ब्रिटेन के अख़बार The Telegraph की एक रिपोर्ट पर ज़रा गौर कीजिए। रिपोर्ट के मुताबिक Northern England की कुछ Labour Councils ने वहाँ के स्कूलों के लिए नई Guidelines जारी की हैं। इन Guidelines में कहा गया है कि मुस्लिम बच्चों को Art, Dance, Drama, Music, Physical Education और Health Education जैसे Subjects पढ़ाते समय विशेष सावधानी बरती जाए, क्योंकि यह सब इस्लामिक मान्यताओं के खिलाफ माना जा सकता है।
वीडियो देख रहे आप में से अधिकतर लोग किसी न किसी समय इतिहास के छात्र रहे होंगे। और अगर इतिहास को कभी विषय के रूप में पढ़ा है, तो आपने एक चीज़ बार-बार नोटिस की होगी, जब भी किसी इस्लामी आक्रांता या उसके शासन का वर्णन होता है, कुछ बातें लगभग हर बार समान रहती हैं।
मूर्तियों को तोड़ा जाना, कला और संगीत पर प्रतिबंध लगना, नृत्य को हराम घोषित करना, ये सब इस्लामी शासन की पहचान के रूप में पढ़ाया जाता रहा है। यानी जहाँ शरिया नाफ़िज़ होती है, वहाँ संगीत, चित्रकला और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति पर सबसे पहले हमला होता है।
लेकिन अगर मैं आपसे कहूँ कि यह सब 500 साल पहले नहीं, बल्कि आज के दौर में हो रहा है… और वह भी उस देश में जिसका कभी कहा जाता था कि “जिस साम्राज्य में सूरज कभी अस्त नहीं होता”? जिस देश में राजा और चर्च समाज के दो सबसे बड़े स्तंभ माने जाते हैं।
और सबसे हैरानी की बात यह है कि यह सब सामान्य सामाजिक जीवन में नहीं, बल्कि बच्चों की कक्षाओं में हो रहा है। बच्चों को Drawing, Music और Dance जैसी चीज़ों से दूर रखने की कोशिश की जा रही है।
अब तक शायद आप समझ चुके होंगे कि बात ब्रिटेन की हो रही है। अगर नहीं समझे हैं, तो जान लीजिए कि England के उत्तरी हिस्से के कई स्कूलों में Drawing, Art, Music और Dance को लेकर विशेष Guidelines जारी की गई हैं। और ऐसा क्यों किया गया है, इसका कारण भी अब आप जानने वाले हैं।
अब तक मैं और आप ब्रिटेन की सड़कों पर सूट-बूट और Gloves पहने अंग्रेज़ महिलाओं की जगह काले बुर्कों की बढ़ती मौजूदगी देखकर उसके भविष्य के “Sharaiकरण” की चर्चा करते थे। लेकिन जो कभी भविष्य लग रहा था, वह अब वर्तमान बनता दिखाई दे रहा है।
The Telegraph की रिपोर्ट के अनुसार, इन Subjects को पढ़ाने पर मुस्लिम Parents को आपत्ति हो सकती है। आपत्ति इसलिए क्योंकि इस्लाम में इन्हें जायज़ नहीं माना जाता। यह तर्क दिया गया कि Drawing, Music और कुछ Physical Activities बच्चों को “दीन” से भटका सकती हैं और “बुतपरस्ती” की ओर ले जा सकती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार Labour Councils द्वारा जारी Sharing The Journey नाम की Guideline में कहा गया है कि बच्चों की Drawing से “Blasphemy” का खतरा पैदा हो सकता है। इसमें यह तक कहा गया कि इंसानों या जानवरों की तस्वीर बनाना इस्लाम में हराम माना जाता है, इसलिए स्कूलों में ऐसी गतिविधियों से बचा जाए।
Teachers को सलाह दी गई कि वे सुनिश्चित करें कि बच्चे Jesus या किसी Prophet की तस्वीर न बनाएं। साथ ही मुस्लिम बच्चों से इंसानों या जानवरों की Drawing भी न करवाई जाए। इसके अलावा Music से दूरी बनाए रखने की भी सलाह दी गई और इसके समर्थन में Sharia आधारित उदाहरण दिए गए।
मामला यहीं नहीं रुका। लगभग Taliban-प्रेरित सोच के तहत यह भी कहा गया कि ऐसी Physical Activities से लड़के और लड़कियों को दूर रखा जाए, जिनमें उनके बीच किसी प्रकार का Physical Contact होने की संभावना हो।
और यह Guidelines किसी एक शहर के लिए नहीं, बल्कि Northern England के चार शहरों, Leeds, Kirklees, Oldham और Tameside, के स्कूलों के लिए जारी की गई हैं।
ब्रिटेन का “Madrasakaran”
अगर यही दस्तावेज़ अफ़ग़ानिस्तान के कंधार के किसी मदरसे में रख दिया जाए, तो शायद उसमें कोई बदलाव करने की ज़रूरत ही न पड़े। लेकिन यह सब ब्रिटेन में हो रहा है, तो अब किसी को हैरान नहीं होना चाहिए।
इन चारों शहरों की Demography पर नज़र डालिए। इनमें से दो शहरों के Mayor मुस्लिम हैं और दोनों महिलाएँ हैं। Tameside की Mayor हिजाब पहनने वाली Bangladeshi-origin की Shibli Alam हैं, जबकि Kirklees की Mayor Nausheen Dad हैं।
