RBI Gold

RBI ने बेचा 1 लाख करोड़ का सोना? जानिए ब्लूमबर्ग की इस सनसनीखेज रिपोर्ट के पीछे का असली खेल

Summary
ब्लूमबर्ग द्वारा आरबीआई (RBI) के गोल्ड रिजर्व को लेकर किए गए 1 लाख करोड़ रुपये के सोने की बिक्री के दावे ने वित्तीय जगत में हड़कंप मचा दिया था। जानिए कैसे गलत कीमतों के आकलन पर टिकी यह रिपोर्ट बाद में वापस लेनी पड़ी और क्यों यह आर्थिक फेक न्यूज का एक बड़ा उदाहरण बन गई।

एक झूठी खबर कैसे हिला सकती है पूरी अर्थव्यवस्था सोचिए कि किसी बड़े न्यूज पोर्टल पर अचानक फ्लैश आए कि SBI को 2 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया है। कुछ ही मिनटों में बाजार में घबराहट फैल जाएगी, निवेशक अपने शेयर बेचने लगेंगे, खाताधारक बैंक से पैसा निकालने दौड़ पड़ेंगे और लाखों करोड़ रुपये की वैल्यू बाजार से गायब हो सकती है।

अगले दिन अगर वही पोर्टल कहे कि खबर गलत थी, तब तक जो नुकसान होना था, वह हो चुका होगा और वह वापस नहीं आएगा। हाल ही में ब्लूमबर्ग ने दावा किया कि RBI ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का सोना बेच दिया है। बाद में उसने स्वीकार किया कि RBI के गोल्ड रिजर्व का आकलन गलत कीमतों के आधार पर किया गया था। सवाल यह नहीं है कि इस रिपोर्ट का तत्काल असर कितना हुआ, बल्कि यह है कि ऐसी खबरें कितना बड़ा नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखती हैं।

इतिहास गवाह है: फर्जी खबरों ने पहले भी मिटाई है अरबों-खरबों की संपत्ति

8 अप्रैल 2025 को एक वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि डोनाल्ड ट्रम्प अपने टैरिफ प्लान को 90 दिनों के लिए स्थगित करने वाले हैं। इस खबर के चलते बाजार तेजी से ऊपर गया, लेकिन जब व्हाइट हाउस ने इसे गलत बताया, तो कुछ ही समय में ट्रिलियनों डॉलर की वैल्यू मिट गई।

इसी तरह 2013 में एसोसिएटेड प्रेस के अकाउंट से एक फर्जी ट्वीट किया गया कि व्हाइट हाउस में विस्फोट हुआ है और बराक ओबामा घायल हो गए हैं। बाद में पता चला कि अकाउंट हैक हुआ था, लेकिन तब तक लगभग 130 बिलियन डॉलर बाजार से गायब हो चुके थे। ये घटनाएं दिखाती हैं कि बाजार केवल आंकड़ों पर नहीं बल्कि भरोसे पर चलता है, और गलत सूचना उस भरोसे को झकझोर सकती है।

आर्थिक फेक न्यूज पर सख्त जवाबदेही की जरूरत

जब तक किसी गलत खबर का खंडन होता है, तब तक निवेशकों का नुकसान, संस्थानों की साख को क्षति और बाजार में अस्थिरता पैदा हो चुकी होती है। इसलिए, ऐसी गंभीर आर्थिक गलतियों को केवल ‘एडिटोरियल एरर’ कहकर नहीं छोड़ा जा सकता। यदि किसी मीडिया संस्थान की रिपोर्टिंग से वित्तीय संस्थाओं या बाजारों को नुकसान पहुंचता है, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

कानूनी कार्रवाई, नियामकीय जांच और भारी आर्थिक दंड जैसे उपायों पर विचार किया जाना चाहिए। सूचना के इस दौर में विश्वसनीयता सबसे बड़ी पूंजी है, और उसकी रक्षा करना उतना ही जरूरी है जितना किसी देश की आर्थिक स्थिरता की रक्षा करना।

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