चार मार्च को होली के दिन दिल्ली के उत्तम नगर में एक मकान की छत पर खड़ी नौ साल की एक हिंदू बच्ची ने अपने ही घर के किसी सदस्य पर रंग का गुब्बारा फेंका लेकिन वो गुब्बारा इफ़्तारी का सामान लेने जा रही एक रोज़ेदार के काले बुरके पर गिर गया। और फिर क्या हुआ, बवाल हुआ। मज़हबी ईमान पर काफ़िर रंग गिर गया था। उसे धोए जाने की ज़रूरत थी।
हम सभी अपनी Life में कई सारे Cards इस्तेमाल करते हैं; Credit Cards, Debit Cards, शादी का कार्ड, Offers का कार्ड! और ये Cards भी अलग-अलग तरीके के होते हैं! किसी में Fuel पर पैसा बचता है तो किसी में बाहर Dinner करने पर, किसी से शादी में शामिल होने का मौक़ा मिलता है। लेकिन इन सबसे अलग एक और Victim Card ऐसा है जिस पर देश के इन Minorities का पहला हक़ है।
इस Victim Card को इस देश के मुसलमान अपने हर गुनाह की सज़ा में Discount पाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। और जैसे हर Card के लिए Mastercard और Visa जैसी कोई Agency होती है, वैसे ही इस Victim Card को Facilitate करने के लिए भी जमीयत उलेमा-ए-हिंद और इस्लामी Media जैसे संस्थान लगे रहते हैं। और Maximum Discount और Minimum Liability के वादे के साथ इन्हें उकसाया जाता है कि “जो गुनाह करना है कर लो”, आख़िर में यह Card Swipe ही कर लिया जाएगा। और आज जिस Case के बारे में मैं बात कर रही हूँ वो इसी Victim Card की कहानी है, एक सच जिसे पलटने की कोशिश की जा रही है।
तो हुआ ये है कि रमज़ान के पाक महीने में होली आ गई, और ईमान के पक्के मुसलमानों ने कहा भाईचारे का सतरंगी ठीक है लेकिन हमारे ईमान के सफ़ेद कुर्ते और काले बुरके पर तुम्हारी होली का रंग नहीं आना चाहिए। तुम काफ़िर हो और तुम्हारा रंग भी काफ़िर है, फिर भी हिंदुओं ने सोचा कि भाईचारा है, एक मुहल्ले में इतने सालों से रहते हैं, इनकी ईद की सेवइयां भी हम खाते हैं, ऐसे में इन्हें होली से क्या दिक़्क़त होगी? लेकिन हिंदू ग़लत थे।
होली खेलते ही आफ़त आ गई। इसलिए उस हिंदू परिवार पर ईमान बचाने आए लोगों की भीड़ (Mob) के द्वारा हमला कर दिया गया। जब भीड़ छँटी तो उस हिंदू परिवार के छब्बीस वर्षीय नौजवान तरुण का शरीर बेजान था, और Hospital पंहुचकर डॉक्टरों ने औपचारिक रूप से उसे मृत घोषित कर दिया।
अभी तक की सारी बातें सच हैं और सारे Facts यह साबित करते हैं कि ये एक Mob Linching थी। लेकिन अब उस Mastercard के आने का वक़्त हो गया था। पूरे हिंदुस्तान में यह ख़बर जंगल की आग जैसी पंहुची थी। हर किसी को पता चल चुका था कि मुसलमानों की भीड़ के द्वारा एक हिंदू नवयुवक की Mob Linching की जा चुकी है। लेकिन फिर यहाँ आया “Victim Card”।
Mob Linching करने वाली भीड़ को बचाने का खेल शुरू हुआ। हमने एक Video में आपको विस्तार से बताया है कि कैसे उस महिला से Video बनवाये गए, उसे Circulate किया गया और कैसे उसकी आड़ लेने की कोशिश करते हुए Victim Card खेलने का पूरा Plot तैयार किया गया। इस Video में हम आपको “Victim Card” के पर्दे के पीछे काम करने वालों के चेहरे दिखायेंगे। हम आपको बताएँगे कि ये इस्लामी Narrative कैसे काम करता है, कौन लोग इसके पीछे हैं, कैसी इनकी Reporting है।
सबसे पहला नाम है Mir Faizal नाम के एक मुसलमान का। यह कथित तौर पर पत्रकार है। इस्लामी देश क़तर के सरकारी संस्थान Al Jazeera में इसने काम किया, जहाँ से इसे इस्लामी Ecosystem में Publicity और पैसा दोनों मिला। जिसके बाद Mir Faizal ने अपना इस्लामी Media संस्थान बनाया, ‘The Observer Post’।
जब पूरा भारत इस सच को जान चुका था कि तरुण का क़त्ल इस्लामी भीड़ ने किया है, तभी उस क़ातिल परिवार की एक महिला का Video सोशल मीडिया पर Viral हुआ। इस Video में वो अपने दुखड़े रोते हुए मुसलमानों से सड़कों पर उतरने की अपील कर रही थी। इसके कुछ घंटों के बाद एक Professional Setup में उसी मुस्लिम लड़की का Interview ‘Observer Post’ के द्वारा किया जाता है।
और इस Interview में तरुण पर उसकी हत्या की घटना के दौरान, छेड़खानी का आरोप लगाया जाता है। साफ़ दिख रहा था कि यह झूठ है, मज़हबी Mob Linching को छेड़खानी के बाद हुआ झगड़ा बताने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि यह कोशिश कुछ हद तक सफल भी रही। पूरे Internet पर इसकी Clips को, घटना की दूसरी Side बताकर Share किया जाने लगा।
