बंगाल के चुनाव को बिगाड़ने के सारे पुराने तरीके जब फेल हो गए, तब ममता बनर्जी ने TMC का जिहादी सिंडिकेट सीधे मैदान में उतार दिया। भले ही हिंसा और बवाल TMC के रोज़ के साथी हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों में मालदा में जो हो रहा है, वो चुनावी इतिहास में शायद ही कभी देखा गया होगा।
मालदा के कालिया चक में बुधवार को जो सीन बना था, वो सुनिए। सात चुनाव अधिकारी, जिनमें तीन महिला अधिकारी भी थीं, BDO Office के अंदर कैद हो गए। बाहर हजारों की भीड़ लाठियाँ-डंडे और हथियार लेकर खड़ी थी। ये लोग चिल्ला-चिल्लाकर माँग कर रहे थे कि इन अधिकारियों को बाहर निकालो और हमें सौंप दो।
इस भीड़ में बड़ी संख्या ऐसे संभावित रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की बताई जा रही है, जिनके नाम बंगाल की वोटर लिस्ट से काटे गए हैं। जिहादी भीड़ चीख-चीखकर नारे लगा रही थी — ‘चुनाव आयोग मुर्दाबाद’, ‘इंशाअल्लाह न्याय होगा।’
अब सोचिए, ऑफिस के अंदर फँसे उन अधिकारियों पर क्या गुजर रही होगी? पूरे नौ घंटे तक वो BDO Office उनके लिए मौत और जिंदगी के बीच की जंग बन गया था।
बाहर वाली भीड़ इतनी उन्मादी थी कि कभी भी अंदर घुसकर हमला कर सकती थी। सड़क दोनों तरफ से बंद कर दी गई थी ताकि Central Security Forces मदद के लिए न पहुँच पाएँ।
मामले की गंभीरता इसी बात से समझ लीजिए कि चीफ जस्टिस सूर्यकांत रात के दो बजे तक जागकर इसकी रिपोर्ट ले रहे थे।
इस वीडियो में हम बात कर रहे हैं एक ऐसी घटना की, जिसने चुनावी हिंसा के सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। और इसके पीछे मास्टरमाइंड कौन हैं, अभी वो भी जानेंगे।
बंगाल में चुनाव की घोषणा हो चुकी है। इसके साथ ही चुनाव आयोग वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण का काम भी तेजी से कर रहा है। जिनके नाम SIR में कटे हैं, उनकी अपीलों की सुनवाई चल रही है। इसी काम के लिए बुधवार को सात Judicial अधिकारी मालदा के कालिया चक पहुँचे थे और BDO Office में अपीलें सुन रहे थे।
शाम को लगभग पाँच बजे से BDO Office के बाहर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। लोग जबरदस्ती अंदर घुसने की कोशिश करने लगे और Judicial अधिकारियों से मिलने की माँग करने लगे। उनका कहना था कि उनका नाम जबरन वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है।
अधिकारियों ने उन्हें समझाया कि सबकी अपील एक-एक करके सुनी जाएगी। पूरी भीड़ को एक साथ तो नहीं सुना जा सकता। जब उन्हें अंदर आने से रोका गया, तो हंगामा शुरू हो गया। पलक झपकते हजारों लोग BDO Office को घेरकर खड़े हो गए।
इस भीड़ में कौन लोग शामिल थे, ये आप इनके कपड़े देखकर पहचान सकते हैं। हजारों उन्मादियों की इस भीड़ को मोफ़करूल इस्लाम और सबीना यास्मीन Lead कर रहे थे। मोफ़करूल वकील है, 2021 में ओवैसी की पार्टी से चुनाव लड़ चुका है, अब TMC से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा सबीना यास्मीन मोतीबाड़ी से TMC की विधायक और ममता सरकार में मंत्री हैं।
