पश्चिम बंगाल में इन दिनों जो देखने को मिल रहा है, उस पर साहिर लुधियानवी की कुछ लाइनें ठीक बैठती हैं कि तुमने जिस खून को मक्तल में दबाना चाहा, आज वह कूचा–ओ–बाज़ार में आ निकला है, कहीं शोला, कहीं नारा, कहीं पत्थर बनकर।
पश्चिम बंगाल अगले कुछ महीने हमें और आपको खूब चौंकाएगा। मैं आपको हाल की कुछ घटनाएं बताता हूं और फिर शायद आपको ये समझ आए कि मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं।
TMC में ममता के खिलाफ बगावत?
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के घर पर बीते कल एक मीटिंग हुई थी। मीटिंग इस बात को लेकर थी कि उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी और TMC नेता कल्याण बनर्जी पर भीड़ ने हमला किया है और उसका विरोध सभी ने कैसे करना है उसकी प्लानिंग होनी थी। बंगाल में TMC के 80 विधायक हैं और हैरानी की बात ये है कि इनमें से केवल 20 विधायक ही इस मीटिंग में मौजूद थे बाकी के 60 विधायक नदारद थे।
अब TMC ये कहते हुए बचाव तो कर रही है कि बाकी के 60 विधायक हमले के विरोध में जमीन तैयार कर रहे थे लेकिन मुझे इस बात पर इसलिए डाउट हो रहा है क्योंकि 20 मई को भी ऐसा ही देखने को मिला था।
उस दिन भी TMC के सभी विधायकों को एक प्रोटेस्ट करना था और उस प्रोटेस्ट में भी 80 में से केवल 34 विधायक आए थे… बाकी के 46 गायब थे। इसे आप ऐसे भी देख सकते हैं कि पहली बारी में तो 46 विधायक गायब थे और इस बार 60 विधायक मीटिंग में नहीं आए।
अब सवाल ये है कि TMC में क्या सब कुछ सही चल रहा है? कहीं ऐसा तो नहीं है कि ये ममता बनर्जी से दूरी बनाना चाह रहे हैं? ये सवाल मैं इसलिए भी उठा रहा हूं क्योंकि इससे पहले TMC की ही एक सांसद अपने पद से इस्तीफा दे चुकी है और वो 4 बार की सांसद है और उन्होंने केवल इस्तीफा नहीं दिया… काकोली घोष ने करप्शन को अपनी पार्टी की हार का कारण बताया है। यानी TMC के भीतर से ही विरोधी स्वर अब खुलकर सामने आ रहे हैं और जहांगीर खान जिन्हें फाल्टा से दोबारा चुनाव लड़ना था वो पहले ही मैदान छोड़कर भाग गए थे।
ये वो सीट थी जिस पर अभिषेक बनर्जी ने चुनौती दी थी कि BJP को यहां जीतने में 10 जन्म भी कम पड़ेंगे… तब अभिषेक बनर्जी ने भाजपा के लिए कहा था कि तुम्हारी गुजराती गैंग और उनके लोग मेरे डायमंड हार्बर मॉडल को छू भी नहीं पाएंगे और हिम्मत है तो फाल्टा आकर लड़ो, अपना सबसे ताकतवर नेता भेजो… अब आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हो कि वो सीट कितनी इंपोर्टेट थी जिससे जहांगीर खान पीछे हट गए थे।
इन घटनाओं को अगर आप पिरोकर देखने की कोशिश करेंगे तो ये संकेत मिलता है कि TMC में अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। वैसे तो TMC के लिए इस समय बाहर भी कुछ खास अच्छा नहीं हो रहा है।
सालों बाद आजाद महसूस कर रहा बंगाल?