अब शायद आपको समझ आ रहा होगा कि इन स्कूलों में “बुतपरस्ती” को लेकर इतनी चिंता क्यों जताई जा रही है। जिस Demographic Change पर भारत में लगातार चर्चा होती है, उसी ने ब्रिटेन के इस Sharaiकरण में भी बड़ी भूमिका निभाई है।
इन शहरों में मुस्लिम आबादी तेज़ी से बढ़ी है। Leeds में लगभग 8% आबादी मुस्लिम है। Oldham में लगभग एक-चौथाई Population मुस्लिम है। Kirklees में करीब 19% और Tameside में लगभग 8% मुस्लिम आबादी है।
पूरे United Kingdom में मुस्लिम आबादी 6.5% से अधिक हो चुकी है। 2021 की Census के अनुसार 2011 में UK में लगभग 27 लाख मुस्लिम थे, जो बढ़कर करीब 39 लाख हो गए। यानी केवल दस वर्षों में मुस्लिम आबादी लगभग 45% बढ़ गई।
दूसरी ओर, इसी अवधि में Christian Population लगभग 18% घट गई।
अब समझिए कि आखिर UK के स्कूल “Blasphemy” से डरकर Art और Music तक सीमित करने की बात क्यों कर रहे हैं। और यह सब केवल “Optional Advice” नहीं है। क्योंकि जिस तरह भारत में “Sar Tan Se Juda” जैसी कट्टरपंथी मानसिकता देखने को मिलती है, UK में भी हालात अलग नहीं हैं।
आपको याद होगा कि Kirklees में स्थित Batley Grammar School 2021 में चर्चा में आया था। वहाँ एक Teacher ने Religious Education की Class में Prophet Muhammad का एक चित्र दिखाया था। मुस्लिम छात्रों ने इसकी शिकायत अपने Parents से की।
इसके बाद ब्रिटेन की सड़कों पर भारी विरोध प्रदर्शन हुए। “Gustakh-e-Nabi ki ek hi saza…” जैसे नारे लगाए गए। उस Teacher के खिलाफ Fatwa जारी किए गए, उसे जान से मारने की धमकियाँ दी गईं।
करीब 400 साल पुराने Batley Grammar School को भीड़ ने घेर लिया और Teacher को भीड़ के हवाले करने की मांग की गई।
नतीजा यह हुआ कि आज भी वह Teacher गुमनामी में जीवन बिताने को मजबूर है। ठीक वैसे ही जैसे भारत में Nupur Sharma आज भी सुरक्षा और गुमनामी के बीच जीवन जी रही हैं।
यानी ब्रिटेन के शरीयकरण में अब शायद कोई Element बाकी नहीं बचा है।
क्या आप जानते हैं कि ब्रिटेन में शिक्षा व्यवस्था का Standard तय करने वाली संस्था Ofsted का प्रमुख कौन था? उसका प्रमुख था Mufti Hamid Patel। जी हाँ, ब्रिटेन ने अपनी शिक्षा व्यवस्था की निगरानी एक मुफ़्ती के हाथों में दी थी।
लेकिन UK में इस्लामीकरण के लिए केवल मुस्लिम समुदाय ही जिम्मेदार नहीं है। इसमें Labour Party की राजनीति की भी बड़ी भूमिका बताई जा रही है।
जिस तरह भारत में Left-liberal राजनीति पर अक्सर “Minority Appeasement” के आरोप लगते हैं, उसी तरह UK में भी Labour Party पर इस्लामी कट्टरपंथ के प्रति Soft Corner रखने के आरोप लगाए जाते रहे हैं।
जिस ब्रिटिश Empire के बारे में कहा जाता था कि उसका सूरज कभी नहीं डूबता, वही आज अपनी ही बनाई नीतियों का परिणाम भुगतता दिखाई दे रहा है।
आज Britain एक ऐसे मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है जहाँ Classroom तक डर पहुँच चुका है।
शिक्षा का अर्थ होता है जिज्ञासा, Creativity और Critical Thinking को बढ़ावा देना। Art, Music और Dance बच्चों के मानसिक विकास के महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। लेकिन जब किसी समाज में धार्मिक कट्टरता का भय शिक्षा व्यवस्था पर हावी होने लगे, तो सबसे पहले Creativity ही निशाने पर आती है।
और यह केवल Britain तक सीमित नहीं है। Europe में इस्लामी कट्टरता को लेकर कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।
2015 में Paris स्थित Charlie Hebdo के दफ्तर पर हमला कर 11 पत्रकारों की हत्या कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने Prophet Muhammad के Cartoons प्रकाशित किए थे।
2020 में France के Teacher Samuel Paty की हत्या केवल इसलिए कर दी गई क्योंकि उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने Class में Prophet का Cartoon दिखाया था। बाद की जांच में कई दावे विवादित पाए गए, लेकिन तब तक एक Teacher की जान जा चुकी थी।
आज Britain जिन हालातों में पहुँच चुका है, उसे देखकर कुछ आलोचक यह तक कहने लगे हैं कि अगर यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले समय में Britain की सांस्कृतिक पहचान पूरी तरह बदल सकती है।
जब किसी देश के बच्चों को चित्रकला करने से भी डर लगने लगे, तो समझ लीजिए कि वहाँ केवल Demography ही नहीं, बल्कि Civilization भी बदल रही है।