जबकि सच सबको पता था कि इस घटना की कोई दूसरी Side नहीं है। कोई ऐसा छुपा हुआ पहलू नहीं है। सीधी सी बात इतनी है कि एक हिंदू लड़के को रमज़ान के महीने में मुसलमान भीड़ ने घेरकर मार दिया। इसलिए मार दिया कि एक होली के गुब्बारे से उनका मज़हब ख़तरे में आ गया था। इसलिए मार दिया क्योंकि हिंदू लड़का हिंदू था।
इस इस्लामी Media और “Information Ecosystem” के इस घटना में Involve होने से पहले दूसरा पक्ष भी, होली का रंग डालने को ही इस घटना की शुरुआत बता रहा था। लेकिन अब कहानी बदली जा रही थी। बड़े-बड़े इस्लामी और Secular Twitter Accounts के द्वारा यह Narrative स्थापित किया जाने लगा कि मामला छेड़छाड़ और उससे उपजे विवाद का है।
साथ ही उन Videos को भी Share किया जाने लगा जो इस Mob Linching के बाद आसपास के हिंदुओं के विरोध की थीं। “हिंदू गुंडे” Tags के साथ Clips को Viral किया गया। जिसका मक़सद इस Case में इस परिवार के मुसलमानों को अपराधी की जगह और अधिक Victim बनाने का था। इसके साथ ही AIMIM के Shoaib Jamai जैसे कट्टर मुसलमानों ने इस्लामी Media द्वारा बनाई Clips को Share करना शुरू किया।
‘Freedom of Ethical Journalism’ (FOEJ) नाम के और नए शुरू हुए कथित Media संस्थान की तरफ़ से भी Reporting का एक सिलसिला शुरू किया गया जिसका दावा दूसरा पहलू दिखाने का था। घटना से लेकर आठ मार्च तक, चार दिन कोई Reporting नहीं हुई। जिस वक़्त मुसलमानों की भीड़ के द्वारा उत्तम नगर में Linching की जा रही थी उस समय इनकी Website और Handle पर अली ख़ामनेई की मौत का मातम मनाया जा रहा था।
आठ मार्च को जब MCD का Bulldozer उन क़ातिलों के घर पर चलने गया तब इन्होंने Victim पेश करना शुरू किया। उसके बाद कम से कम आठ Videos बनाई गईं, जिसमें उस लड़की का Press Conference नुमा Interview भी शामिल है। इसमें एक नया खेल आया— “कहाँ है Rizwan?” आगे चलकर इसे Twitter का Number 1 Trend तक बनाया गया। सोनाक्षी सिन्हा जैसी नई-नई मुसलमान बनी बीबियों तक ने आँसू बहाए, अरफ़ा जैसी पुरानी बीबियों ने भी रोज़े के बीच दो बूँद आँसू बहा ही दिए।
दरअसल इस Interview में भ्रामक रूप से यह कहा गया कि मुस्लिम परिवार का एक चौदह-पंद्रह साल का लड़का Rizwan ग़ायब कर दिया गया है। Police पर आरोप लगाए गए। महिला की छेड़छाड़ और Bulldozer के बाद एक बच्चे का Angle लाया गया। जबकि सच ये था कि उस Mob Linching में वो भी शामिल था और Police ने पकड़कर उसे भी बाल सुधारगृह (Juvenile Home) भेज दिया था।
ये सच शायद उस लड़की को पता था लेकिन अब ये लोग अपने आकाओं के इशारों पर नाच रहे थे। आकाओं ने कहा था कि “Victim Card” का “Maximum Benefit“ चाहिए तो आँसू के बहाने ढूँढ कर रखो। हर कदम पर रोना होगा, क़त्ल तरुण का हुआ है लेकिन पीड़ित तुम्हें ही दिखना होगा।
Maktoob Media, Haq Media —जैसे अनगिनत नामों वाले Handles जो Media का भेष बनाये घूम रहे हैं इन सभी ने बाकायदा Campaign के तहत इस पूरी घटना के असली पहलू को पलटने की कोशिश की। और जब Internet पर ठीक-ठाक धुंध फैल गई, आठ तारीख़ से लेकर दस तारीख़ तक, इन तीन दिनों में इस्लामी Media Ecosystem ने Pitch तैयार कर दी। जिस घटना का कोई दूसरा पक्ष था ही नहीं, उसमें भी मुसलमान को “Victim Paint” कर दिया गया।
इसके बाद Entry हुई आका की– जमीअत उलेमा-ए-हिंद, अब खेल में खुलकर आ चुका था। दस मार्च की शाम दिल्ली पुलिस के Joint Commissioner से जमीअत के कुछ सदस्य जाकर मिलते हैं। Internet पर Photo डाली जाती है।
लंबा-चौड़ा Caption लिखा जाता है जिसमें यह कहा गया कि तरुण की Mob Linching के बाद मुसलमान डर रहा है। उत्तम नगर में Communal Tension बढ़ रही है, उकसाने वाली Activities हो रही हैं। रमज़ान का पाक महीना चल रहा है, ईद आने वाली है, हमारी सेवइयां डर रही हैं। ईदगाह में नमाज़ पढ़ने जाने में डर लग रहा है। उन लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए जो Communal Tension को बढ़ा रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम को अगर मैं एक फ्रेम में रखकर देखना चाहूँ तो एक ही बात समझ में आती है कि आज भी Narrative के खेल में मुसलमानों के पास जो System मौजूद है वो हिंदुओं के पास नहीं है। दिल्ली के उत्तम नगर में तरुण की Mob Linching करने के बाद भी एक मुसलमान परिवार अगर ख़ुद को Victim दिखा ले जा रहा है तो सोचकर देखिए सामने कितनी बड़ी तैयारी है।
अब आख़िर में सबसे बड़ा सवाल कि यह सब कुछ कैसे होता है? कैसे पैसा आता है, कौन Backup देता है?