वीडियोज तो सबने देखे हैं कि अभिषेक बनर्जी पर कैसे गुस्साई जनता अंडे फेंककर मारती है। उसके बाद उन्हें स्ट्रेचर पर डालकर अस्पताल ले जाया जाता है। हालांकि मेडिकल चेकअप के बाद ये भी सामने आया कि उन्हें किसी तरह की कोई चोट नहीं आई है और वो पूरी तरह ठीक हैं। खैर, अब इस पर पॉलिटिक्स जो होनी है वो होगी ही।
इसी तरह आपने TMC सांसद कल्याण बनर्जी का वीडियो भी देखा होगा जब उन पर भी जनता का गुस्सा निकलता है। कल्याण बनर्जी तो सीधा जमीन पर ही लेट गए थे। अब ये उम्र बढ़ने के साथ ऐसा हुआ या फिर संसद में रिहर्सल का एक्सपीरियंस है… अब ये तो वही जाने लेकिन हां वो भी पब्लिक के निशाने पर आए।
इससे पहले हमनें वो वीडियो भी देखें है जब तृणमूल कांग्रेस के गुंडे हफ्ता वसूली के लिए एक मोहल्ले में आए थे और वहां लोगों ने इनको पकड़कर पीटा गया था। यहां पर मैंने गुंडा शब्द इसलिए कहा क्योंकि वसूली का काम तो गुंडा ही करता है और अब पश्चिम बंगाल की जनता इस गुंडई के खिलाफ खुद जमीन पर उतरी है।
पश्चिम बंगाल में पहली बार ये भी देखने को मिला कि जिन लोगों से TMC के नेताओं ने कटमनी ली थी अब वो पैसा उन्हें लौटाने की बात हो रही है। कट-मनी यानी किसी स्कीम के नाम पर जो पैसा आता है उसमें से कुछ पैसा TMC वाले अपनी जेब में रख लेते थे, इसे कट-मनी कहा जाता है।
आप सोचिए कि बंगाल की जनता लाउडस्पीकर पर ये बात याद दिला रही है कि PM Awas Yojana के नाम पर जो पैसा लिया गया था, वो 4 जून तक वापस होना चाहिए।
तो बंगाल में अब जनता खुद हिसाब चुकता करने पर आ गई है। अब अगर आप इसे समझने की कोशिश करेंगे तो एक लाइन में ये बात है कि पश्चिम बंगाल की जनता इतने सालों बाद अब जाकर आजादी महसूस कर रही है वरना वो हमेशा डर के माहौल में जीती आई है। कोई हफ्ता वसूलने आया है तो उसे देना पड़ेगा, कट-मनी मांगी जा रही है तो देनी पड़ेगी नहीं दोगे तो आपकी जान पर भी खतरा आ सकता है।
अब नेताओं पर जो हमले हो रहे हैं इसको लेकर भी दो धड़े बंटे हुए हैं। एक तो वो है जो इस हमले के विरोध में हैं और दूसरा वो जो ये कह रहा है कि बोए पेड़ बबूल का, तो आम कहाँ से खाए?
एंटी TMC वाले जो आज TMC के नेताओं पर अंडे फेंककर मार रहे हैं। यहां पर जरा ठहरकर सोचिए कि इनकी जगह पर अगर TMC होती तो आज अंडे़ नहीं बल्कि गोलियां बरस रही होती और ऐसा नहीं है कि ये कोई हवा-हवाई बात है कि बल्कि ये हुआ है।
13 जुलाई 2020 की वो घटना आप याद कीजिए जब बीजेपी के विधायक देबेंद्र नाथ रॉय का शव उत्तर दिनाजपुर में फंदे से लटका दिया गया था। बंगाल में भाजपा के सपोर्टर्स पर हमले तो अनगिनत हैं और भाजपा के तब के अध्यक्ष जेपी नड्डा की गाड़ी पर कैसे हमला हुआ था उसके भी वीडियोज मौजूद हैं। इसके अलावा, बलात्कार और निर्मम हत्या अलग…और उस पर ममता बनर्जी का बलात्कार को प्रेम प्रसंग बताना और यह कहना कि ये छोटी-छोटी घटनाएं हैं।
सोशल मीडिया पर भी कई लोग ये कह रहे हैं कि बंगाल की जनता अब हिसाब चुकता कर रही है। पिछले 15 सालों में जिस तरह की हिंसा और डर का माहौल TMC ने बनाया था अब उसे वही वापस मिल रहा है और कुछ तो ये भी कह रहे हैं कि ये तो उसका प्वाइंट 1 परसेंट भी नहीं है।
हालांकि, मैं यहां पर ये बात साफ कर देता हूं कि मैं किसी भी तरह की हिंसा का समर्थक नहीं हूं, मैं बस आपको घटनाएं बता रहा हूं, जो बंगाल में हो रही हैं, जो बंगाल देख रहा है, जो बंगाल ने पहले कभी नहीं देखा कि जनता हिसाब चुकता कर रही है।





