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वोट चोरी का प्रोपेगेंडा: राहुल गांधी के 4 बड़े दावों का फैक्ट चेक

Summary

हर तीसरे दिन लॉन्च होने को तैयार कांग्रेस नेता राहुल गांधी अब एक नए प्रोपेगेंडा पर काम कर रहे हैं। राहुल गांधी का ये नया शिगूफा है ‘वोट चोरी’। EVM और VVPAT पर हल्ला मचाने से जब कुछ नहीं हुआ, तो अब राहुल गांधी ने नई थ्योरी निकाली है। ये प्रोपेगेंडा वाली PPT ऐसे पेश की गई जैसे कोई नया iPhone लॉन्च हो रहा हो। और फिर क्या था, कांग्रेस-ऑक्युपाइड पत्रकारों ने इसे बेचने का काम शुरू कर दिया। मज़ा तो तब आया जब फूड व्लॉगर और डांस करने वाले इन्फ्लुएंसर्स भी अचानक ‘वोट चोरी’ पर ज्ञान देने लगे।

राहुल गांधी ने एक के बाद एक स्लाइड्स दिखाईं और चुनाव आयोग को लेकर दुनियाभर के दावे किए कि कैसे-कैसे वोट चोरी की गई होगी। ECI (Election Commission of India) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन लोगों का झूठ उजागर कर दिया, लेकिन राहुल गांधी के फर्जीवाड़ों पर सवाल और गहरे होते गए। अपने माइक-कैमरा-एक्शन वाले अंदाज़ में राहुल ने चुनाव आयोग पर कई आरोप लगाए। आइए देखें, उनके चार बड़े दावे क्या थे और ECI ने क्या जवाब दिया।

राहुल गांधी ने पहला दावा कई वोटर्स के EPIC नंबर को लेकर किया। इसके लिए राहुल गांधी एक EPIC नंबर लाए, उनमें से एक था FPP6437040, जो कि आदित्य श्रीवास्तव नाम के व्यक्ति का था। इसके लिए कहा गया कि यह कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र—तीनों राज्यों की वोटर लिस्ट में है। इसे उन्होंने भयानक गड़बड़ी बताते हुए बड़ा हौव्वा खड़ा करना चाहा। उनका दावा था कि एक वोटर कई जगह रजिस्टर्ड है।

लेकिन राहुल गांधी के इस आरोप का फैक्ट-चेक आदित्य श्रीवास्तव ने खुद ही कर दिया और बाद में चुनाव आयोग ने भी। आदित्य ने साफ कहा कि 2019 में उन्होंने मुंबई से वोट दिया था, फिर 2021 में बेंगलुरु शिफ्ट हो गए। लखनऊ से मुंबई और फिर मुंबई से बेंगलुरु जाने के बाद पुराना रिकॉर्ड अपने आप हट गया होगा। यानी तीन राज्यों में वोट डालने वाली राहुल की बात पूरी तरह गलत साबित हुई। चुनाव आयोग की जांच में भी यही सामने आया कि आदित्य का नाम सिर्फ कर्नाटक की वोटर लिस्ट में है, यूपी और महाराष्ट्र में नहीं। इसके अलावा, राहुल गांधी के इस दावे का जवाब देते हुए CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भले ही किसी का नाम एक से ज्यादा जगह रजिस्टर हो गया हो, वह वोट एक ही जगह डालता है।

वोटर लिस्ट पर हल्ला मचाने की एक्साइटमेंट में राहुल गांधी ने एक 70 साल की महिला की पर्सनल डिटेल्स सार्वजनिक कर दीं। राहुल गांधी ने बेंगलुरु की शकुन रानी के बारे में बताया कि 70-75 साल का कोई व्यक्ति पहली बार वोटर नहीं बन सकता। बड़ी सी स्क्रीन पर राहुल गांधी ने शकुन रानी की फोटो ज़ूम की, उनकी डिटेल्स सार्वजनिक कीं और ये अफवाह फैलाई कि वो दो बार वोट देती हैं। बाद में चुनाव आयोग ने साफ किया कि राहुल गांधी की दिखाई लिस्ट आधिकारिक थी ही नहीं। इसके बाद शकुन रानी ने खुद इस PPT का भंडाफोड़ किया और साफ किया कि उन्होंने वोट एक ही बार दिया है। राहुल गांधी को ये लगता है कि वोटर्स जो ‘फॉर्म-6’ भरते हैं, वो 70 साल के व्यक्ति के भरने के लिए नहीं बना है।

राहुल गांधी ने तीसरा दावा किया कि बिहार में 65 लाख मतदाताओं को गलत तरीके से सूची से हटाया गया है। उन्होंने इसे ECI की साजिश बता डाला। ये सब जानने के लिए हमने ECI का जवाब देखा। ये कागज़ बताते हैं कि चुनाव आयोग ने इस कवायद के लिए काफी रिसोर्सेज झोंके हैं। ये प्रक्रिया कितनी मेहनत वाली रही, वह साफ तौर पर इसमें लिखा है—ट्रेनिंग से लेकर घर-घर जाकर लोगों की जानकारी लेने तक। और अगर इतनी बड़ी तादाद में सच में लोगों के नाम हटा दिए गए होते, तो क्या इन्होंने अब तक इतनी बड़ी संख्या में हड़ताल और अपनी मांगों को नहीं उठाया होता?