तो उत्तम नगर की इस घटना के बाद कुछ और इस्लामी Social Media Influencers यहाँ आए हुए थे। उनमें मुख्य रूप से एक नाम के बारे में जानना चाहिए—‘Hyderabad Youth Courage’ नामक संस्था का कर्ता-धर्ता, Salman Khan। भारत में कहीं भी मुसलमान कुछ ग़लत करे, सरकारी ज़मीन पर क़ब्ज़ा करे, दंगा करे, Love Jihad करे, उसके बाद इस शख़्स को वहाँ पहुँचना होता है।
Video बनाकर अल्लाह की क़सम देकर, मुसलमानों से ज़कात की रक़म Donate करने को कहता है। और कम से कम आधा दर्जन बार यह शख़्स Money Laundering के Case में फँस चुका है। हैदराबाद का है तो AIMIM से क्या Connection होगा आप समझ सकते हैं। यह आदमी पहली बार चर्चा में बनभूलपुरा के बवाल के बाद आया था, जहाँ मुसलमानों ने Police पर हमला किया था, उसके बाद इसने वहाँ मुसलमानों को नोटों की गड्डियाँ बाँटी थीं। और यह अकेला नहीं है, यदि जांच होगी तो यह सिर्फ Tip of the Iceberg ही निकलेगा।
आज से चालीस साल पहले जब अख़बार गाँवों में एक दिन बाद पहुँचता था तो दिल्ली की ख़बर गाँव में मौजूद मुसलमानों की मस्जिदों में अख़बार से पहले पहुँच जाया करती थी। आज भी वही Network काम कर रहा है। और अधिक Sophisticated, और अधिक प्रभावशाली ढंग से।
Observer Post, FOEJ, Haq Media जैसी कथित संस्थाओं की Websites आप खोल कर देखिए, उनकी कोई Information नहीं मिलेगी। इनका Editor कौन है, इनका Office कहाँ है, मूलतः आप यह जान ही नहीं सकते हैं कि ये चल कैसे रहे हैं, इन्हें चला कौन रहा है।
Observer Post की कहानी सुनिए, इन्होंने उत्तम नगर की घटना की कथित Reporting की, और उसके अगले ही दिन एक हिजाबधारी महिला को सामने बैठा दिया गया कि –आज तक हमने पैसा नहीं मांगा लेकिन अब माँग रहे हैं। अगर आप चाहते हैं कि हम ऐसे ही काम करते रहे तो हमारा सहयोग करिए।
FOEJ का Page देखकर लगता है कि जानबूझकर ऐसा बनाया गया है कि कोई Contact तक न कर सके, कोई Information ही न निकल सके। बाक़ी सभी Pages की स्थिति भी कमोबेश यही है।
इन सभी में “Fidayeen Model” नज़र आता है। वैसे तो फिदायीन आमतौर पर आत्मघाती इस्लामी हमलावरों को कहते हैं लेकिन ये लोग Information और Toolkit को बांधकर फोड़ने की व्यवस्था के तहत ही निर्मित नज़र आते हैं।
इन्हें देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इन्हें एक ख़ास मक़सद के लिए ही बनाया गया है। उत्तम नगर एक घटना है। यहाँ अभी इन्होंने केवल Dry Run किया है। सोचिए जब Mob Linching करने वालों को Victim दिखाया जा सकता है तो आगे ये क्या से क्या कर सकेंगे।
ये सस्ते Al Jazeera हैं! ये BBC का First Copy Version हैं लेकिन इनका Impact ऐसा है कि ये आगे किसी भी हिंदू को Victim की जगह आरोपी साबित कर देंगे। अभी इनका Fact Check हो रहा है, लेकिन शायद कल ये इसमें कामयाब भी हो जाएँ।





