FAME स्कीम का फेज II लांच किया। केंद्र सरकार ने कहा कि हमारे देश में अभी ज्यादातर व्हीकल्स उस फ़्यूल पर चलते है जो विदेशों से आता है, इसके लिए मोटे डॉलर चुकाने पड़ते हैं।
इसके साथ ही ये पेट्रोल-डीजल हमारा एनवायरनमेंट भी गंदा करते हैं, इसलिए अब हम देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की मैन्यूफैक्चरिंग पर सब्सिडी देंगे।ये सब्सिडी व्हीकल्स बनाने वाली कम्पनियाँ डिस्काउंट के तौर पर कस्टमर्स को देतीं और फिर सरकार उन्हें ये पैसा उन्हें रीइंबर्स कर देती!
बेसिकली, कस्टमर्स को ये व्हीकल्स सस्ते मिलें और वो जल्दी EV की तरफ़ मूव कर पाएँ, इसके लिए सरकार ने पूरा मैकेनिज्म तैयार किया! साथ ही एक टारगेट ये भी था कि इससे देश में EV मैन्यूफ़ैचरिंग का पूरा इकोसिस्टम तैयार होगा। इसके लिए कुछ नियम क़ायदे भी लगाए गए!
मोदी सरकार ने कहा कि वो हर EV में पर किलोवॉट के हिसाब से 15000 रुपए की सब्सिडी देंगे। लेकिन ये पैसा व्हीकल के एक्स फैक्ट्री प्राइस का 40% से ज़्यादा नहीं होगा। इसके अलावा सरकार ने हमारा इकोसिस्टम मजबूत करने के लिए भी कुछ रूल्स लागू किए।
केंद्र सरकार ने कहा कि पैसा उन्हीं कंपनीज को मिलेगा जो लगातार अपने EVमें इंडिया में बने हुए कॉम्पोनेंट्स को लगातार बढ़ाती रहेंगी। इस लोकल वैल्यू एडिशन कहते हैं। मतलब धीमे धीमे ये व्हीकल्स पूरी तरह मेड इन इंडिया हो जाएँ।
बेसिकली जितना कॉम्पलेक्स पार्ट, उतना लेट उसका लोकलाइजेशन। इस स्कीम को देश की ऑटोमोटिव इंडस्ट्री ने हाथोहाथ लिया। सरकार की एक रिपोर्ट कहती है कि FAME-II के इंट्रोडक्शन के बाद देश में 38 OEM यानी ऑटो मैन्यूफ़ैक्चरर रजिस्टर हुए। ओला, एम्पीयर, रिवोल्ट, सिंपल जैसी 2 व्हीलर कंपनियों ने ऑपरेशन चालू किया।
बजाज,tvs, ओकिनावा और हीरो इलेक्ट्रिक जैसे प्लेयर्स भी गेम में उतर आए। और इसका इम्पैक्ट दिखा भी। जहाँ fame-i के अंतर्गत सिर्फ़ 1.51 लाख 2 व्हीलर EV बिकीं थीं तो FAME-II के बाद अप्रैल, 2019 से जून 2025 के बीच 14 लाख से ज्यादा टू व्हीलर बिक चुके।
यहाँ तक कहानी में आपको लगा होगा कि सब कुछ ट्रैक पर तो है, आख़िर क्या समस्या है और कहाँ गड़बड़ हो गई? जिस तरह किसी अयोध्या में समय के साथ नुकीले पत्थर निकल आते हैं उसी तरह किसी भी अच्छी पहल में कुछ ना कुछ घोटाला करने वाले घुस ही आते हैं।
मोदी सरकार की FAME-II स्कीम के साथ यही हुआ। जहाँ बड़े स्तर पर कंपनियों ने इसके लोकलाइजेशन के रूल्स के साथ कमप्लाई किया, तो कुछ होशियार पैसा बनाने में जुट गए। और यहीं से शुरू होता ना खाऊँगा और ना खाने दूँगा का इम्प्लीमेंटेशन! तो सबसे पहले समझते हैं स्कैम कैसे हुआ!