देखिए, मोफ़करूल सिर्फ कोई छोटा-मोटा कार्यकर्ता नहीं है। TMC के बड़े-बड़े नेताओं से इसकी सीधी दोस्ती है। खासकर कल्याण बनर्जी — जो ममता बनर्जी के सबसे करीबी और पुराने साथी माने जाते हैं — उनके साथ मोफ़करूल की तस्वीरें खूब वायरल हैं। मतलब साफ है, ये जिहादी भीड़ का लीडर TMC के अंदरूनी सर्किल का हिस्सा है। बस यही वजह है कि पूरी घटना Pre-Planned लग रही है, क्योंकि नीचे तक का आदमी ऊपर तक जुड़ा हुआ है।
मोफ़करूल का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को ‘खेला होबे’ की धमकी दे रहा है।
ये वही शख्स है, जो काफी दिनों से SIR के खिलाफ मुसलमानों को भड़का रहा था। कालिया चक में भी ये भीड़ को चुनाव अधिकारियों के खिलाफ उकसाता नजर आ रहा था।
हजारों की ये भीड़ पूरे नौ घंटे तक Judicial अधिकारियों को बंधक बनाकर रखे रही। सब कुछ इतना प्लान किया हुआ था कि Central Forces को Rescue करने में भी कई घंटे लग गए, क्योंकि रास्ते पूरी तरह जाम कर दिए गए थे।
जब केंद्रीय बल किसी तरह पहुँचे, तो उत्तेजित भीड़ ने उन पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। जिहादियों की पत्थरबाजी के बीच सुरक्षा बलों ने BDO Office में कैद चुनाव अधिकारियों को Rescue किया और उनकी जान बचाई।
भीड़ इतनी भड़की हुई थी कि जब अधिकारियों को ले जाया जा रहा था, तब उनकी गाड़ियों पर भी हमला किया गया। सड़क पर बाँस, पेड़, पत्थर, मिट्टी — जो कुछ भी मिला, बैरिकेड लगा दिए गए। लगता है जिहादी सिंडिकेट कुछ बड़ा खेला करने की तैयारी में था।
यह घटना इतनी गंभीर थी कि मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने इसका Suo Moto Cognizance लिया और इसे पूरी तरह से एक Pre-Planned साजिश करार दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को कड़ी फटकार लगाई और इस मामले की जाँच केस CBI और NIA को सौंप दी।
अब कार्रवाई शुरू हो चुकी है। अभी तक 35 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। मास्टरमाइंड मोफ़करूल इस्लाम भी पकड़ा जा चुका है। NIA ने FIR दर्ज कर ली है और IG सोनिया सिंह खुद कोलकाता पहुँचकर जाँच की निगरानी कर रही हैं।
कार्रवाई तो हर बार होती है, लेकिन सवाल ये है कि आखिर ये सब बंगाल में ही क्यों होता है? बाकी तीन राज्यों में भी चुनाव हो रहे हैं, फिर बंगाल से ही ऐसी हिंसा की खबरें क्यों आती हैं? बंगाल की चुनावी राजनीति का ये रक्तचरित्र आखिर कब तक चलेगा?
हर बार की तरह इस बार भी ममता बनर्जी ने अपना पल्ला झाड़ लिया। सारा इल्जाम भाजपा और चुनाव आयोग पर थोप दिया। साफ दिख रहा है कि TMC की विधायक और मंत्री हजारों की भीड़ को हिंसा के लिए भड़का रही थीं, लेकिन ममता बेशर्मी से कहती हैं — ‘मेरा क्या?’ जबकि सबको पता है कि इस जिहादी भीड़ का असली फायदा TMC को ही हो रहा था।
अरे दीदी… आपके MLA, मंत्री खुद भीड़ को भड़का रहे थे, आपकी पार्टी का वकील ‘खेला होबे’ बोल रहा था, और आप अभी भी बेचारी बन रही हो?
TMC ने सालों से जो अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी वोटों की फसल काटकर सत्ता की मलाई खाई थी, इस बार चुनाव आयोग ने वो छीन ली है। जिहादी सिंडिकेट का मैदान में उतरना यही बता रहा है कि SIR ने उनके अवैध वोट बैंक पर जोरदार चोट मारी है। तभी तो इस बार बिलबिलाहट का स्तर इतना ज्यादा है। बंगाल की जनता अब ये देख रही है — खेला तो सच में होबे… लेकिन इस बार शायद TMC का ही खेला खत्म हो जाए।





