RBI के रिटायर्ड कर्मचारी की बेरहमी से हत्या, घर में घुसकर मोहम्मद आजाद ने गर्दन पर किए अनगिनत वार

Summary
Azad Husain ने Madhav Ram के घर में घुसकर उनकी हत्या केवल इस बात के लिए कर दी क्योंकि उन्होंने उसे कई बार Loan देने के लिए मना कर दिया था। माधव राम और आजाद हुसैन पड़ोसी थे। दोनों परिवारों के बीच भाईचारे का माहौल था।

देश की राजधानी दिल्ली में अपराध का ग्राफ एक बार फिर डराने लगा है। आर के आश्रम इलाके में आरबीआई के रिटायर्ड कर्मचारी माधव राम वाल्मीकि की उनके घर में ही गला रेतकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस जघन्य अपराध को मोहम्मद आजाद, जिसे स्थानीय रूप से जाजू कहा जाता है, ने अंजाम दिया।

पीड़ित परिवार के अनुसार, आरोपी का उनके घर में सालों से आना-जाना था और परिवार उस पर अटूट भरोसा करता था। घटना के समय मृतक घर में अकेले थे, जिसका फायदा उठाकर आरोपी ने इस वारदात को अंजाम दिया। मृतक की पत्नी का कहना है कि आरोपी ने उनसे पानी मांगा और खुद ही ऊपर जाकर पिलाने की बात कही, लेकिन वह पानी नहीं बल्कि खून का प्यासा निकला।

लूट के इरादे से रेकी और जघन्य हत्याकांड

पुलिस जांच और परिवार के बयानों से संकेत मिलता है कि यह हत्या पूरी तरह सुनियोजित थी। मृतक माधव राम दो दिन पहले ही अपनी कीमती चीजें बैंक लॉकर से निकालकर घर लाए थे, जिसकी रेकी आरोपी काफी समय से कर रहा था। घटना के बाद घर से गहने और नकदी गायब मिली है।

परिवार का आरोप है कि इस अपराध में आरोपी की पत्नी रुबीना ने भी उसका साथ दिया और सबूत मिटाने की कोशिश की। मृतक के बेटे ने बताया कि उसने आरोपी को घर से भागते हुए देखा था, लेकिन तब उसे अंदेशा नहीं था कि उसके पिता की हत्या कर दी गई है। इस घटना के बाद से पूरे वाल्मीकि समाज और मृतक के परिवार में गहरा आक्रोश है।

योगी मॉडल से आरोपियों के एनकाउंटर की मांग

पीड़ित परिवार ने दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश के ‘योगी मॉडल’ की मांग की है। मृतक की पत्नी और बेटियों का कहना है कि उन्हें केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि “खून के बदले खून” चाहिए। वे आरोपी के एनकाउंटर या फांसी की सजा की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में कोई दूसरा व्यक्ति ऐसा अपराध करने की हिम्मत न जुटा सके।

परिवार का यह भी कहना है कि दलित समाज से होने के बावजूद किसी भी बड़े दलित नेता ने अभी तक उनकी सुध नहीं ली है। यह मामला न केवल एक आपराधिक घटना है, बल्कि समाज में बढ़ती अविश्वास की भावना और कानून के कमजोर होते खौफ को भी उजागर करता है।

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