डॉक्यूमेंट में साफ लिखा है कि इस प्रोसेस के लिए BLO (Booth Level Officer) ने तीन बार घर-घर जाकर सर्वे किया, उनके घरों में पर्चे डाले और हर बार आसपास भी पूछताछ की। इस दौरान मृत, ट्रांसफर्ड या डुप्लिकेट वोटर्स की पहचान की गई। इसके लिए ग्राउंड पर मौजूद BLA यानी बूथ लेवल एजेंट्स की भी मदद ली गई। ये BLA ही पॉलिटिकल पार्टीज का बस्ता संभालने वाले लोग होते हैं, और ये अपनी जिम्मेदारी कितनी गंभीरता से निभाते हैं, ये हम सभी जानते हैं। इससे ये पता लगा कि 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 7.24 करोड़ ने अपने दस्तावेज जमा किए और बाकी 65 लाख ने फॉर्म वापस नहीं दिया। नामों को हटाने का कारण ये है कि 22 लाख वोटर्स मृत थे, 36 लाख माइग्रेट हो गए और 7 लाख की रजिस्ट्रेशन डुप्लिकेट थी। BLO जानकारी में गड़बड़ न करें, इसे चेक करने के लिए सुपरवाइजिंग अथॉरिटी को 10% फॉर्म का ऑन-ग्राउंड वेरिफिकेशन करने को भी कहा गया। बाद में, जिनके नाम हटाए गए, उनकी जानकारी सार्वजनिक करने के लिए एक जिलेवार वेबसाइट भी बना दी गई।

राहुल गांधी के दावों की लिस्ट में चौथा दावा देश के गरीबों के अधिकारों को प्रभावित करने वाला था। राहुल गांधी और उनका लेफ्ट लिबरल गैंग किसी भी वोटर लिस्ट में जीरो हाउस नंबर होने पर खूब शोर मचा रहा था। अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी के लिए ये किसी ‘यूरिका मोमेंट’ से कम नहीं था। चुनाव आयोग ने साफ बताया है कि देश में करोड़ों लोग बेघर हैं; कोई फुटपाथ पर सोता है तो कोई अवैध कॉलोनी में, कहीं कोई किराए के घर में रहता है तो कोई सुनसान इलाके में।

चुनाव आयोग ने बताया कि कई इलाकों में मकानों के नंबर ही नहीं दिए गए हैं, ऐसी कंडीशन में ‘0’ नंबर दे दिया जाता है। CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि किसी के घर का नंबर क्या है, इससे उसके वोटर होना या नहीं होना डिसाइड नहीं होता। वो भारत का नागरिक है और 18 साल से ऊपर है, तो यही उसका वोटर होना तय करता है। चुनाव आयोग का साफ कहना है कि वह मतदाता के साथ चट्टान की तरह खड़ा है और किसी को मतदान के अधिकार से इसलिए वंचित नहीं कर सकता क्योंकि कोई पॉलिटिशियन PPT बनाकर रोज नए आंकड़े मीडिया के सामने बकता है।

राहुल गांधी खुद जानते हैं कि चुनाव आयोग पर रोज कीचड़ फेंककर वो कुछ अचीव नहीं करने वाले, लेकिन उनके दिमाग में दूसरा आइडिया चल रहा है। उनका आइडिया है कि लोकतांत्रिक देश में लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण पिलर यानी चुनाव आयोग को बदनाम करके ‘रिजीम चेंज’ जैसे ऑपरेशन की नींव डाली जाए। राहुल गांधी सोचते हैं कि चुनाव आयोग के ऊपर कोई भी गड़बड़ी का दावा करके वो उसकी विश्वसनीयता को ही खत्म कर देंगे और फिर जब चुनाव आयोग ही नहीं होगा, तो उनको चुनाव नहीं लड़ना पड़ेगा।

राहुल गांधी की सोच बड़ी सीधी है, जब चुनाव ही नहीं लड़ना पड़ेगा तो हार भी नहीं होगी, और जब हार नहीं होगी तो बार-बार बेइज्जती से भी बच जाएंगे। उन्हें लगता है, इसी रास्ते से सत्ता की वापसी हो सकती है। लेकिन सवाल उठता है कि अगर सच में ‘इलेक्टोरल प्योरिटी’ की इतनी चिंता होती, तो क्या कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं को ग्राउंड पर नहीं उतारती? क्या वो हर उस नागरिक का वोट पक्का नहीं कर रहे होते जिसका नाम छूट गया? और अगर राहुल को वोटर लिस्ट की सफाई इतनी ही प्यारी है, तो क्या वो नेपाली, बांग्लादेशी और रोहिंग्या नाम हटाने पर जोर नहीं देते? मगर हकीकत उल्टी है, राहुल उसी चुनाव आयोग को बदनाम कर रहे हैं, जो दशकों पुरानी गंदगी साफ करने में जुटा है।

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