नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा आयोजित किया गया विरोध प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक असर छोड़ने में नाकाम रहा। ‘OpIndia’ की एक विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, आयोजकों ने इस प्रदर्शन में लाखों युवाओं के शामिल होने का दावा किया था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आई।
दावे बड़े, पर भीड़ नदारद
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन स्थल पर 1,000 लोग भी इकट्ठा नहीं हो सके। स्थिति यह थी कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की तुलना में वहां कवर कर रहे मीडियाकर्मी और सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस बल की संख्या कहीं ज्यादा दिखाई दे रही थी। लाखों की भीड़ जुटाने का दावा करने वाले इस आंदोलन की शुरुआत ही बेहद कमजोर रही।
मुख्य मांग और एजेंडे को लेकर असमंजस
इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य नीट (NEET) परीक्षा में हुई धांधली के खिलाफ आवाज उठाना और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करना था। हालांकि, जब जमीन पर मौजूद लोगों से बात की गई, तो उनके बीच मुद्दों को लेकर भारी भ्रम दिखाई दिया।
ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि प्रदर्शन में शामिल कई लोग यह साफ-साफ बताने में पूरी तरह असमर्थ थे कि देश की इस शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं का उनके पास क्या ठोस समाधान है। मांगों को लेकर वैचारिक स्पष्टता की भारी कमी देखने को मिली।
आंतरिक मतभेद और विवादित नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान उस समय स्थिति और तनावपूर्ण हो गई, जब आंदोलन के भीतर ही आपसी मतभेद और वैचारिक टकराव खुलकर सामने आ गए। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रतिभागियों ने ‘भारत को नेपाल बनाने’ जैसे हैरान करने वाले और ‘देश विरोधी’ नारे लगाए। हालांकि, वहां मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों ने ही इन नारों का विरोध करना शुरू कर दिया, जिससे आंदोलन की अंदरूनी फूट उजागर हो गई।
इसके अलावा, हर बार की तरह यहां भी प्रदर्शनकारियों का एक हिस्सा मीडिया के प्रति बेहद नाराज दिखा। उन्होंने ग्राउंड पर काम कर रहे पत्रकारों को ‘गोदी मीडिया’ कहकर अपना गुस्सा जाहिर किया।
निष्कर्ष: क्यों फ्लॉप रहा आंदोलन?
रिपोर्ट के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि CJP का यह आंदोलन पूरी तरह से दिशाहीन था। एक स्पष्ट, एकीकृत एजेंडे की कमी और प्रदर्शनकारियों के बीच वैचारिक स्पष्टता न होने के कारण यह बड़ा आंदोलन एक छोटे से हंगामे में सिमट कर रह गया और अपने किसी भी सार्थक उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहा।