मोदी सरकार ने जब ev पर सब्सिडी देनी चालू की, तो लोकलाइजेशन की शर्तें भी लगाईं थी। बेसिकली किसी भी इलेक्ट्रिक व्हीकल का एट लिस्ट 50% पार्ट इंडिया में बना हुआ होना चाहिए था।लेकिन धीमे -धीमे कंप्लेंट्स मिलना चालू हुईं।
पता चला कि ओकिनावा, हीरो इलेक्ट्रिक, एंपीयर जैसी कंपनियां मेक इन इन इंडिया के नाम पर पेचकसबाजी कर रहीं थीं। मतलब वो चाइना से स्कूटर्स को अलग-अलग पार्ट्स के तौर पर मँगवातीं, और उन्हें यहाँ असेंबल करके बेच देतीं। कई बेसिक से पार्ट भी भारत में नहीं बनाए जाते थे।
जिन पार्ट्स का इंपोर्ट बैन किया गया था, उन्हें भी किसी ना किसी तरीके से इंडिया इंपोर्ट किया जा रहा था। कंपनियां ट्रैक्शन मोटर्स, करंट कन्वर्टर्स, मोटर कंट्रोलर्स और यहाँ तक कि कई केसेज में रिम्स और टायर्स तक चाइना से ले रहीं थीं। गड़बड़ी सिर्फ़ यहीं तक नहीं थी, इस चाइनीज माल को भारतीय बता कर सरकार से सब्सिडी भी ली जा रही थी।
सरकारी एजेंसी ICAT तथा ऑटोमोबाइल कंपनियों की बॉडी ARAI ने जब ऐसी ही कुछ कंपनियों के ev को खोला तो ये सारे राज बाहर आए कि यहाँ चाइनीज माल यूज हो रहा था। धीमे-धीमे इस पूरी प्रोब का दायरा बढ़ा। इसके बाद सीरियस फ्राउड्स की जांच करने वाली एजेंसी SFIO ने हीरो और ओकिनावा पर छापा भी मारा!
पता चला कि इलेक्ट्रिक 2 व्हीलर्स बनाने के नाम पर ओकिनावा, हीरो इलेक्ट्रिक, बेनलिंग इंडिया, रिवोल्ट, एमो इलेक्ट्रिक जैसी कंपनियों ने सरकार के FAME-II सब्सिडी के सैकड़ों करोड़ रुपए की गड़बड़ी की है। पता चला कि लगभग 470 करोड़ की गड़बड़ी इन कंपनियों ने सरकारी सब्सिडी में की है।
मोदी सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए जुलाई 2023 में 469 करोड़ रुपए के रिकवरी के नोटिस 7 कंपनियों को भेज दिए। ये भी साफ़ कर दिया गया कि अगर टाइम के अंदर सरकार की सब्सिडी नहीं लौटाई गई तो उन्हें ना सिर्फ़ इस स्कीम से डी रजिस्टर कर दिया जाएगा बल्कि आगे एक्शन भी होगा।
इसके बाद वो हुआ, जो हमारे देश में काफ़ी रेयर है। यानी कोई सरकार का पैसा वापस करे। लेकिन इस केस में ग्रीवास इलेक्ट्रिक ने सरकार के 124 करोड़ रुपए लौटा दिए, इसी तरह रिवोल्ट ने भी लगभग 50 करोड़ की वापसी सरकार को कर दी। इसके अलावा ओकिनावा दिल्ली हाई कोर्ट गई लेकिन उसे यहाँ से भी कोई राहत नहीं मिली।
हीरो इलेक्ट्रिक का पैसा इसलिए वसूल नहीं किया जा सका क्योंकि वो कंपनी ही बैंकरप्ट हो गई। लेकिन सरकार ने साफ़ कर दिया कि अब वो समय नहीं रहा जब सरकारी पैसे को लेकर कोई भी कंपनी मौज काट लेगी और कोई एक्शन नहीं होगा मामला रफ़ा दफ़ा कर दिया जाएगा।
“ना खाऊँगा ना खाने दूँगा” वाले स्लोगन को यहाँ भी इम्प्लीमेंट कर दिया गया। जिन लोगों ने सरकार का पैसा जो अल्टीमेटली जनता के टैक्स का पैसा होता है, उसमें धोखाधड़ी करने की कोशिश की थी, उन्हें भी समझ आ गया कि ये गेम्स आज से 15 साल पहले UPA राज में चल जाते, लेकिन अब येे संभव नहीं है।
कांग्रेस जैसी पार्टियां लगातार कहती हैं कि भाजपा सरकार उद्योगपतियों का कर्ज माफ करती है, उनके लोंस को राइट ऑफ कर देती है। इस बात में भले ही कोई सच्चाई ना हो, लेकिन सच्चाई ये जरूर है कि मोदी सरकार लोंस तो वसूल करती ही है, वो पैसा भी वसूल करती है जो लोग स्कैम के बहाने ले जाने की कोशिश करते हैं।
अगर ये सरकार बिजनरेस फ्रेंडली है तो ये भी इंश्योर करती है कि शेडी प्रैक्टिसेज करने वाले छूट ना पाएँ।



